उमरिया/नई दिल्ली (संवाद)। जिले भर में 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के ठीक 1 दिन पहले यानी 25 जनवरी को खुशी का ठिकाना नहीं रहा । कारण है कि जिले की अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त आदिवासी चित्रकार जोधईया बाई बैगा का नाम पद्मश्री सम्मान के लिए चयनित हो गया है। जैसे ही उनके नाम के चयन की यह खबर जिले को मिली है पूरे जिले में खुशी की लहर दौड़ गई निश्चित रूप से जोधईया बाई का राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मान पूरे जिले ही नहीं प्रदेश भर में एक गौरव है।

(फोटो फाइल)
बता दें कि जिले के लोढ़ा गांव कीआदिवासी चित्रकार जोधईया बाई बैगा 80 साल की उम्र पार कर चुकी हैं।इसके अलावा खास बात यह है कि वह अपने उम्र के अंतिम पड़ाव जब लोग सारी उम्मीदें छोड़ चुके होते हैं तब वह 60 साल की उम्र में उन्होंने बनी मजदूरी छोड़कर अपने हाथों में ब्रश और स्याही थाम लिया था, और कागज पर तस्वीरें उकेरना प्रारंभ किया था। लेकिन यहां पर उन्हें उनके गुरु कला निकेतन से फाइन आर्ट में स्नातक आशीष स्वामी का साथ मिला। गुरु आशीष स्वामी के द्वारा जोधईया बाई की लगन और मेहनत को देखते हुए उन्होंने उसे बैगा और ट्राईबल आर्ट से संबंधित चित्र बनाने की शिक्षा-दीक्षा दी गई और देखते ही देखते चंद सालों में जोधईया बाई ने अपना नाम अंतरराष्ट्रीय पटल पर पहुंचा दिया।चूंकि अब आशीष स्वामी इस दुनिया मे नही रहे, लेकिन उनका प्रयास और आज जोधइया बाई के माध्यम से जिले को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया है। निश्चित रूप उमरिया जिला उन्हें हमेशा याद करता रहेगा। हालांकि उनका भतीजा निमिष स्वामी उनके काम और उनके सपने को आगे बढ़ा रहे है। उनके द्वारा जोधइया बाई सहित अन्य चित्रकारों का मनोबल बढ़ाते हुए उनकी हर जरूरतों को पूरा कर रहे है।
