मंत्री मीना सिंह और बीजेपी अध्यक्ष दिलीप पाण्डेय के अथक परिश्रम से पाली नगरपालिका में भाजपा का कब्जा,विपक्ष के सारे प्रयास विफल

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उमरिया (संवाद)। जिले की नगर पालिका परिषद पाली में परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव सम्पन्न हो गया है जिसमें भाजपा एक बार पुनः स्थापित हुई है।खासकर पूरे इस चुनाव में जिस तरीके प्रदेश शासन की मंत्री और क्षेत्रीय विधायक दीदी मीना सिंह के साथ भाजपा जिलाध्यक्ष दिलीप पाण्डेय ने पूरी तन्मयता के साथ परिश्रम किया है और आज उसी का नतीजा है कि पाली नगरपालिका में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के साथ पूर्ण बहुमत से भाजपा काबिज हुई हैं। वहीं कांग्रेस के धुरंधरों की रणनीति एक बार फिर असफल साबित हुई है।

फेल साबित हुई कांग्रेस की रणनीति

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उमरिया (संवाद)। जिले की नगर पालिका परिषद पाली में परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव सम्पन्न हो गया है जिसमें भाजपा एक बार पुनः स्थापित हुई है।खासकर पूरे इस चुनाव में जिस तरीके प्रदेश शासन की मंत्री और क्षेत्रीय विधायक दीदी मीना सिंह के साथ भाजपा जिलाध्यक्ष दिलीप पाण्डेय ने पूरी तन्मयता के साथ परिश्रम किया है और आज उसी का नतीजा है कि पाली नगरपालिका में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के साथ पूर्ण बहुमत से भाजपा काबिज हुई हैं। वहीं कांग्रेस के धुरंधरों की रणनीति एक बार फिर असफल साबित हुई है।फेल साबित हुई कांग्रेस की रणनीतिनगरपालिका पाली के चुनाव के दौरान जहां भाजपा एक सोची समझी रणनीति के तहत चुनाव मैदान में अपने कैंडिडेट उतारे वहीं मंत्री दीदी मीना सिंह ने चुनाव अभियान का स्वयं मोर्चा सम्हालते हुए प्रत्येक वार्डों में जाकर उन्होंने आम जनता से पार्टी के लिए वोट मांगे। वही कांग्रेस की रणनीति पूरी तरीके से असफल साबित हुई है। इसके बाद भी पाली की जनता ने उन्हें 5 वार्ड जिताकर दिए। वार्डों के नतीजों के उपरांत जिस तरह कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी के एक पार्षद और एक निर्दलीय को अपने पाले में लिया था इससे एक बार यह लगा कि कांग्रेस में कुछ एनर्जी आई है और परिषद बनाने तक यह बरकरार रहेगी। लेकिन किसे पता था कि परिषद का चुनाव आते आते यह लोग टॉय टॉय फुस्स हो जाएंगे।निर्दलीय और आम आदमी पार्टी कांग्रेस के साथनगरपालिका के वार्डों के चुनाव नतीजों के बाद जो तश्वीर देखने को मिली वह आखरी समय साथ रही है। आम आदमी पार्टी से वार्ड नंबर 3 से विजयी पार्षद किन्नर संध्या रानी और वार्ड नंबर 5 से निर्दलीय के रूप में विजयी पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष श्रीमती ऊषा कोल शुरू से अंत तक कांग्रेस के साथ खड़े दिखाई दिए है। हांलाँकि इस बात की चर्चा शहर में जरूर है कि इन्हें कांग्रेस के एक नेता के द्वारा भारी भरकम राशि से उपकृत किया गया है। यह बात कहां तक सही है यह तो वही जाने इस बात की पुष्टि पंचायती संवाद नही करता है।2003 से लूप लाइन में रही शकुंतला को भाजपा ने दिया मानजिले की राजनीति में 1998 में शकुंतला प्रधान का नाम अचानक से सबके सामने आया था और वह नाम 2003 के बाद गायब होते भी देखा गया था। प्रदेश में सत्तासीन कांग्रेस पार्टी से 1998 के विधानसभा चुनाव में शकुंतला प्रधान को नौरोजाबाद विधानसभा से टिकिट मिली थी और उन्होंने चुनाव भी जीता था। 5 साल गुजरने के बाद 2003 के चुनाव कांग्रेस ने शकुंतला को टिकिट नही दी गई जिससे वह चुनाव नही लड़ सकी। इसके बाद कई दौर आये लेकिन कांग्रेस पार्टी शकुंतला को लूप लाइन में ही रखा। इसके बाद 2013 में एक बार फिर उन्हें टिकिट मिली लेकिन वह किसी कारण वश जीत नही पाई। जिसके बाद धीरे धीरे उनका कांग्रेस पार्टी से मोह भंग होता गया और सन 2018 के चुनाव से पहले वह भाजपा नेत्री मीना सिंह के संपर्क में आकर भाजपा में शामिल हो गई। जिसके बाद वह लगातार भाजपा पार्टी के साथ मिलकर पार्टी की गतिविधियों में काम किया है। इसके बाद पार्टी ने अब उसका मान रखते हुए मंत्री मीना सिंह के द्वारा अपने विधानसभा अंतर्गत नगरपालिका पाली का अध्यक्ष बनाकर उन्हें नगर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है।
नगरपालिका पाली के चुनाव के दौरान जहां भाजपा एक सोची समझी रणनीति के तहत चुनाव मैदान में अपने कैंडिडेट उतारे वहीं मंत्री दीदी मीना सिंह ने चुनाव अभियान का स्वयं मोर्चा सम्हालते हुए प्रत्येक वार्डों में जाकर उन्होंने आम जनता से पार्टी के लिए वोट मांगे। वही कांग्रेस की रणनीति पूरी तरीके से असफल साबित हुई है। इसके बाद भी पाली की जनता ने उन्हें 5 वार्ड जिताकर दिए। वार्डों के नतीजों के उपरांत जिस तरह कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी के एक पार्षद और एक निर्दलीय को अपने पाले में लिया था इससे एक बार यह लगा कि कांग्रेस में कुछ एनर्जी आई है और परिषद बनाने तक यह बरकरार रहेगी। लेकिन किसे पता था कि परिषद का चुनाव आते आते यह लोग टॉय टॉय फुस्स हो जाएंगे।

निर्दलीय और आम आदमी पार्टी कांग्रेस के साथ

नगरपालिका के वार्डों के चुनाव नतीजों के बाद जो तश्वीर देखने को मिली वह आखरी समय साथ रही है। आम आदमी पार्टी से वार्ड नंबर 3 से विजयी पार्षद किन्नर संध्या रानी और वार्ड नंबर 5 से निर्दलीय के रूप में विजयी पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष श्रीमती ऊषा कोल शुरू से अंत तक कांग्रेस के साथ खड़े दिखाई दिए है। हांलाँकि इस बात की चर्चा शहर में जरूर है कि इन्हें कांग्रेस के एक नेता के द्वारा भारी भरकम राशि से उपकृत किया गया है। यह बात कहां तक सही है यह तो वही जाने इस बात की पुष्टि पंचायती संवाद नही करता है।

2003 से लूप लाइन में रही शकुंतला को भाजपा ने दिया मान

जिले की राजनीति में 1998 में शकुंतला प्रधान का नाम अचानक से सबके सामने आया था और वह नाम 2003 के बाद गायब होते भी देखा गया था। प्रदेश में सत्तासीन कांग्रेस पार्टी से 1998 के विधानसभा चुनाव में शकुंतला प्रधान को नौरोजाबाद विधानसभा से टिकिट मिली थी और उन्होंने चुनाव भी जीता था। 5 साल गुजरने के बाद 2003 के चुनाव कांग्रेस ने शकुंतला को टिकिट नही दी गई जिससे वह चुनाव नही लड़ सकी। इसके बाद कई दौर आये लेकिन कांग्रेस पार्टी शकुंतला को लूप लाइन में ही रखा। इसके बाद 2013 में एक बार फिर उन्हें टिकिट मिली लेकिन वह किसी कारण वश जीत नही पाई। जिसके बाद धीरे धीरे उनका कांग्रेस पार्टी से मोह भंग होता गया और सन 2018 के चुनाव से पहले वह भाजपा नेत्री मीना सिंह के संपर्क में आकर भाजपा में शामिल हो गई। जिसके बाद वह लगातार भाजपा पार्टी के साथ मिलकर पार्टी की गतिविधियों में काम किया है। इसके बाद पार्टी ने अब उसका मान रखते हुए मंत्री मीना सिंह के द्वारा अपने विधानसभा अंतर्गत नगरपालिका पाली का अध्यक्ष बनाकर उन्हें नगर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है।

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