उमरिया (संवाद)। जिला मुख्यालय में आज 11 सितंबर को जिले भर के सैकड़ो की तादात में आदिवासी समाज एकत्रित होकर शहर के विभिन्न मार्गों से रैली निकालकर कलेक्टर हटाओ उमरिया बचाओ का नारा बुलंद करते हुए अपने इष्ट महारानी दुर्गावती के चौक पहुंचकर जिले में आदिवासियों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव को जमकर कोसा और सरकार से इसे तत्काल हटाने की मांग की है। हालांकि आदिवासियों के इस आंदोलन को रणनीति के तहत कुचलने की कोशिश की गई। कांग्रेस ने भी मौका पाकर इसे राजनीतिक रंग भी देने का प्रयास किया है।
दरअसल बीते कुछ समय से आदिवासियों के अलग अलग मामलों में आदिवासियों का शोषण और उन्हें तमाम प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। इसके अलावा हाल ही में सम्पन्न हुए जिला पंचायत के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव के दरमियान कलेक्टर के ऊपर अध्यक्ष के चुनाव में टॉस प्रक्रिया के दौरान पर्ची बदलने का आरोप है। जिसके बाद अध्यक्ष की उम्मीदवार रही सावित्री सिंह के द्वारा इसका विरोध किया गया और कलेक्टर पर पर्ची बदलने सहित उनका हाथ पकड़कर खींचना और बेइज्जत करने का आरोप लगाया गया था।

चूंकि सावित्री सिंह आदिवासी होने के साथ साथ कांग्रेस की भी पदाधिकारी है।लेकिन चुनाव के दौरान सावित्री के साथ हुए अन्याय के समय कांग्रेस ने उनका साथ नही दिया इसलिये उन्हें समाज का सहारा लेना पड़ा। समाज के जिम्मेदारों ने भी आदिवासी समाज की महिला के साथ कलेक्टर द्वारा की गई ज्यादती के खिलाफ लड़ाई लड़ने का मन बनाया और 22 अगस्त को जिला मुख्यालय में विरोध प्रदर्शन का एलान किया गया लेकिन उस समय जिले में भारी बारिश का दौर रहा है। इसलिए समाज ने उसे स्थगित कर दिया था। जिसके बाद समाज ने 11 सितंबर को एक बार फिर कलेक्टर और शासन के खिलाफ हल्ला बोलने तैयारी की गई।
11 सितंबर को जिले भर से सैकड़ो की तादात में आदिवासी वर्ग शहर के बस स्टैंड में इकट्ठा हुए और रैली के रूप में कलेक्टर के खिलाफ कलेक्टर हटाओ उमरिया बचाओ का नारा बुलंद करते हुए नगर के मुख्य मार्ग होकर गांधी चौक से होकर अपने इष्ट महारानी दुर्गावती चौक पहुंचे जहां उनके भाषणबाजी का कार्यक्रम भी रखा गया था। जानकारी के मुताबिक इस बीच उनके इस आंदोलन को कुचलने का भी प्रयास किया गया। लेकिन सफल नही हो पाया। लेकिन आदिवासी समाज के इस आंदोलन को कांग्रेसीकरण करने से कोई नही रोक पाया और इस पूरे आयोजन का कांग्रेसीकरण हो ही गया।हालांकि इससे आदिवासी समाज नाराज भी हुआ और वह धीरे धीरे इस कार्यक्रम से कन्नी काटते भी नजर आए।
हालांकि यह कोई इत्तेफाक नही है। चूंकि सावित्री सिंह स्वयं भी एक कॉडर कांग्रेसी है।इसके अलावा इस पूरे कार्यक्रम की अगुआई कर रहे बाला सिंह टेकाम भी इसी हफ्ते में कांग्रेस पार्टी ज्वाइन किया है।इस लिहाज से यह कार्यक्रम भी कांग्रेस का ही माना जायेगा। सिर्फ लोंगो के समझने में फेर हुआ है।