उमरिया। बांधवगढ़ में 23 अगस्त को WWF-India के Central India Landscape द्वारा आयोजित की जा रही मीडिया कार्यशाला को लेकर मीडिया जगत में आमंत्रण और चयन के आधार को लेकर सवाल उठने लगे हैं। MPT White Tiger Forest Lodge में आयोजित होने वाली इस कार्यशाला में बांधवगढ़ के परिदृश्य, वन्यजीव संरक्षण, क्षेत्रीय मुद्दों तथा हालिया घटनाक्रमों पर चर्चा और विचारों के आदान-प्रदान की जानकारी दी जानी थी। लेकिन संस्था के द्वारा कराई गई मीडिया कार्यशाला महज दिखावा साबित हो रही है। इसके पीछे की असली वजह संस्था के द्वारा लाखों के अनुदान और सामग्रियों का बंदरबांट करना प्रतीत हो रहा है.?
आयोजकों द्वारा जारी आमंत्रण में मीडिया से जुड़े पेशेवरों को कार्यशाला में आमंत्रित किए जाने की बात कही गई है। ऐसे में सवाल यह है कि स्थानीय स्तर पर लंबे समय से वन्यजीव और बांधवगढ़ से जुड़े विषयों पर निरंतर रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों के चयन के लिए क्या कोई निर्धारित मापदंड तय किया गया है? बांधवगढ़ जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण वन्यजीव क्षेत्र में मीडिया की भूमिका केवल समाचार संकलन तक सीमित नहीं है। स्थानीय पत्रकार वर्षों से क्षेत्र की समस्याओं, वन्यजीव संरक्षण, मानव-वन्यजीव संघर्ष और प्रशासनिक गतिविधियों को सामने लाते रहे हैं। ऐसे में कार्यशाला में सहभागिता के लिए पत्रकारों का चयन किस आधार पर किया गया,यह स्पष्ट किया जाना प्रासंगिक होगा।
विशेष रूप से यह भी जानना जरूरी है कि क्या कार्यशाला के लिए स्थानीय मीडिया संस्थानों और लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय वरिष्ठ पत्रकारों को आमंत्रित करने के लिए कोई सूची या मानदंड निर्धारित किया गया था। यदि ऐसा कोई मानदंड है तो उसे सार्वजनिक किए जाने से चयन प्रक्रिया को लेकर उठने वाले सवालों का समाधान हो सकता है।
यह सवाल किसी व्यक्ति विशेष के आमंत्रण या अनामंत्रण का नहीं, बल्कि मीडिया से जुड़ी ऐसी कार्यशाला में प्रतिनिधित्व और चयन की पारदर्शिता का है। यदि उद्देश्य बांधवगढ़ से जुड़े विषयों पर मीडिया और संरक्षण क्षेत्र के बीच संवाद स्थापित करना है, तो यह संवाद क्षेत्र में नियमित रूप से काम कर रहे स्थानीय पत्रकारों की भागीदारी से और अधिक व्यापक हो सकता है।
अब देखना यह है कि आयोजक इस कार्यशाला के लिए मीडिया प्रतिनिधियों के चयन का आधार और प्रक्रिया सार्वजनिक करते हैं या नहीं। या फिर यह मीडिया कार्यशाला महज दिखावे के लिए की गई,असली वजह संस्था के द्वारा बांधवगढ़ को दिए जाने वाले लाखों के अनुदान या अन्य सामग्रियों की बंदरबांट करना तो नहीं था.?