संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र में नहीं चलता हाईकोर्ट का निर्देश,बड़े,बड़े वाहनों में ओवरलोड कर राखड़ की हेराफेरी

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उमरिया बिरसिंहपुर,पाली (संवाद)। जिले के बिरसिंहपुर पाली मंगठार मे स्थित संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र में प्लांट से निकलने वाली राखड़ (फ्लाय एश) की हेराफेरी कर सीमेंट कंपनी और प्लांट के अधिकारियों की मिलीभगत से शासन को लाखों रुपए का नुकसान पहुंचाया जा रहा है। प्लांट से निकलने वाली राखड़ को बड़ी-बड़ी गाड़ियों मे निर्धारित मात्रा से कई गुना ज्यादा ओवरलोड करके सीमेंट फैक्ट्री को तक पहुंचाया जाता है। यह ओवरलोड का खेल सीमेंट कंपनी और प्लांट के अधिकारी की मिलीभगत से निरंतर जारी है।

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उमरिया बिरसिंहपुर,पाली (संवाद)। जिले के बिरसिंहपुर पाली मंगठार मे स्थित संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र में प्लांट से निकलने वाली राखड़ (फ्लाय एश) की हेराफेरी कर सीमेंट कंपनी और प्लांट के अधिकारियों की मिलीभगत से शासन को लाखों रुपए का नुकसान पहुंचाया जा रहा है। प्लांट से निकलने वाली राखड़ को बड़ी-बड़ी गाड़ियों मे निर्धारित मात्रा से कई गुना ज्यादा ओवरलोड करके सीमेंट फैक्ट्री को तक पहुंचाया जाता है। यह ओवरलोड का खेल सीमेंट कंपनी और प्लांट के अधिकारी की मिलीभगत से निरंतर जारी है।दरअसल सीमेंट कंपनियों के द्वारा ताप विद्युत ग्रहों से निकलने वाली राखड़ (डस्ट) से सीमेंट बनाने का काम किया जाता है। संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र से भी निकलने वाली डस्ट को सीमेंट कंपनी केजेएस और जेके सीमेंट सहित अन्य फैक्ट्री पहुंचाया जाता है। जिसमें बड़े-बड़े ट्रक, कैप्सूल और ट्रेलर के माध्यम से राखड़ का परिवहन किया जाता है। लेकिन प्लांट के अधिकारी और सीमेंट फैक्ट्री की मिलीभगत से वाहन की छमता और निर्धारित मात्रा से कहीं ज्यादा का ओवरलोड कर परिवहन किया जाता है।जबकि हाईकोर्ट के द्वारा ओवरलोड पर पूरी तरह से रोक लगाई गई है और इसके लिए सख्त निर्देश है। बावजूद इसके अधिकारी अपनी जेब भरने के लालच में लगातार ओवरलोड का खेल निरंतर चल रहा है।इसके अलावा भी स्थानीय पुलिस और यातायात की भी जिम्मेदारी बनती है कि ओवरलोड वाहनों की जांच करें और कार्यवाही करें।लेकिन यहां पर उनके द्वारा कार्यवाही न करना संदेह को जन्म देता है। साथ ही इस ओवरलोड के खेल में उनकी भी सहमति समझ आती है।पर्चियों में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि राखड़ ढोने वाले वाहनों के वजन ले जाने की निर्धारित मात्रा जितनी है उससे कही ज्यादा ओवरलोड कर परिवहन कराया जा रहा है।हालांकि प्लांट के अधिकारियों के द्वारा ट्रको से ओवरलोड की शिकायत पर ओवरलोड करने वाले ट्रको को प्रतिबंधित किया गया था। लेकिन यह कार्यवाही भी महज दिखावा साबित हुई है।
दरअसल सीमेंट कंपनियों के द्वारा ताप विद्युत ग्रहों से निकलने वाली राखड़ (डस्ट) से सीमेंट बनाने का काम किया जाता है। संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र से भी निकलने वाली डस्ट को सीमेंट कंपनी केजेएस और जेके सीमेंट सहित अन्य फैक्ट्री पहुंचाया जाता है। जिसमें बड़े-बड़े ट्रक, कैप्सूल और ट्रेलर के माध्यम से राखड़ का परिवहन किया जाता है। लेकिन प्लांट के अधिकारी और सीमेंट फैक्ट्री की मिलीभगत से वाहन की छमता और निर्धारित मात्रा से कहीं ज्यादा का ओवरलोड कर परिवहन किया जाता है।जबकि हाईकोर्ट के द्वारा ओवरलोड पर पूरी तरह से रोक लगाई गई है और इसके लिए सख्त निर्देश है। बावजूद इसके अधिकारी अपनी जेब भरने के लालच में लगातार ओवरलोड का खेल निरंतर चल रहा है।

इसके अलावा भी स्थानीय पुलिस और यातायात की भी जिम्मेदारी बनती है कि ओवरलोड वाहनों की जांच करें और कार्यवाही करें।लेकिन यहां पर उनके द्वारा कार्यवाही न करना संदेह को जन्म देता है। साथ ही इस ओवरलोड के खेल में उनकी भी सहमति समझ आती है।पर्चियों में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि राखड़ ढोने वाले वाहनों के वजन ले जाने की निर्धारित मात्रा जितनी है उससे कही ज्यादा ओवरलोड कर परिवहन कराया जा रहा है।हालांकि प्लांट के अधिकारियों के द्वारा ट्रको से ओवरलोड की शिकायत पर ओवरलोड करने वाले ट्रको को प्रतिबंधित किया गया था। लेकिन यह कार्यवाही भी महज दिखावा साबित हुई है।
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