उमरिया (संवाद)। जिले के चंदिया के कुम्हारों के द्वारा देश की नामी मिल्टन (MILTON) कंपनी जैसे पानी के बॉटल की जगह सस्ते मिट्टी के बॉटल तैयार किए जाते है। जिसमे गर्मियों के समय मिट्टी की बोतलों में पानी बिल्कुल शीतल रहता है। यहां के कुम्हार अपनी हाथों की कला और अपनी हुनर से इसे बनाते है और जिले सहित देश और प्रदेशो में सप्लाई करते है। इसी के साथ इनके द्वारा बनाई गई सुराही पूरे देश मे प्रसिद्ध है। गर्मी का सीजन आते ही प्रदेश के कटनी, जबलपुर, शहडोल, रीवा, उमरिया तथा छत्तीसगढ़ के बिलासपुर, रायपुर जैसे शहरो मे चंदिया के कुम्हारो द्वारा तैयार किए गए घड़े, सुराही, मिट्टी के खिलौने, कप, केटली आदि विक्रय हेतु उपलब्ध रहते है।
जिला प्रशासन के द्वारा चंदिया के मिट्टी कला को आगें बढ़ाने हेतु लगातार प्रयास किए जा रहे है। विगत वर्ष 50 मिट्टी का कार्य करने वाले कुम्हार जाति के लोगो को माटी हस्त कला बोर्ड के माध्यम से प्रषिक्षण दिलाया गया था। उन्हें मिट्टी की कलात्मक वस्तुएं तैयार करने हेतु आवष्यक उपकरण भी वितरित किए गए। चंदिया के इन्हीं मिट्टी के कारीगरो मे से राम प्रसाद प्रजापति ने जनसुनवाई के दौरान कलेक्टर डा0 कृष्ण देव त्रिपाठी को ग्रीष्म काल मे पानी को ठण्डा रखने हेतु मिल्टन कंपनी के बोतल की तरह मिट्टी से बने बोतल उपहार मे भेंट किया।
उन्होने बताया कि चंदिया के मिट्टी से बने पानी की बोतल काफी लोकप्रिय हो रही है। इसका कारण बोतल की कीमत कम होना तथा गुणवत्ता अधिक होना है। उन्होने बताया कि मिट्टी के बोतल की कीमत मात्र 100 रूपये है। अब इन बोतलो की चंदिया की सुराही की तरह प्रदेष के विभिन्न जिलो तथा अन्य प्रदेषो से भी मांग आने लगी है। राम प्रसाद प्रजापति ने इस कार्य को व्यवसाय रूप देने हेतु 10 कुम्हार परिवारों का समूह तैयार कर व्यवसायिक इकाई प्रारंभ करने की योजना बनाई है।
कलेक्टर ने अनुसूचित जाति , जन जाति विकास निगम के माध्यम से इकाई की स्थापना हेतु प्रकरण तैयार कर बैंक को भेजने के निर्देष संबंधित विभाग के अधिकारी को दिए है। जल्द ही जिले मे मिट्टी से बने बोतल, सुराही, घड़ा तथा खिलौनो की औद्योगिक इकाई प्रारंभ हो सकेगी।