क्या नपा सीएमओ ज्योति सिंह के आगे नहीं चलते शासन- प्रशासन के आदेश और निर्देश? शासन के नियमों को भी किया दरकिनार

Editor in cheif
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उमरिया (संवाद)। नगर पालिका परिषद उमरिया की सीएमओ ज्योति सिंह की कारगुजारियाँ किसी से छिपी नहीं है। बीते कई दिनों से मीडिया में सुर्खियों पर रही सीएमओ के कारनामो से आम जनता भी अच्छी तरह से वाकिफ हो चुकी है। इनके लिए ना तो शासन प्रशासन के आदेश और निर्देश कोई मायने रखता है और ना ही जिले में बैठे वरिष्ठ अधिकारी। पूरा मामला नगर पालिका में सीएमओ के द्वारा किए गए भ्रष्टाचार और नियम विरुद्ध गतिविधियों से शुरू हुआ। पार्षदों की शिकायत से लेकर शासन द्वारा इन्हें हटाने, उनके पति के द्वारा पार्षदों को धमकाने, तत्कालीन कलेक्टर के द्वारा इनके खिलाफ जांच के निर्देश देने तक की पूरी कहानी में इनके द्वारा कहीं पर भी नियम और शासन प्रशासन के निर्देशों का पालन नहीं किया गया।
दरअसल नगर पालिका उमरिया में पदस्थ सीएमओ ज्योति सिंह के कारनामे उस वक्त उजागर हुए जब इनके द्वारा फर्जी तरीके से 1-1 लाख रुपए की खरीदी की गई। जिसमें लगभग इनके द्वारा 50 लख रुपए तक की राशि बेवजह नियम विरुद्ध तरीके से खर्च कर दी गई इस दौरान उनके द्वारा ना तो निविदा शर्तों का पालन किया गया और नाही पी आई सी के ध्यान में लाया गया कई चीजों की खरीदी में मार्केट रेट से ज्यादा किधर पर अपने चहेतों के द्वारा खरीदी कर ली गई। इस पूरे मामले की शिकायत परिषद के तमाम पार्षदों के द्वारा जिले के तत्कालीन कलेक्टर से लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तक की गई।
तत्कालीन कलेक्टर ने दिया था जांच के आदेश
परिषद के पार्षदों की शिकायत को संज्ञान में लेते हुए जिले के तत्कालीन कलेक्टर केडी त्रिपाठी के द्वारा एडीएम उमरिया को जांच के लिए निर्देशित किया था। जिसमें नगर परिषद नरोजाबाद के सीएमओ को भी शामिल किया गया था। इधर परिषद के द्वारा भी दोनों दलों भाजपा कांग्रेस के 2-2 पार्षद नगर पालिका की इंजीनियर और दो कर्मचारियों को मिलाकर एक जांच टीम का गठन किया गया। परिषद के द्वारा गठित जांच टीम जब जांच करने भंडार कक्ष पहुंची तब सीएमओ ज्योति सिंह के पति के द्वारा पार्षदों को खुलेआम धमकाया गया। जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया में वायरल हुआ था। वहीं तत्कालीन कलेक्टर के द्वारा जांच के लिए दिए गए निर्देश में एडीएम के द्वारा जांच टीम में शामिल नगर परिषद नरोजाबाद के सीएमओ को पत्र लिखकर दस्तावेज मंगाने और पूरे मामले की जांच के लिए निर्देशित किया गया लेकिन उस दौरान पूरे मध्यप्रदेश में तबादलों का दौर जारी था जिसमें एडीएम का भी तबादला अन्यत्र कर दिया गया जिससे एटीएम इस मामले में ज्यादा ध्यान नहीं दे सके।
जांच प्रभावित न हो इसके लिए नगरीय प्रशासन ने सीएमओ को हटाया
वहीं मध्यप्रदेश शासन नगरीय प्रशासन विभाग भोपाल के द्वारा सीएमओ ज्योति सिंह की जांच प्रभावित ना हो इसके लिए शासन ने सीएमओ को नगर पालिका उमरिया से हटा दिया और उनकी जगह नगर परिषद नौरोजाबाद के सीएमओ किशन सिंह ठाकुर को उमरिया नगरपालिका का प्रभारी सीएमओ बनाया गया। बाद में सीएमओ ज्योति सिंह के द्वारा शासन के इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में स्टे के लिए याचिका लगाई गई। जिसमें 15 दिनों बाद हाईकोर्ट ने सीएमओ ज्योति सिंह को शासन के द्वारा उसे हटाने के आदेश में स्थगन दे दिया।
हाईकोर्ट के स्टे से के बाद गड़बड़ी वाले दस्तावेज छिपाए जा रहे
हाईकोर्ट के स्थान स्थगन आदेश के बाद सीएम और ज्योति सिंह को एक बार फिर मौका मिल गया और उन्होंने इस दौरान नगर पालिका उमरिया में उनके द्वारा किए गए भ्रष्टाचार, नियम विरुद्ध गतिविधियां को सुधारने और दस्तावेज छिपाने का मौका मिल गया इनके द्वारा एडीएम की जांच में शामिल सीएमओ नौरोजाबाद से सांठगांठ करके जांच को अपने पक्ष में कराने के प्रयास भी शुरू हो गए। जानकारी के मुताबिक पीआईसी की बैठक में भी दस्तावेज मांगे जाने पर कई नास्तियाँ इनके पास से प्राप्त हुई हैं।
नवागत कलेक्टर से जांच कर कार्यवाही की अपील
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान जिस तरीके से ज्योति सिंह सीएमओ नगरपालिका उमरिया की कार्यप्रणाली रही है, उसे देखकर यह जरूर समझा जा सकता है कि सीएमओ ज्योति सिंह के आगे शासन-प्रशासन का आदेश नहीं चलता है  इसके अलावा जिले में बैठे वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश भी उनके लिए क्या और कितना मायने रखते हैं यह तो वही जाने। लेकिन क्या सीएमओ ज्योति सिंह के द्वारा नगर पालिका उमरिया में किए गए भ्रष्टाचार, नियम विरुद्ध तरीके से खरीदी में की गई गड़बड़ी की निष्पक्ष जांच की जा सकेगी? हालांकि जिले में नए कलेक्टर की पदस्थापना हो चुकी है और जिस तरीके से नए कलेक्टर साहब की कार्य प्रणाली दिखाई दे रही है। निश्चित रूप से उनके द्वारा ऐसे भ्रष्टाचारियों और गड़बड़ी करने वाले अधिकारियों को कभी बख्शा नहीं जाएगा।
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