उमरिया। जिले के करकेली जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम बड़ागांव में सड़क की बदहाल स्थिति ग्रामीणों और स्कूली बच्चों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। बारिश के मौसम में गांव की सड़क कीचड़ और पानी से लबालब हो जाती है। जगह-जगह बने गड्ढों और जलभराव के बीच से होकर स्कूली बच्चों को रोजाना स्कूल पहुंचना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि खराब रास्ते के कारण कई बार बच्चे फिसलकर गिर जाते हैं, वहीं जलभराव और कीचड़ के चलते उन्हें स्कूल पहुंचने में भी परेशानी होती है।
ग्रामीणों के मुताबिक गांव में सड़क निर्माण की मांग लंबे समय से की जा रही है। सड़क निर्माण को लेकर कलेक्टर,जनप्रतिनिधियों सहित संबंधित अधिकारियों को कई बार आवेदन दिए जा चुके हैं, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। ग्रामीणों का दावा है कि करीब तीन वर्ष पहले सड़क निर्माण की मांग को लेकर हाईवे जाम करने की चेतावनी दिए जाने के बाद प्रशासनिक अधिकारी गांव पहुंचे थे। उस समय ग्रामीणों को जल्द सड़क निर्माण शुरू कराने का आश्वासन दिया गया था। ग्रामीणों का कहना है कि आश्वासन के बावजूद तीन साल का लंबा समय बीत गया,लेकिन सड़क की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।

लगातार आश्वासन के बाद भी नहीं बनी सड़क
सोमवार को ग्रामीणों ने सड़क निर्माण को लेकर पूर्व में दिए गए आवेदनों की प्रतियां सामने रखीं और अपनी समस्या प्रशासन के समक्ष रखी। ग्रामीणों का कहना है कि अब समस्या केवल आवागमन तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसका सीधा असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है।
इसी समस्या को लेकर गांव के स्कूली बच्चे भी अब अपनी आवाज उठाने के लिए आगे आए हैं। मंगलवार को बच्चे ग्रामीणों के साथ कलेक्टर की जनसुनवाई में अपनी समस्या रखने पहुंचे। बच्चों और ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि गांव की सड़क का जल्द से जल्द निर्माण कराया जाए, ताकि बारिश के दिनों में उन्हें कीचड़ और गड्ढों के बीच से होकर स्कूल जाने की मजबूरी से निजात मिल सके। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क किसी भी गांव के लिए बुनियादी सुविधा है। खराब सड़क के कारण स्कूली बच्चों के अलावा बुजुर्गों, मरीजों और रोजमर्रा के काम से आने-जाने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
अब ग्रामीण प्रशासन से सवाल कर रहे हैं कि लगातार मांग और कई बार दिए गए आश्वासनों के बावजूद आखिर बड़ागांव की सड़क कब बनेगी और कब तक स्कूली बच्चे कीचड़ व गड्ढों के बीच से होकर स्कूल जाने को मजबूर रहेंगे?