लंपी वायरस के लिए विभाग तैयार नही,कर्मचारियों का टोटा,सीईओ बने पशु डाक्टर

Editor in cheif
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उमरिया (संवाद)। देश के अलग अलग प्रदेशों में मूक मवेशियों में फैल रही बीमारी सरकार सहित आम जन को भी परेशानी में डाल दी है, एक ओर सरकारें लगातार टीकाकरण करा रहा है। वहीं उमरिया जिले में पशु चिकित्सा विभाग कुंभकरण की निद्रा में लीन है, जिले में जहां स्वास्थ्य केन्द्र तो बने हैं मगर उनमें कर्मचारियों का टोटा बना हुआ है। या यूं कहें कि पशु चिकित्सक अपना दायित्व छोड़कर सीईओ का काम देख रहे हैं, जिसके कारण जिले भर का काम प्रभावित हो रहा है और यहां लंपी वायरस अपने रौद्र रुप को दिखाने आतुर है।
लंपी वायरस को लेकर जिस प्रकार से लापरवाही बरती जा रही है, उसका नतीजा भयावह हो सकता है। पशु चिकित्सा विभाग के उदासीन रवैया से ऐसा मालूम होता है कि बड़ी बेसब्री से पशुओं में बीमारी का इंतजार किया जा रहा है, जबकि सरकार ने पहले से ही टीकाकरण का कार्य करने निर्देशित किया है, बाबजूद इसके हवा हवाई आंकड़ो के साथ विभाग आगे बढ़ रहा है।जबकि विभाग के जिम्मेदार अलग ही राग अलापने में लग हुए है।
जहां पशु चिकित्सा विभाग तो है मगर पशुओं की दावाई के नाम पर केवल खानापूर्ति ही की जा रही है, जबकि देश के अलग अलग प्रदेशों सहित मध्यप्रदेश में लंपी वायरस नामक बीमारी अपने पैर बड़ी तेजी के साथ पसार रही है। जिले भर में जहां 16 औषधालय और 20 उप केन्द्र संचालित हैं लेकिन मैदानी कर्मचारियों का टोटा कहीं न कहीं लंपी बीमारी को नौता देने जैसा है। जबकि कई उप पशु केन्द्र के डाक्टर सीईओ बनकर पैसा कमाने के फेर में पशुओं तरफ झांकते तक नही है। वहीं इन कमियों को कैसे छुपाते हैं इसकी बानगी है विभाग के उप संचालक जिन्होंने बड़ी सहजता के साथ यह कह दिया कि हम अलर्ट मोड पर हैं।
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