उमरिया (संवाद)। पुलिस अधीक्षक उमरिया प्रमोद कुमार सिन्हा के द्वारा गिरफ्तारी / स्थाई वारंटियों की धरपकड़ एवं फरार, इनामी बदमाशो व अन्य अपराधियों की गिरफ्तारी हेतु निरंतर चलाये जा रहे अभियान के तहत थाना प्रभारी मानपुर निरीक्षक सुन्द्रेश सिंह मरावी के नेतृत्व में थाना मानपुर द्वारा न्यायालय जे.एम.एफ.सी. महोदय मानपुर के न्यायालय से जारी प्रकरण क्रमांक 146/2013 अपराध क्रमांक 281/2013 धारा 285 आईपीसी एवं 3/7 ईसी एक्ट के स्थाई वारंटी अनिल कुमार दुबे पिता रामनारायण दुबे उम्र 37 वर्ष निवासी देव तालाब जिला रीवा एवं प्रकरण क्रमांक 352/2017 अपराध क्रमांक 143/2014 धारा 420, 34 आईपीसी के स्थाई वारंटी राकेश यादव पिता जगन यादव उम्र 35 वर्ष निवासी ग्राम पठारी थाना मानपुर एवं शंभू लाल बैगा पिता भगनू बैगा उम्र 34 वर्ष निवासी ग्राम पठारी थाना मानपुर जिला उमरिया को (कुल 03 किता स्थाई वारंट) गिरफ्तार कर माननीय न्यायायल के समक्ष पेश किया गया। संपूर्ण कार्यवाही में निरी. श्री सुंद्रेश सिंह, प्रधान आरक्षक 228 दादूराम यादव, आरक्षक 262 आदर्श सिंह बघेल, आरक्षक 86 नीरज नामदेव एवं आरक्षक 341 देवेंद्र सिंह रघुवंशी का उल्लेखनीय योगदान रहा।
इधर पुलिस अधीक्षक उमरिया प्रमोद कुमार सिन्हा के निर्देशानुसार महिला जागरूक्ता एवं सायबर जागरूक्ता अभियान के तहत उमरिया बस स्टैण्ड में उपस्थित आम जन व महिलाओ को महिला व सायबर संबंधी अपराधो की जानकारी दी गई एवं महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के संबंध में बताया गया। महिला थाना प्रभारी उनि लता मेश्राम द्वारा महिलाओं एवं बालिकाओं से वार्ता करके उनके अन्दर आत्मविश्वास को बढाया एवं महिलाओ के अधिकारों के सम्बन्ध में अवगत कराया गया।
इसके साथ ही सभी महिलाओं व बालिकाओं को अवगत कराया कि जिले के सभी थानों में महिलाओं की सुरक्षा व सहायता हेतु एक विशेष महिला हेल्पडेस्क बनाया गया है, जहाँ पर महिला कर्मों द्वारा ही महिलाओं की शिकायत सुनी जाती हैं। महिलाओं व बालिकाओं को मानव दुर्व्यापर की जानकारी देते हुये महिला हेल्पलाईन नम्बर 1098 व 1090 व सायबर हेल्प लाइन नम्बर 1930 संबंध मे जानकारी दी गई। संपूर्ण कार्यक्रम में महिला थाना प्रभारी उनि लता मेश्राम एवं उनि बैष्णवी पाण्डेय, उनि महेन्द्र सिंह भलाबी उपस्थित रहे।
पुलिस फिर के बाद नोटिस भिबदेती और फरार घोषित कर देती है। मकसद बाद में ABSONDING दिखना। छोटे केस में बिना नोटिस के गिरफ्तार कर लेती है वरना नोटिस के बाद उसको जमानत देनी पड़ती है।
पुलिस फिर के बाद नोटिस भिबदेती और फरार घोषित कर देती है। मकसद बाद में ABSONDING दिखना। छोटे केस में बिना नोटिस के गिरफ्तार कर लेती है वरना नोटिस के बाद उसको जमानत देनी पड़ती है।