MP Election: बांधवगढ़ में त्रिकोणीय मुकाबला होने के आसार,कुल 9 प्रत्यासी चुनावी मैदान में ठोंकेंगे ताल,यहां जानिए किसे कौन कर रहा कमजोर.?

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Umaria (संवाद)। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौर में जहां आज 2 नवंबर को नाम निर्देशन पत्र वापसी और उसके बाद चुनाव चिन्ह का आवंटन किया जाना था। इसके लिए निर्धारित तिथि के अनुसार उमरिया जिले की बांधवगढ़ विधानसभा सीट से कुल 9 उम्मीदवार चुनावी मैदान में ताल ठोकेंगे। निर्वाचन आयोग के निर्देश के अनुसार रिटर्निंग ऑफिसर के द्वारा सभी उम्मीदवारों को चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिया गया है।

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दरअसल मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए उमरिया जिले की बांधवगढ़ विधानसभा सीट से प्रमुख राजनीतिक दलों सहित नव अभ्यर्थियों के द्वारा नाम निर्देशन पत्र दाखिल किया गया था जिसमें 2 नवंबर को नामांकन पत्र के वासी के दिन भी एक भी नामांकन वापस नहीं लिया गया इस तरह बांधवगढ़ विधानसभा में कल 9 प्रत्याशी चुनावी मैदान में ताल ठोकेंगे। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह की इस बार का विधानसभा चुनाव बड़ा ही दिलचस्प होने वाला है।

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परिसीमन के बाद सन 2008 बांधवगढ़ विधानसभा से लगातार बीजेपी पार्टी के प्रत्याशी ही चुनाव जीतते आए हैं। जिसमें 2008 और 2013 में बीजेपी के वरिष्ठ नेता दाऊ ज्ञान सिंह ने चुनाव जीता। इसके बाद ज्ञान सिंह शहडोल संसदीय क्षेत्र से संसद का चुनाव लड़कर संसद बन गए। इस दौरान बांधवगढ़ विधानसभा की खाली हुई सीट से ज्ञान सिंह की बेटे शिवनारायण सिंह को 2016 में बीजेपी उम्मीदवार घोषित कर चुनाव लड़ाया गया जिसमें उन्हें जीत हासिल हुई। इसके बाद शिवनारायण सिंह ने 2018 के विधानसभा के आम चुनाव का भी चुनाव जीता।

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इस बार के विधानसभा चुनाव 2023 में भी भारतीय जनता पार्टी ने मौजूदा विधायक शिवनारायण सिंह को पार्टी का अधिकृत उम्मीदवार बनाया है। लेकिन इस बार का चुनाव बांधवगढ़ विधानसभा सीट का बड़ा ही दिलचस्प होने वाला है कारण यह की बीते 18 सालों से मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है और इतना लंबा कार्यकाल होने के बाद पूरे प्रदेश में जनता के बीच सरकार के प्रति अच्छी खासी एंटी इनकंबेंसी जान पड़ती है। वही तमाम संस्थाओं के द्वारा कराए गए सर्वे की रिपोर्ट भी भाजपा के खिलाफ और कांग्रेस के पक्ष में बताई जा रही है।

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हालांकि बांधवगढ़ विधानसभा में इसका असर कुछ कम देखने को मिल रहा है कारण यह की विधायक शिवनारायण के पिता दाऊ ज्ञान सिंह का यह क्षेत्र गढ़ माना जाता है। उनके बारे में कहा जाता है कि वह तबीयत से किसी के पक्ष का चुनाव प्रचार कर दें या उस कैंडिडेट के लिए वोट मांगे तो वह सफल साबित हो सकते हैं। वहीं कांग्रेस पार्टी के कैंडिडेट श्रीमती सावित्री सिंह भी किसी से कमतर नहीं है। इस बार के चुनाव में शुरुआत से ही उन्हें भारी जन समर्थन मिलते दिखाई दे रहा है, जिसे देखकर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस बार के नतीजे चौंकाने वाले साबित हो सकते हैं।

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हालांकि यह जरूर है कि कांग्रेस पार्टी से टिकट के दावेदार रहे कई प्रत्याशी खुलेआम तो कई अंदरुनी रूप से पार्टी से बगावत पर उतर आए हैं। टिकट के दावेदार के दौड़ में शामिल रहे बाला सिंह टेकाम की बात करें तो वह बीते 1 साल से बांधवगढ़ विधानसभा क्षेत्र में लोगों के लिए काम कर रहे हैं। लेकिन पार्टी से उन्हें टिकट नहीं मिलने के कारण वह गोंडवाना गणतंत्र पार्टी में शामिल हो गए जहां से वह अब बांधवगढ़ विधानसभा के गोंडवाना पार्टी के उम्मीदवार बनाये गए हैं। बताते चलें कि गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के साथ बहुजन समाज पार्टी का गठबंधन है, जिसके कारण यहां पर बाला सिंह टेकाम की स्थिति मजबूत बताई जा रही है।

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इसी तरह दूसरा नाम सतीलाल बैगा का नाम सामने आता है। सती लाल भी कांग्रेस की टिकट के दौड़ में रहे हैं लेकिन उन्हें भी टिकट नहीं मिलने से वह कांग्रेस छोड़कर भाजपा में चले गए। इसके अलावा अन्य कई ऐसे कांग्रेस नेता है जो टिकट की चाहत रख रहे थे लेकिन पार्टी के द्वारा उन्हें टिकट नहीं दिए जाने से वह नाराज होकर अंदरुनी रूप से कांग्रेस पार्टी से बगावत और कैंडिडेट की खिलाफत कर रहे हैं। कुल मिलाकर देखा जाए तो कांग्रेस पार्टी के लिए पूरे प्रदेश सहित बांधवगढ़ विधानसभा में भी बने माहौल को यह बागी नेता कमजोर करने में लगे हुए हैं।

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हालांकि बीजेपी में कैंडिडेट की घोषणा होने के बाद बगावत तो नहीं देखी जा रही है, लेकिन इतना जरूर है कि बीजेपी कैंडिडेट से असंतोष रखने वाले पार्टी नेताओं को भाजपा संगठन ने मनाना और उनकी नाराजगी दूर करना शुरू कर दिए हैं। जिसमें बीजेपी कुछ हद तक सफल होते भी दिखाई दे रही है। बहरहाल बांधवगढ़ विधानसभा क्षेत्र में चुनावी समीकरण जिस तरीके के भी बन रहे हो, स्थितियां किसी के प्रति अनुकूल या प्रतिकूल हो, लेकिन इन सब के बीच जो समीकरण समझ में आता है, वह यह की इस बार के चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला होने की संभावना साफ दिखाई देती है।

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