Tiger Attack: बाघों के हमले से गांव के ग्रामीणों का जीना हुआ दूभर,एक ही दिन में तीन घटनाओं से दहला ग्रामीण क्षेत्र,एक की मौत तो एक हुआ घायल,इधर गांव में घुसा एक और बाघ

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उमरिया (संवाद)। बाघों की बादशाहत के लिए विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ती संख्या टाइगर रिजर्व से लगे नजदीक के दर्जन भर गांव के ग्रामीणों का जीना मुश्किल हो गया है। टाइगर रिजर्व के बाघों का रुख गांव की ओर होने से ग्रामीण दहशत में रहते हैं वहीं आज शनिवार को बाघ के हमले से एक चरवाहे की मौत हो गई तो एक दूसरे बाघ ने एक व्यक्ति के ऊपर हमला कर घायल कर दिया है। किसी कदर घायल व्यक्ति ने बाग से अपनी जान बचा सका है। इधर एक तीसरा बाघ करौंदिया गांव के नजदीक घुस गया,जिससे पूरे गांव में दहशत फैली हुई है।

Tiger Attack: बाघों के हमले से गांव के ग्रामीणों का जीना हुआ दूभर,एक ही दिन में तीन घटनाओं से दहला ग्रामीण क्षेत्र,एक की मौत तो एक हुआ घायल,इधर गांव में घुसा एक और बाघ

दरअसल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बढ़ती बाघों की संख्या से जंगल का क्षेत्रफल घटता जा रहा है और शायद यही वजह है कि जंगल की कमी के कारण बाघ गांव की ओर और खेतों की ओर रुख कर रहे हैं। जिससे गांव में रहने वाले ग्रामीण बाघ के शिकार बन जाते हैं। ऐसे ही तीन घटना आज बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के ग्रामीण क्षेत्र के अलग-अलग हिस्से से आई है। पहली घटना बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की मानपुर बफर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम गुरुवाही से है जहां राजस्व क्षेत्र में बकरी चराने गए एक चरवाहे घिन्नू पिता रामस्वरूप सिंह उम्र 35 वर्ष के ऊपर बाघ ने हमला कर दिया जिससे उसकी घटना स्थल पर ही मौत हो गई।

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बताया गया कि रोजाना की तरह घिन्नु सिंह बकरी चराने गया था जहां राजस्व क्षेत्र डोंगरिया के नजदीक झाड़ियां में छिपे बाघ ने चरवाहे पर हमला कर दिया जिससे उसकी मौत घटनास्थल पर हो गई घटना की जानकारी के बाद मौके पर पहुंचे वन हमले ने चरवाहे का शव कब्जे में लेकर आगे की कार्यवाही की है। घटना के बाद से गुरुवाही गांव सहित आसपास के गांव में बाघ की दहशत बनी हुई है।

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दूसरी घटना उमरिया वन परिक्षेत्र के पठारी बीट से सटे गांव उजान से आई है। जहां ग्राम उजान के निवासी प्रभु बैगा उम्र 36 वर्ष अपने निस्तार के लिए लकड़ी लेने अपने भाई के साथ जंगल की ओर गया था। जहां जंगल से वह लकड़ी लेकर लौटते समय प्रभु बैगा के ऊपर झाड़ियां में छिपे एक टाइगर ने हमला कर घायल कर दिया। लेकिन यहां प्रभु की सूझबूझ के कारण उसकी जान बच गई। उसने बताया कि जब उसके ऊपर टाइगर ने हमला किया तब वह दूर जाकर गिर गया था। लेकिन इस बीच वह किसी भी प्रकार की कोई हरकत नहीं की बल्कि चुपचाप पड़ा रहा। इस दौरान बाघ उसके पास आया और देखा की कोई हरकत नहीं हो रही है, तब बाघ अपने आप जंगल की ओर भाग गया।

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तीसरी घटना बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व पनपथा बफर जोन के करौंदिया गांव से आई है। जहां गांव के नजदीक खेत में रखे भूसे की ढेर में बैठकर एक बाघ आराम फरमाते दिखाई दिए। बाघ को जैसे ही लोगों ने देखा पूरे गांव में यह खबर आग की  तरह फैल गई। ग्रामीणों में दहशत का माहौल था लोग अपने घरों में डरे सहमे में बैठे रहे। तब जाकर ग्रामीणों ने इसकी जानकारी वन विभाग को दी है।वन विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर हाथियों की मदद से बाघ को जंगल की ओर ले जाने के प्रयास में जुटी है।

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