Bandhavgarh/ उमरिया। बीते दिनों बांधवगढ़ में डब्ल्यू डब्ल्यू एफ इंडिया संस्था के द्वारा कराई गई मीडिया कार्यशाला में उपजा विवाद अब थमने का नाम नही ले रहा। विवाद का समाचार लगातार अखबारों में सुर्खियां बने हुए हैं। वहीं अब कुछ पत्रकार संगठन के द्वारा इस विवाद को लेकर WWF संस्था के हेड आफिस उच्च प्रतिनिधि और बीटीआर के विभागीय जिम्मेदारों की उच्च स्तरीय शिकायत करने की बात कही है।
मामले में बताया गया कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण के नाम पर सक्रिय WWF की भूमिका अब सवालों के घेरे में है। संस्था द्वारा सर्वे, अध्ययन और संरक्षण गतिविधियों के दावे किए जाते हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर इनका ठोस असर कितना हुआ, यह स्पष्ट नहीं है। वहीं विभाग को अनुदान देकर और विभाग के अधिकारी कर्मचारियों को महंगे गिफ्ट देकर पार्क में अनाधिकृत रूप से प्रवेश और तमाम प्रकार की मनमानी करने के आरोप लग रहे हैं.?
बांधवगढ़ में आज भी मानव-वन्यजीव संघर्ष, ग्रामीणों की सुरक्षा और कॉरिडोर पर सतत मानव दखल जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। सवाल है कि वर्षों के अध्ययन और परियोजनाओं के बाद जमीनी बदलाव कहां दिखाई दे रहा है? कितने गांवों को लाभ मिला और कितने संघर्ष के मामले कम हुए? अब WWF को अपने काम का स्पष्ट और सार्वजनिक हिसाब देना चाहिए।
लोगों ने आरोप लगाया है कि WWF संस्था के द्वारा किए जा रहे दावे पूरी तरीके से खोखले साबित हो रहे हैं। बल्कि इन दावों की आड़ में संस्था के द्वारा दिए जा रहे अनुदान का बंदरबांट जरूर हो रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक WWF संस्था के द्वारा स्थानीय स्तर पर नियुक्त उनके प्रतिनिधियों के द्वारा विभाग से सांठ गांठ करके संस्था के अनुदान का वारा न्यारा किया जा रहा है। इसके अलावा विभाग के अधिकारी कर्मचारियों को महंगे गिफ्ट देकर पार्क क्षेत्र में अनाधिकृत रूप से प्रवेश कर पार्क क्षेत्र में पूरी तरीके से मनमानी की जाती है.?
सोशल मीडिया में साझा किए गए एक पोस्ट के मुताबिक बीते समय मे कुछ समय के लिए आईएफएस गौरव चौधरी जब बांधवगढ़ में पोस्टेड हुए थे तब उन्होंने इस संस्था से व्योरा माँग लिया था कि अब तक इन्होंने कितनी रिसर्च बांधवगढ़ के समसामयिक विषयों पर की है और उसका BTR को क्या आउटपुट मिला है। लेकिन उनके जाने के बाद चीजें जस की तस हो गईं और संस्था के द्वारा भी कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया.?
बहरहाल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी कि इस मामले में संलिप्तता स्पष्ट हो रही है। जबकि विभाग को चाहिए कि ऐसी संस्था पर लगाम लगाए जो कहीं ना कहीं वाइल्ड लाइफ नियमों का उल्लंघन कर वन्य जीव और ग्रामीणों के संरक्षण सहित अन्य तमाम स्लोगन के नाम फर्जीवाड़े की रोटी सेंक रहे हैं.? हालांकि इस पूरे मामले को लेकर कुछ पत्रकार संगठन WWF संस्था के हेड ऑफिस या उनके अधिकृत उच्च प्रतिनिधियों से लिखित शिकायत करने की बात कही है। इसके साथ ही पत्रकार संगठन के द्वारा वन विभाग के मुख्यालय यानी पीसीसीएफ से भी इस मामले का संज्ञान लेने का अनुरोध किया जाएगा।