उमरिया (संवाद)। जिले में भी कोल माइंस की कई खदानों से कोयला निकालकर उसे जस का तस छोड़ दिया गया है। जिसमें अब मजदूर अपनी जान जोखिम में डालकर बंद खदानों में घुसते हैं और वहां से कीमती लोहा और मशीनों के कलपुर्जे निकालकर कबाड़ कारोबारियों को बेचते हैं। इसके लिए कबाड़ कारोबारी भी मजदूरों को मना करने के बजाय उन्हें खदानों में घुसने के लिए प्रेरित करते हैं।
जिले के नौरोजाबाद और पाली क्षेत्र में ऐसी कई बंद पड़ी कोयला खदान है जिसे अब कबाड़ कारोबारी संचालित करते हैं। कबाड़ कारोबारियों के द्वारा गरीब तब के के लोगों को पैसे का लालच देकर उन्हें बंद खदान के अंदर घुसने और फिर उनसे निकाले गए लोहा और अन्य कबाड़ को खरीद कर कई गुना पैसे कमाते हैं जबकि कई बार गरीब मजदूरों की जान भी चली जाती है। यहां पर मुख्य रूप से कबाड़ कारोबारियों में लल्लू और बबलू की खूब जोड़ी जम रही है। उनके द्वारा बंद खदानों से चोरी छुपे अवैध रूप से सरकारी संपत्ति को चुराकर भारी मुनाफा कमा रहे हैं। हालांकि इसमें वह अकेले नहीं बल्कि स्थानीय पुलिस भी अपना हफ्ता,महीना लेकर अपनी सहमति दे रखी है। यही हाल पाली क्षेत्र का भी है जहां सलीम, फिरोज और अनीश बंद कोयला खदानों के अलावा संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र से चोरी के माल से खूब फलू फल रहे हैं।
