NGT ने टोरेंट पावर के खिलाफ याचिका का किया निपटारा, परियोजना को मिली बड़ी राहत

Editor in cheif
4 Min Read

रक्सा-कोलमी परियोजना से जुड़े पर्यावरणीय और वन भूमि संबंधी आरोपों पर सुनवाई, ट्रिब्यूनल ने कहा—वर्तमान में नहीं मिला उल्लंघन

अनूपपुर। रक्सा-कोलमी क्षेत्र में निर्माणाधीन टोरेंट पावर की प्रस्तावित 2×800 मेगावाट थर्मल पावर परियोजना को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT), सेंट्रल जोन बेंच भोपाल में चल रहे मामले में महत्वपूर्ण आदेश सामने आया है। Original Application No. 114/2026 (CZ) में बुद्धसेन राठौर द्वारा दायर याचिका पर 12 अगस्त 2026 को सुनवाई करते हुए न्यायाधिकरण ने आवेदन का निपटारा कर दिया। मामले में टोरेंट पावर लिमिटेड सहित अन्य पक्षकार प्रतिवादी थे।

परियोजना को लेकर लगाए गए थे कई आरोप

याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया था कि अनूपपुर जिले के धुरवासिन गांव में गोहिरारी नदी के क्षेत्र में वन भूमि से संबंधित खसरों पर बांध/जल संरचना निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा कोलमी गांव के खसरा नंबर 1076 में राजस्व वन भूमि पर सड़क निर्माण और जल उपयोग से जुड़े मुद्दे भी याचिका में उठाए गए थे। याचिका में वन भूमि की बहाली तथा संबंधित विभागों से जांच और अनुपालन रिपोर्ट मंगाए जाने की मांग की गई थी।

NGT के समक्ष रखे गए कंपनी और विभागीय पक्ष

सुनवाई के दौरान परियोजना पक्ष की ओर से बताया गया कि परियोजना के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त है तथा जल संसाधन विभाग सहित संबंधित सक्षम प्राधिकरणों से आवश्यक अनुमति ली गई है। कंपनी की ओर से यह भी बताया गया कि जिस क्षेत्र को लेकर आपत्ति उठाई गई थी, वहां वन भूमि से संबंधित स्थिति सामने आने के बाद संबंधित गतिविधियां रोक दी गई थीं और सुधारात्मक कदम उठाए गए।

NGT के आदेश में दर्ज है कि परियोजना के लिए 17 अप्रैल 2026 को पर्यावरणीय स्वीकृति प्रदान की गई थी। रिकॉर्ड के अनुसार प्रस्तावित परियोजना के लिए कुल 341.85 हेक्टेयर भूमि का उल्लेख है और परियोजना में वन भूमि शामिल नहीं होने की बात पर्यावरणीय स्वीकृति प्रक्रिया के दौरान दर्ज की गई थी।

वन विभाग को निगरानी के निर्देश

मामले की सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल ने वन विभाग को वन क्षेत्र की पहचान, सीमांकन और सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने के निर्देश दिए। NGT ने स्पष्ट किया कि किसी भी वन भूमि को गैर-वन उपयोग में सक्षम अनुमति के बिना परिवर्तित नहीं किया जा सकता। साथ ही वन क्षेत्र में किसी प्रकार का अतिक्रमण पाए जाने पर संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

याचिका का हुआ निपटारा

NGT ने अपने आदेश में कहा कि परियोजना के संबंध में सक्षम प्राधिकरणों से पर्यावरणीय स्वीकृति और जल निकासी/उपयोग से संबंधित अनुमति प्राप्त है तथा वर्तमान स्थिति में कोई उल्लंघन नहीं पाया गया। ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि पर्यावरणीय स्वीकृति को चुनौती देने के लिए आवेदक के पास उपयुक्त वैधानिक उपाय उपलब्ध है। इसके बाद Original Application No. 114/2026 (CZ) तथा I.A. No. 79/2026 का निपटारा कर दिया गया।

NGT का यह आदेश रक्सा-कोलमी परियोजना के संबंध में सामने आए पर्यावरणीय एवं वन भूमि संबंधी विवाद में महत्वपूर्ण न्यायिक घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि, आदेश में वन क्षेत्र की निगरानी और किसी संभावित अतिक्रमण की स्थिति में नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं।

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *