21 लाख खर्च होने के बावजूद अंधेरे में आदिवासी टोला! ठेकेदार को कलेक्टर का नोटिस,5 अक्टूबर तक अल्टीमेटम,डीएमएफ की राशि मे बड़ा भ्रस्टाचार

Editor in cheif
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उमरिया। आदिवासी बस्तियों को रोशन करने के लिए स्वीकृत 21 लाख रुपये की राशि के बावजूद ग्राम पंचायत कठई के आदिवासी टोले में आज तक बिजली नहीं पहुंच पाई है। विद्युतीकरण का काम अधूरा छोड़ने और निर्धारित समय-सीमा का पालन नहीं करने पर जिला प्रशासन ने संबंधित ठेकेदार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। जिला खनिज प्रतिष्ठान, उमरिया के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं सचिव ने ठेकेदार संजय कुमार तिवारी को कारण बताओ नोटिस जारी कर 5 अक्टूबर 2026 तक काम पूरा करने का अंतिम अवसर दिया है। निर्धारित समय में कार्य पूरा नहीं होने पर क्रयादेश निरस्त करने के साथ विभागीय दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

21 लाख की स्वीकृति, फिर भी अंधेरे में आदिवासी बस्ती

प्राप्त शासकीय दस्तावेजों के अनुसार, जिला खनिज प्रतिष्ठान (डीएमएफ) मद से वित्तीय वर्ष 2024-25 में ग्राम पंचायत कठई के अंतर्गत ग्राम सांस के आदिवासी टोले में विद्युतीकरण के लिए 21 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई थी। लोक निर्माण विभाग (विद्युत/यांत्रिकी) संभाग रीवा के माध्यम से स्वीकृत इस राशि से सुरेश एवं देवशरण के घर से लेकर जगन, मोहन और शंभू के घर तक बिजली पहुंचाने का कार्य प्रस्तावित था।

कार्य को निर्धारित छह माह की समय-सीमा में पूरा किया जाना था। इसके लिए 29 जनवरी 2026 को क्रयादेश भी जारी किया गया, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी विद्युतीकरण का काम अधूरा पड़ा है। नतीजतन, बस्ती के आदिवासी परिवार आज भी बिजली जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित हैं और उन्हें रात के समय ढिबरी तथा मोमबत्ती के सहारे गुजारा करना पड़ रहा है।

समाचारों में मामला उजागर होने के बाद हरकत में आया प्रशासन

आदिवासी बस्ती में विद्युतीकरण कार्य की धीमी गति और लंबे समय से काम अधूरा रहने का मामला स्थानीय समाचार पत्रों में प्रमुखता से प्रकाशित हुआ। इसके बाद जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित कार्य की स्थिति पर संज्ञान लिया। नोटिस में भी ठेकेदार की कार्यप्रणाली को लापरवाहीपूर्ण मानते हुए कहा गया है कि इस तरह की उदासीनता से शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की छवि प्रभावित हो रही है। जिला खनिज प्रतिष्ठान ने स्पष्ट किया है कि विकास कार्यों के लिए स्वीकृत राशि का निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप उपयोग सुनिश्चित करना संबंधित एजेंसी और ठेकेदार की जिम्मेदारी है। इसके बावजूद कार्य अधूरा रहना गंभीर विषय है।

5 अक्टूबर तक काम पूरा करने का अंतिम अल्टीमेटम

जारी कारण बताओ नोटिस में ठेकेदार संजय कुमार तिवारी को 5 अक्टूबर 2026 तक विद्युतीकरण का शेष कार्य हर हाल में पूर्ण कराकर मध्यप्रदेश विद्युत मंडल, उमरिया को हस्तांतरित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही कार्य पूर्ण होने का पालन प्रतिवेदन भी संबंधित कार्यालय में प्रस्तुत करना होगा।
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूरा नहीं होने की स्थिति में कार्यपालन अभियंता, विद्युत मंडल उमरिया द्वारा जारी क्रयादेश निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा ठेकेदार के विरुद्ध नियमानुसार विभागीय दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।

जवाबदेही तय होगी या फिर कागजों तक सीमित रहेगी कार्रवाई?

21 लाख रुपये की स्वीकृति के बावजूद आदिवासी बस्ती में बिजली का नहीं पहुंचना विकास कार्यों की निगरानी और क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों के बीच भी कार्य में देरी को लेकर नाराजगी है। सवाल यह है कि जब कार्य के लिए बजट स्वीकृत था और क्रयादेश भी जारी हो चुका था, तो निर्धारित समय में विद्युतीकरण पूरा क्यों नहीं किया गया?

अब प्रशासन द्वारा तय की गई समय-सीमा बेहद महत्वपूर्ण है। 5 अक्टूबर तक काम पूरा नहीं होने पर क्रयादेश निरस्त करने की चेतावनी दी गई है। हालांकि, ठेकेदार के विरुद्ध आगे क्या कार्रवाई होती है, यह निर्धारित समय-सीमा समाप्त होने के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल आदिवासी परिवारों को इंतजार है कि उन्हें कब तक बिजली की सुविधा मिल पाएगी और सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तव में उनके घरों तक पहुंचेगा।

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