MP: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के किरनापुर थाने में चोरी के संदेह में एक महिला के साथ कथित मारपीट का मामला अब आपराधिक कार्रवाई तक पहुंच गया है। विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद निलंबित चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। इस कार्रवाई को पुलिस विभाग की जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पुलिस कर्मियों ने चोरी के शक में महिला को जबरन जुर्म कबूल करने मारपीट की गई थी। मामले में पुलिस अधीक्षक अधीक्षक ने एसआई दमेन्द्र तुनकर, प्रधान आरक्षक आशीष बघेल, आरक्षक कपिल बघेल और महिला आरक्षक मेघा टेकाम को सस्पेंड कर दिया गया था, SIT की जांच रिपोर्ट आने के बाद इन चारों सस्पेंड पुलिस कर्मियों पर एफआईआर दर्ज की गई है।
शिकायत मिलते ही एसपी ने दिखाई सख्ती
घटना की शिकायत सामने आने के बाद पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए 7 सितंबर को संबंधित चारों पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। साथ ही निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए डीएसपी (महिला सुरक्षा शाखा) प्रतिष्ठा राठौड़ के नेतृत्व में विशेष जांच दल का गठन किया गया।
दो सप्ताह की जांच में सामने आए तथ्य
एसपी ने एसआईटी को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। जांच के दौरान पीड़िता के बयान, पुलिसकर्मियों से पूछताछ तथा अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया गया। रिपोर्ट में आरोप सही पाए जाने पर चारों पुलिसकर्मियों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की कार्रवाई की गई।
कानून से ऊपर कोई नहीं
मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद अब आगे की वैधानिक जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। पुलिस विभाग ने स्पष्ट किया है कि ड्यूटी के दौरान किसी भी व्यक्ति के साथ दुर्व्यवहार, प्रताड़ना या अधिकारों के दुरुपयोग को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
MP: थाने में गर्भवती महिला और पति से मारपीट के आरोप, टीआई सहित 4 पुलिसकर्मी निलंबित
बता दें कि पुलिस के द्वारा गर्भवती महिला को चोरी की शक में पुलिस थाना लाया गया जहां उसे जबरन जुर्म कबूल करने के लिए मारपीट की गई। यह मामला इतना तूल पकड़ा की सैकड़ो की तादात में ग्रामीण पुलिस थाने को घेर लिया पुलिस ने बचाव में आंसू गैस और लाठी चार्ज भी किया था मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने प्रथम दृष्टि चार पुलिस कर्मियों को सस्पेंड कर दिया और जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था। टीम की रिपोर्ट आने के बाद निलंबित चारों पुलिसकर्मियों पर विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है।
पुलिस कार्रवाई के विरोध में हजारों लोगों का प्रदर्शन, लाठीचार्ज और आंसू गैस