उमरिया। जिले में रेत उत्खनन के लिए रेत ठेका कंपनी बाबा महाकाल मिनरल्स के द्वारा अपने निजी स्वार्थ के लिए खनिज और पर्यावरण के नियमों को ताक पर रखकर न सिर्फ सामान्य वन मंडल और वन विकास के जंगलों को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के एरिया को भी भारी क्षतिग्रस्त किया है। जिले के चारों ओर रेत कंपनी बाबा महाकाल के द्वारा अवैध तरीके से रेत खदाने संचालित की है।फिर चाहे वह रिजर्व फॉरेस्ट में हो या बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के जंगल में हो। सभी जगह उनके द्वारा नियम विरुद्ध तरीके से अवैध उत्खनन किया जा रहा है। लेकिन बड़ी बात यह है कि इसे कोई देखने सुनने वाला नहीं है.?
ताजा मामला चंदिया क्षेत्र के अंतर्गत झाला टेकन से सामने आया है जहां रेत कंपनी बाबा महाकाल अवैध रूप से रेत का उत्खनन कर रही है। जबकि यह पूरा क्षेत्र बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आता है। लेकिन रेत कंपनी के द्वारा जंगल से हजारों ट्राली मुरुम का अवैध उत्खनन कर नदी तक पहुंचने के लिए सड़क बनाया है। यह भी बताया गया कि इस स्थान पर खनिज विभाग के द्वारा कोई भी रेत खदान स्वीकृत नहीं है। बावजूद इसके ठेका कंपनी के द्वारा मनमानी और दबंगई तरीके से रेत का अवैध उत्खनन निरंतर जारी है। इसके पहले भी समाचार के माध्यम से इस मामले से शासन प्रशासन को अवगत कराया गया थाम लेकिन पता नहीं क्यों किसी के कान में जूं तक नहीं रेंगी।
गौरतलब है कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के इस पूरे क्षेत्र में जंगल होने के साथ-साथ जंगली जानवरों का मूवमेंट रहता है। इस पूरे क्षेत्र में कई टाइगरों सहित अन्य जानवरों का रहवास है और जानवर पानी पीने के लिए इसी नदी का उपयोग करते हैं।लेकिन इस नदी में रेत कंपनी बाबा महाकाल के द्वारा बड़ी-बड़ी मशीनों के माध्यम से रेत का अवैध उत्खनन कर कई फीट गड्ढे कर इसे खाई नुमा बना रहे हैं। जिसके कारण जंगली जानवरों को पानी पीने में नदी तक पहुंचाने के लिए मुश्किल खड़ी होगी। वहीं पूरी रात बड़ी-बड़ी मशीनों से अवैध उत्खनन से होने वाले ध्वनि प्रदूषण से टाइगर और अन्य जानवरों पर विपरीत असर पड़ेगा।

हालांकि बाबा महाकाल के द्वारा रेत का अवैध उत्खनन करने की यह एक जगह भर नहीं है, बल्कि पूरे जिले भर में कंपनी के द्वारा खनिज और पर्यावरण के नियमों को ताक पर रखकर नियम विरुद्ध तरीके से रेत का अवैध उत्खनन किया जा रहा है। जबकि समय-समय पर शासन प्रशासन को इसकी जानकारी समाचारों के माध्यम से दी जाती है, लेकिन पता नहीं क्यों जिले का प्रशासनिक अमला इस पूरे मामले में आंखें मूंदकर बैठा हुआ है। जाहिर सी बात है इसके पीछे की जो वजह समझ आती है वह यह की नीचे से लेकर ऊपर तक के अधिकारी- कर्मचारी कहीं ना कहीं इस पूरे अवैध खेल में अपने निजी स्वार्थ के चलते अपना हिस्सा तय करके पूरे अवैध काम में मूक सहमति दी होगी.?