CMO ज्योति सिंह मामले में,कलेक्टर के आदेश का नही हुआ पालन,अपने से उच्च अधिकारी का निचले स्तर के कर्मचारी कर रहे जांच

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उमरिया (संवाद)। नगर पालिका परिषद उमरिया की सीएमओ ज्योति सिंह के द्वारा किए गए भ्रष्टाचार की जांच और इस संबंध में उमरिया कलेक्टर डॉ केडी त्रिपाठी के द्वारा दिये गए आदेश का पालन होता दिखाई नहीं दे रहा है। अब आनन-फानन में नगर परिषद नौरोजाबाद  के सीएमओ के द्वारा सीएमओ ज्योति सिंह मामले में निचले स्तर के कर्मचारियों से मामले की जांच कराई जा रही है।

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उमरिया (संवाद)। नगर पालिका परिषद उमरिया की सीएमओ ज्योति सिंह के द्वारा किए गए भ्रष्टाचार की जांच और इस संबंध में उमरिया कलेक्टर डॉ केडी त्रिपाठी के द्वारा दिये गए आदेश का पालन होता दिखाई नहीं दे रहा है। अब आनन-फानन में नगर परिषद नौरोजाबाद  के सीएमओ के द्वारा सीएमओ ज्योति सिंह मामले में निचले स्तर के कर्मचारियों से मामले की जांच कराई जा रही है।दरअसल उमरिया नगर पालिका परिषद की सीएमओ ज्योति सिंह के द्वारा 1-1 लाख से कम के कार्यों को खंड- खंड कर खरीदी संबंधी मामले में भ्रष्टाचार और गड़बड़ी किए जाने की शिकायत परिषद के पार्षदों के द्वारा की गई थी। पार्षदों के द्वारक की शिकायत के आधार पर जिले के कलेक्टर डॉ केडी त्रिपाठी के द्वारा अपर कलेक्टर को मामले की जांच करने और जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने निर्देशित किया गया था। जिसमें अपर कलेक्टर के द्वारा नगर परिषद नौरोजाबाद के सीएमओ को जांच जांच टीम में शामिल करते हुए जांच करने हेतु पत्र लिखा गया था।लेकिन इस मामले में जांच कहां तक पहुंची और क्या हुआ यह तो नहीं पता। लेकिन इतना जरूर पता चला है कि नगर परिषद नौरोजाबाद के सीएमओ के द्वारा ज्योति सिंह के द्वारा किए गए भ्रष्टाचार की जांच अब उनसे निचले स्तर के अधिकारी यानी उपयंत्री और बाबू के माध्यम से कराई जा रही है। इसके लिए नरोजाबाद के सीएमओ के द्वारा बकायदे पत्र जारी कर परिषद के उपयंत्री सुखेंद्र सिंह तोमर और लेखापाल अचला चौगुले को जांच कर जांच प्रतिवेदन सौंपे जाने की बात लिखी गई है।गौरतलब है कि नौरोजाबाद नगर परिषद के सीएमओ के द्वारा जांच के संबंध में जारी पत्र का अवलोकन करें तो प्रतीत होता है कि अपने से बड़े अधिकारी की जांच भला निचले स्तर के कर्मचारी कैसे कर सकते हैं। लेकिन उनके पत्र में एक सीएमओ की जांच उससे निचले स्तर के कर्मचारी यानी उपयंत्री और लेखापाल से कराए जाने का निर्देश जारी करना कितना उचित है।हालांकि इस पूरे मामले में प्रारंभ से ही प्रशासन का ढुलमुल रवैया रहा है। जिले के कलेक्टर डॉ केडी त्रिपाठी के द्वारा सीएमओ ज्योति सिंह की शिकायत के संबंध में जांच करने के लिए जिले के अपर कलेक्टर को निर्देशित किया गया था लेकिन अपर कलेक्टर के द्वारा इस मामले में या कलेक्टर के निर्देश में कोई भी रुचि दिखाई नहीं दिखाई। बल्कि जैसे ही उन्हें कलेक्टर का जांच संबंधी पत्र मिला वैसे ही उन्होंने नगर परिषद नौरोजाबाद के सीएमओ को पत्र लिख दिया। इसके बाद जैसे ही नौरोजाबाद के सीएमओ को अपर कलेक्टर का पत्र मिला, उन्होंने भी अपने से निचले अधिकारी को जांच करने पत्र लिख दिया। लेकिन सीएमओ नौरोजाबाद पत्र लिखते समय यह भूल गए कि सीएमओ ज्योति सिंह की जांच उनसे नीचे के कर्मचारियों के द्वारा कराए जाने निर्देशित किया गया है।इस पूरे मामले में प्रारम्भ से ही प्रशासन का ढुलमुल रवैया रहा है। ऊपर से कलेक्टर के निर्देश की जिस तरह से अवहेलना की गई है इससे साफ प्रतीत होता है कि जिले में जिले के मुखिया कलेक्टर के निर्देश का कितना पालन किया जाता है साफ दिखाई दे रहा है। बहरहाल क्या अब सीएमओ नौरोजाबाद के द्वारा निचले स्तर के कर्मचारियों से उनके ऊपर के अधिकारी की जांच कराने की भूल को सुधार कर सकेंगे।
दरअसल उमरिया नगर पालिका परिषद की सीएमओ ज्योति सिंह के द्वारा 1-1 लाख से कम के कार्यों को खंड- खंड कर खरीदी संबंधी मामले में भ्रष्टाचार और गड़बड़ी किए जाने की शिकायत परिषद के पार्षदों के द्वारा की गई थी। पार्षदों के द्वारक की शिकायत के आधार पर जिले के कलेक्टर डॉ केडी त्रिपाठी के द्वारा अपर कलेक्टर को मामले की जांच करने और जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने निर्देशित किया गया था। जिसमें अपर कलेक्टर के द्वारा नगर परिषद नौरोजाबाद के सीएमओ को जांच जांच टीम में शामिल करते हुए जांच करने हेतु पत्र लिखा गया था।
लेकिन इस मामले में जांच कहां तक पहुंची और क्या हुआ यह तो नहीं पता। लेकिन इतना जरूर पता चला है कि नगर परिषद नौरोजाबाद के सीएमओ के द्वारा ज्योति सिंह के द्वारा किए गए भ्रष्टाचार की जांच अब उनसे निचले स्तर के अधिकारी यानी उपयंत्री और बाबू के माध्यम से कराई जा रही है। इसके लिए नरोजाबाद के सीएमओ के द्वारा बकायदे पत्र जारी कर परिषद के उपयंत्री सुखेंद्र सिंह तोमर और लेखापाल अचला चौगुले को जांच कर जांच प्रतिवेदन सौंपे जाने की बात लिखी गई है।
गौरतलब है कि नौरोजाबाद नगर परिषद के सीएमओ के द्वारा जांच के संबंध में जारी पत्र का अवलोकन करें तो प्रतीत होता है कि अपने से बड़े अधिकारी की जांच भला निचले स्तर के कर्मचारी कैसे कर सकते हैं। लेकिन उनके पत्र में एक सीएमओ की जांच उससे निचले स्तर के कर्मचारी यानी उपयंत्री और लेखापाल से कराए जाने का निर्देश जारी करना कितना उचित है।
हालांकि इस पूरे मामले में प्रारंभ से ही प्रशासन का ढुलमुल रवैया रहा है। जिले के कलेक्टर डॉ केडी त्रिपाठी के द्वारा सीएमओ ज्योति सिंह की शिकायत के संबंध में जांच करने के लिए जिले के अपर कलेक्टर को निर्देशित किया गया था लेकिन अपर कलेक्टर के द्वारा इस मामले में या कलेक्टर के निर्देश में कोई भी रुचि दिखाई नहीं दिखाई। बल्कि जैसे ही उन्हें कलेक्टर का जांच संबंधी पत्र मिला वैसे ही उन्होंने नगर परिषद नौरोजाबाद के सीएमओ को पत्र लिख दिया। इसके बाद जैसे ही नौरोजाबाद के सीएमओ को अपर कलेक्टर का पत्र मिला, उन्होंने भी अपने से निचले अधिकारी को जांच करने पत्र लिख दिया। लेकिन सीएमओ नौरोजाबाद पत्र लिखते समय यह भूल गए कि सीएमओ ज्योति सिंह की जांच उनसे नीचे के कर्मचारियों के द्वारा कराए जाने निर्देशित किया गया है।

इस पूरे मामले में प्रारम्भ से ही प्रशासन का ढुलमुल रवैया रहा है। ऊपर से कलेक्टर के निर्देश की जिस तरह से अवहेलना की गई है इससे साफ प्रतीत होता है कि जिले में जिले के मुखिया कलेक्टर के निर्देश का कितना पालन किया जाता है साफ दिखाई दे रहा है। बहरहाल क्या अब सीएमओ नौरोजाबाद के द्वारा निचले स्तर के कर्मचारियों से उनके ऊपर के अधिकारी की जांच कराने की भूल को सुधार कर सकेंगे।
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