कमिश्नर बनकर लोगों को ठगने वाले धोखेबाज अधिकारी को 3 साल की सजा

Editor in cheif
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उमरिया (संवाद)। आदिवासी बाहुल्य जिले के भोले भाले लोगों को ठगने और उन्हें चुना लगाने के कई मामले सामने आते रहते हैं लेकिन यहां पर एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है जिसमें एक व्यक्ति के द्वारा अपने आप को सीबीआई का अधिकारी बताते हुए लोगों को नौकरी दिलाने के नाम जमकर रुपए ऐंठे है। जब तक लोगों को उसकी असलियत पता चल पाती तब तक वह लोगों से नौकरी के नाम पर पैसे वसूल चुका था। 
बात 2021 की है जब एक धोखेबाज अधिकारी की असलियत सामने आने के बाद एक पीड़िता ने कोतवाली उमरिया में उसके खिलाफ नौकरी लगाने के नाम धोखाधड़ी कर पैसे वसूलने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसके बाद कोतवाली पुलिस ने आरोपी धोखेबाज अनिरुद्ध सिंह परस्ते के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया था। मामले की सुनवाई करते हुए जिला एवं सत्र न्यायालय ने अपने आप को सीबीआई का कमिश्नर बताने और लोगों को झूठी दिलासा देकर ठगने वाले आरोपी अनिरुद्ध सिंह परस्ते को 3 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। 
मामले की जानकारी देते हुए जिला मीडिया प्रभारी (अभियोजन) एडीपीओ नीरज पाण्डेय के द्वारा बताया गया कि फरियादिया लीलावती यादव जिला अस्पताल उमरिया में अस्थाई तौर पर सपोर्ट स्टॉफ नर्स के पद पर कार्यरत थी। जिसकी जान-पहचान अभियुक्त अनिरूद्ध सिंह परस्ते से फरियादिया की ही सहेली शीलू सिंह श्याम द्वारा वर्ष 2020 में करायी गयी थी। अभियुक्त अनिरूद्ध सिंह परस्ते द्वारा फरियादिया को बताया कि वह सीबीआई डिप्टी कमिश्नर के पद पर पदस्थ है, और अभियुक्त द्वारा फरियादिया से झूठा सीबीआई डिप्टी कमिश्नर बनकर नौकरी लगवाने का झांसा दिया गया ।
फरियादिया ने अभियुक्त से कहा कि आप इतने बडे पद पर है मेरे और मेरे भाई की नौकरी लगवा दीजिये तो अभियुक्त ने फरियादिया लीलावती एवं उसके भाई शिवम यादव से नौकरी लगवाने के लिये फरियादिया एवं उसके भाई से लगभग 2,35,000 रूपये षड्यंत्र कर ले लिये । अभियुक्त अनिरूद्ध सिंह द्वारा फरियादिया को फोन पर यह बताया गया कि वह सीबीआई का डिप्टी कमिश्नर है व अभियुक्त द्वारा धोखाधड़ी करते हुये फरियादिया से 2,35,000 रूपये की धोखाधड़ी कर रूपये हड़प लिये जिस पर से पुलिस थाना कोतवाली उमरिया में अभियुक्त के विरूद्ध अपराध क्रमांक 389/2021 पर भा0दं0सं0 की धारा 420 एवं आई.टी. एक्ट की धारा 66डी के अंतर्गत प्रकरण पंजीबद्ध किया गया । सम्पूर्ण विवेचना पश्चात् अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया ।
प्रकरण की विवेचना तत्कालीन टी.आई. सुन्द्रेश सिंह मेरावी द्वारा किया गया था । राज्य की ओर से मामले में सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी नीरज पाण्डेय द्वारा सशक्त पैरवी की गयी एवं आरोपी को कठोर से कठोर दण्ड देने का निवेदन किया गया । प्रकरण में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री आर0 पी0 अहिरवार के न्यायालय द्वारा आरोपी अनिरूद्ध सिंह परस्ते को भा0दं0सं0 की धारा 420 के अंतर्गत 03 वर्ष का कठोर कारावास एवं 10,000 रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया ।
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