बस स्टैंड में बार बालाओं के अश्लील डांस पर बवाल,पुलिस ने भांजी लाठियां

Editor in cheif
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विजयादशमी के धार्मिक आयोजन में अश्लीलता पर उठे सवाल

उमरिया। विजयादशमी के अवसर पर उमरिया बस स्टैंड परिसर में आयोजित कार्यक्रम उस समय विवादों में घिर गया, जब बार बालाओं के डांस और कथित अश्लील गानों को लेकर जमकर हंगामा हो गया। धार्मिक पर्व के नाम पर आयोजित कार्यक्रम में देर रात तक चले डांस को लेकर शहर में भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आधी रात के दौरान डांस कार्यक्रम में कुछ युवक कथित तौर पर नशे की हालत में पहुंच गए। डांस कर रही युवतियों के साथ छेड़छाड़ को लेकर विवाद शुरू हुआ। आयोजन समिति के सदस्यों ने बीच-बचाव कर स्थिति संभालने का प्रयास किया, लेकिन मामला शांत होने के बजाय और बढ़ता चला गया और देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई और मौके पर मौजूद पुलिस को कथित रूप से उपद्रव कर रहे लोगों को नियंत्रित करने के लिए लाठियां भांजनी पड़ीं। पुलिस की कार्रवाई के बाद किसी तरह स्थिति को नियंत्रित किया गया।

धार्मिक पर्व या मनोरंजन के नाम पर अश्लीलता?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि विजयादशमी जैसे धार्मिक पर्व के सार्वजनिक आयोजन में आखिर बार बालाओं के डांस और अश्लील गानों की जरूरत क्यों पड़ी? जिला प्रशासन द्वारा शांति समिति की बैठकों में लगातार आयोजकों को धार्मिक आयोजनों में अश्लीलता, फूहड़ता और विवादित कार्यक्रमों से बचने की हिदायत दी जाती है। इसके बावजूद यदि उन्हीं निर्देशों को दरकिनार कर ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं तो यह प्रशासनिक निर्देशों की गंभीर अनदेखी है।

विडंबना यह भी है कि शांति समिति की बैठकों में कई आयोजक स्वयं अश्लीलता और अव्यवस्था के खिलाफ सवाल उठाते हैं, लेकिन आयोजन के समय उन्हीं मंचों पर ऐसे कार्यक्रमों को जगह दिए जाने पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।

आयोजन समिति की भूमिका पर भी सवाल

शहर के नागरिकों और बुद्धिजीवियों ने घटना पर नाराजगी जताते हुए कहा कि धार्मिक आयोजन की गरिमा बनाए रखना आयोजन समिति की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि कार्यक्रम के दौरान अश्लील डांस, आपत्तिजनक गाने और अव्यवस्था की स्थिति बनती है तो आयोजकों की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि धार्मिक पर्व आस्था और संस्कार का प्रतीक हैं, उन्हें अश्लील मनोरंजन और विवाद का मंच बनाना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है। विजयादशमी के पावन अवसर पर हुए इस घटनाक्रम ने आयोजन समिति की घटिया सोच और उद्देश्य दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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