उमरिया (संवाद)। जिला मुख्यालय की नगरपालिका परिषद उमरिया में जब से पार्षदो के चुनाव सम्पन्न हुए है और नतीजे आये है तब से लगातार पूरे शहर में इस बात की चर्चा आम है कि 10 से 20 लाख रुपये में पार्षद खरीदे जा रहे है। इस बात में कितनी सच्चाई है या यह अफवाह है? यह तो कल 10 अगस्त को पता चल सकेगा।
जानकारी के मुताबिक उमरिया नगरपालिका चुनाव में जो नतीजे सामने आए थे उनमें निर्धारित 24 वार्डो में से 14 पार्षद कांग्रेस पार्टी से विजयी हुए थे। वहीं 9 पार्षद भाजपा और 1 निर्दलीय के रूप में विजयी हुए थे। जिसमें कांग्रेस पार्टी नगर सरकार बनाने में पूर्ण बहुमत में रही है। इसी बीच पूरे शहर में 10 से 20 लाख रुपये में पार्षद खरीदने की चर्चा आम हो गई। जिसके बाद राजनीतिक दलों के लोगों के द्वारा अपने-अपने पार्टी के विजयी पार्षदों को चुपचाप तरीके से शहर से अन्यत्र गोपनीय जगह शिफ्ट कर दिया गया। चूंकि नगर सरकार बनाने में कांग्रेस बहुमत में रही है नगरपालिका के निर्धारित 24 वार्डों में कांग्रेस ने 14 वार्ड जीते वहीं भाजपा महज 9 सीटें जीत पाई थी इसके अलावा 1 सीट में भाजपा के बागी निर्दलीय सुजीत भदौरिया की पत्नी पूर्णिमा सिंह ने जीत हासिल की थी। जिसके बाद जैसे ही पार्षदों को 10 और 20 लाख में खरीदने की बात शहर में आम हुई सबसे पहले कांग्रेस अपने संदिग्ध पार्षदों को गायब कर दी वहीं भाजपा के द्वारा भी कुछ दिनों बाद अपने कुछ पार्षदो को अन्यत्र शिफ्ट कर दिया गया।
यहां पर सबसे बड़ा सवाल यह कि बीते 23 दिनों से पूरे शहर में जिस बात की चर्चा प्रमुख रही है जिसमें लगातार यह कहा जा रहा था कि भाजपा के द्वारा कांग्रेसी पार्षदो को 10 और 20 लाख रुपये देकर अपने पाले में लेने के फिराक में है। शहर में फैली इस बात की चर्चा में कितनी सच्चाई है या यह महज अफवाह थी इस बात का खुलासा कल 10 अगस्त को होने वाले नगरपालिका में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव के बाद पता चल जाएगा। कांग्रेसी पार्षद अगर भाजपा के पाले में आये होंगे तो चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग देखने को मिलेगी और अगर यह महज अफवाह रही होगी तो नतीजा सभी जानते है। बहरहाल एक रात और कुछ घंटों का फासला बाकी है जिसके बाद तश्वीर आप सभी के सामने होगी।