बांधवगढ़ में सलीम और अनारकली का प्रेम चढ़ा परवान, दोनो के बीच LOVE केमेस्ट्री की चर्चा जोरों पर

Editor in cheif
4 Min Read
उमरिया (संवाद) मशहूर फ़िल्म मुगले आजम में आपने सलीम और अनारकली के प्रेम को देखा होगा इसके अलावा कईं कहानियों में भी सलीम और अनारकली के प्रेम को अलग अलग तरीके से बताया गया है। एक उसी से मिलती जुलती कहानी आपको बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में भी सुनने और देखने को मिल रही है। बशर्ते यहां अनारकली इंसान न होकर एक जानवर हथनी का नाम है। जिसे देखकर सलीम (हाथी) उसके प्यार में दीवाना है और इन दिनों बांधवगढ़ में सलीम और अनारकाली का प्रेम परवान चढ़ा है।
दरअसल इन दिनों बांधवगढ़ टाईगर रिजर्व में हाथी महोत्सव कार्यक्रम किया जा रहा हैं। जिसमे प्रबंधन के द्वारा पालतू हाथियो की जमकर खुशामद की जा रही है। उनके पसंदीदा पकवान खिलाये जा रहे है।उन्हें नहला धुलाकर अरंडी के तेल से मालिश की जाती है जिसके बाद उन्हें एक साथ टीका- चंदन लगाकर तैयार किया जाता है।एक सप्ताह तक चलने वाला इस आयोजन  में प्रतिदिन ऐसा ही किया जाता है ।इसी बीच जब बांधवगढ़ प्रबंधन के अधिकारी कर्मचारी सुबह शाम उनकी सेवा में लगे है। इसी दौरान उनकी नजर बांधवगढ़ की मशहूर हथनी अनारकली पर पड़ी और उसका बॉय फ्रेंड एक जंगली हाथी कैम्प में घुसकर अपने प्यार का इजहार कर दिया और चोरी छिपे कैम्प में घुसकर अनारकली नामक हथनी को भगा ले जाने का प्रयास किया है। इसके दूसरी बार भी जंगली हाथी सलीम ने कैम्प में घुसकर अनारकली के पास पहुंच गया और अनारकली को धकियाते हुए जंगल की ओर अपने साथ ले गया। इससे साफ जाहिर होता है कि इन दोनों के बीच LOVE की CEMESTRY स्पष्ट समझ आती है। वहीं जानकारी के बाद प्रबंधन के अमले के द्वारा अनारकली की जंगल मे खोजबीन की गई और कड़ी मशक्कत के बाद अनारकली जंगल मे अपने बॉय फ्रेंड हाथी सलीम के साथ मिली है। जिसे अमला पुनः हाथी कैम्प में लाकर छोड़ा है।
पार्क प्रबंधन और वन्य प्राणी विशेषज्ञों की माने तो उनका कहना है यह सामान्य और स्वाभाविक प्रक्रिया है कई बार देखने को मिलता है कि इंसान की तरह जानवर भी एक दूसरे से प्रेम करते है। इंसान जैसे अपनी फैमिली और बच्चो को प्यार करते है उसी तरह जानवर भी होते है। कईं बार जानवर अपने समूह से अलग हो जाते है और फिर वही दूसरे समूह की मादा की तरफ आकर्षित होते है और वे उसे ले जाने का प्रयास करते है । बांधवगढ़ में भी बीते दिनों कुछ इसी प्रकार की कहानी देखने को मिली है।
बता दे कि इसके पहले बांधवगढ़ टाईगर रिजर्व में पालतू हांथीयों के अलावा दूसरे हाथी नही थे। लेकिन 2018 में छत्तीसगढ़ से होते हुए उड़ीसा राज्य के जंगली हाथियो का एक दल बाँधवगढ़ पहुंचा था तब इनकी संख्या 15 से 20 रही है।जिसके बाद तब से लगातार जंगली हाथियों का दल यहां पहुचते रहता है। इस समय बांधवगढ़ में जंगली हाथियों की संख्या 60 से पार हो गई है। यह जंगली हाथी अलग अलग गुटों में बांधवगढ़ के जंगल में विचरण कर रहे है। जानकर बताते है कि हाथियो में सुनने और सूंघने की शक्ति बड़ी तीव्र होती है और यही कारण है कि जंगली हाथियों का पहला दल भटककर उड़ीसा से छत्तीसगढ़ के रास्ते बाँधवगढ़ पहुंचा था और यही डेरा जमा लिया। जिसके बाद लगातार एक के बाद एक जंगली हाँथियो का दल बाँधवगढ़ पहुंच रहा है।
 #wildlife
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *