Dindauri: यहां दिखा कलेक्टर का एक अलग अंदाज,दिव्यांग छात्रों के बीच बैठ उनके साथ की मस्ती

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डिंडौरी (संवाद)। जिलों में पदस्थ कलेक्टर के पास तो अमूमन स्वयं के लिए समय निकाल पाना बड़ा ही मुश्किल होता है तमाम सरकारी योजनाएं उनका क्रियान्वयन से लेकर पूरे जिले की गतिविधियों और फिर भारी भरकम फाइलों को निपटने में पूरा समय गुजर जाता है। इस बीच कलेक्टर अपनी या अपने अन्य दायित्वों के लिए समय नहीं निकाल पाते लेकिन डिंडोरी जिले की कलेक्टर विकास मिश्रा इन सबसे जब भी वक्त निकालते हैं, तब वह कहीं दिव्यांग बच्चों के स्कूल या छात्रावास पहुंच जाते हैं तो कभी आदिवासी बालक बालिकाओं के बीच पहुंचते हैं।

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इसी तरह डिंडोरी कलेक्टर विकास मिश्रा अपने लिए समय निकालकर दिव्यांगों के छात्रावास भोंदू टोला पहुंच गए जहां उन्होंने न सिर्फ दिव्यांग बच्चों और छात्रावास के संबंध में जानकारी ली बल्कि वह उनके साथ मस्ती भी की है। कलेक्टर श्री विकास मिश्रा ने दिव्यांग छात्रावास भोंदू टोला डिंडोरी में बच्चों से मुलाक़ात करने पहुंचे। कलेक्टर को अपने बीच पाकर बच्चे ख़ुशी से खिल उठे।

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कलेक्टर श्री मिश्रा ने सभी अधिकारियों को संदेश देते हुए कहा कि इन बच्चों के पास सीमित संसाधन हैं, लेकिन जीवन जीने का असीमित उत्साह है। जब भी आपके पास समय हो तो कृपया कुछ किताबों, खिलौनों, मिठाइयों या केवल अपने बहुमूल्य समय के साथ छात्रावास में जाएँ।

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जीवन सरल लेकिन सुंदर है। हमेशा याद रखें कि जब प्रकृति न्याय करती है तो उनके पास कोई फ़ाइल नहीं होती, होता, कोई वकील नहीं होता, कोई दस्तावेज़ नहीं होता, केवल पूर्ण न्याय होता है। प्राकृतिक न्याय का हिस्सा बनें।

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इसके अलावा एक दिन ऐसे ही समय निकालकर कलेक्टर श्री विकास मिश्रा सुबह-सुबह वृहद कन्या आश्रम आश्रम शाला डिंडोरी का जायजा लेने पहुंच गए। जहां उन्होंने बच्चियों से आश्रम में दी जाने वाली सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। बच्चियों को नियमित रूप से मन लगाकर पढ़ाई लिखाई करने को कहा है।

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हालांकि डिंडोरी कलेक्टर विकास मिश्रा की कार्य प्रणाली और उनकी संवेदनशीलता इसके पहले भी कई बार देखने को मिल चुकी है वह लगातार कोशिश करते हैं कि उनकी पहुंच से कोई भी अछूता न रहे फिर चाहे वह ग्रामीण इलाके के अंतिम छोर में रहने वाली ग्रामीण लकड़ी धोने वाली महिलाएं हो या फिर दिव्यांग बच्चे हो या ऐसा कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति जो शासन और प्रशासन के पास आसानी से नहीं पहुंच पाता वह उनके पास भी जाने का प्रयास करते रहते हैं।

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