उमरिया। जिले के वन विकास निगम के अंतर्गत पूर्व में हुए वृक्षारोपण सहित अन्य कार्य और मजदूरी भुगतान में भ्रष्टाचार मामले की जांच करने जांच टीम पहुंची हुई थी। लेकिन जांच टीम की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होना शुरू हो गया है। बताया गया कि RGM के निर्देश पर उमरिया सहित जोहिला खदानी रोपड़, सोहागपुर, जमुना कोतमा मैं बीते दिनों हुए कार्यों मैं भारी भ्रष्टाचार की शिकायत की की गई थी जिसकी जांच करने बाहर से एक जांच दल उमरिया पहुंचा हुआ था। लेकिन जांच दल के द्वारा ना तो शिकायतकर्ता को बुलाया गया और ना ही जांच टीम ने मौके पर जाकर जांच की है। सिर्फ वन विकास निगम के कार्यालय में बैठकर खानापूर्ति की गई है।
मिली जानकारी के मुताबिक यह पूरा मामला वन विकास निगम के रेंजर योगेश गुप्ता और अनिल सिंह के कार्यों की जांच करने टीम पहुंची हुई थी लेकिन जांच टीम की जांच कार्यवाही महज खाना पूर्ति तब देखी गई जब वह वन विकास निगम कार्यालय के एक कमरे में बैठकर की जा रही थी इस दौरान ना तो जांच टीम ने शिकायतकर्ता को बुलाया और ना ही मौके पर जाकर जांच की बल्कि कुछ मजदूरों को बुलाकर उनके कथन लिए गए हैं। सूत्रों से यह भी पता चला है कि जो भी मजदूर या मुंशी कथन देने पहुंचे हुए थे, उन्हें आरोपित रेंजरों के द्वारा चार पहिया वाहन में बैठाकर बकायदे लाया गया और अपने पक्ष में बयान दिलवाए गए।
सूत्र बताते हैं की रेंजर योगेश गुप्ता और अनिल सिंह के द्वारा पौधारोपण और अन्य कार्यों के माध्यम से भारी भ्रष्टाचार किया गया मजदूरों की मजदूरी भी नहीं दी गई इस मामले की उच्च स्तरीय शिकायत की गई थी इसके बाद विभाग के आरजीएम अधिकारी के द्वारा टीम बनाकर मामले की जांच करने के निर्देश दिए गए थे। सूत्र बताते है कि रेंजर गुप्ता के द्वारा जांच टीम से सांठ गांठ कर मामले में लीपापोती कर जांच को ठंडे बस्ते में डालने का कुत्सित प्रयास किया गया है। जबकि जांच टीम के समक्ष ना तो असल मजदूर जिनकी लाखों रुपए की मजदूरी को रेंजर ने डकार लिया है उन्हें उपस्थित कराया गया और ना ही शिकायत कर्ताओं को, इससे साफ जाहिर होता है कि रेंजर योगेश गुप्ता के द्वारा जांच को अपने पक्ष में करने के लिए हर प्रकार के हथकंडा अपनाया जा रहा है।