उमरिया। नगर पालिका उमरिया के कर्मचारियों के स्थानांतरण को लेकर चल रही कानूनी जद्दोजहद में कर्मचारियों को एक बार फिर निराशा हाथ लगी है। करीब पांच माह पूर्व हुए स्थानांतरण आदेश के खिलाफ कर्मचारियों द्वारा हाईकोर्ट में लगाई गई याचिका को पहले सिंगल बेंच ने खारिज किया था। इसके बाद डबल बेंच में दायर याचिका पर भी कर्मचारियों को राहत नहीं मिल सकी।
जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश शासन के नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा नगर पालिका उमरिया में पदस्थ कुछ कर्मचारियों के स्थानांतरण आदेश जारी कर उन्हें अन्यत्र पदस्थ किया गया था। स्थानांतरण आदेश के खिलाफ कर्मचारियों ने इसे चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया और स्थानांतरण पर स्थगन की मांग की। मामले की सुनवाई के दौरान सिंगल बेंच ने कर्मचारियों की याचिका खारिज कर दी। इसके बाद कर्मचारियों की ओर से डबल बेंच में अपील की गई, लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिली।
लगातार कानूनी प्रयास,फिर भी नहीं मिली राहत
स्थानांतरण आदेश पर रोक लगाने के लिए कर्मचारियों की ओर से लगातार कानूनी प्रयास किए गए। हालांकि दोनों स्तरों पर याचिका खारिज होने के बाद स्थानांतरण आदेश के खिलाफ तत्काल राहत की उम्मीदों को झटका लगा है। न्यायालय में प्रस्तुत दस्तावेजों और शपथ पत्रों को लेकर भी मामले में सवाल उठाए गए हैं। मिली जानकारी में बताया गया कि कर्मचारियों के द्वारा याचिका में झूठे और असत्य शपथ पत्र प्रस्तुत कर कोर्ट को गुमराह किये जाने का पूरा प्रयास किया गया। हालांकि इस बात की पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
अब आगे क्या होगा?
डबल बेंच से भी राहत नहीं मिलने के बाद कर्मचारियों के सामने आगे की कानूनी प्रक्रिया का विकल्प ही प्रमुख रूप से बचता दिखाई नही दे रहा है। वहीं, स्थानांतरण को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर कर्मचारी अन्यत्र पदस्थापना स्वीकार करने के बजाय उमरिया नगर पालिका में ही बने रहने के लिए लगातार प्रयास क्यों कर रहे हैं।
जबकि शासकीय सेवा में स्थानांतरण एक प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा माना जाता है। ऐसे में स्थानांतरण आदेश के बाद लगातार न्यायालय की शरण लेने का मामला अब स्थानीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है।