विस्थापन हेतु प्रति वयस्क की राशि 10 लाख से बढ़ाकर 15 लाख रूपये का लाभ लेने वाला पहला गाँव बना गढ़पुरी

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उमरिया (संवाद)। बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान में स्थित 10 गाँव में शासन की नीतियों के तहत स्वैच्छिक विस्थापन का कार्य प्रस्तावित है। शासन द्वारा 2006 के पश्चात 2021 में विस्थापन हेतु प्रति परिवार राशि रू. 10 लाख से बढाकर रू. 15 लाख की गई है। इसका लाभ उठाते हुए बाँधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान के गढ़पुरी गाँव के 312 परिवारों द्वारा विस्थापन हेतु सहमति व्यक्त की गई ।
विस्थापन हेतु गठित समिति द्वारा पात्र पाये जाने पर 15 लाख रू प्रति परिवार की दर से भुगतान की कार्यवाही प्रशासन द्वारा प्रारंभ की जा चुकी है।  18 वर्ष से बड़े प्रत्येक पुरूष, पत्नि एवं नाबालिक बच्चों सहित,  18 वर्ष से बडे पुत्र/पुत्री, विधवा, परित्यक्ता एवं दिव्यांग प्रत्येक को एक परिवार माना गया है। अब तक 148 परिवार को 22.2 करोड़ रूपये (बाइस करोड़ बीस लाख रू ) का भुगतान किया जा चुका है। भुगतान की कार्यवाही लगातार जारी है। विस्थापि ग्रामीणों के संयुक्त परिवारों को 60 लाख रू से लेकर 7.05 करोड़ रूपये तक प्राप्त हो रहा है। जैसा की सभी को ज्ञात है कि गढ़पुरी ग्राम राष्ट्रीय उद्यान के बीच मे स्थित है।
गढ़पुरी के ग्रामीणों द्वारा लगातार प्रबंधन से विस्थापन की माँग की जा रही थी। ग्रामीणों का कहना था की राष्ट्रीय उद्यान के अंदर स्थित होने के कारण हमारा गाँव शासन की विभिन्न योजनाओं एवं मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। साथ ही हिंसक वन्यप्राणियों का विचरण लगातार गाँव के आस-पास होने से ग्रामीणों एवं उनके मवशियों को जान का खतरा हमेशा बना रहता है। वर्ष 2018 से बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान मे जंगली हाथियों का विचरण लगातार बना हुआ है जो ग्रामीणों की फसलों, घरों को लगातार नुकसान पहुँचा रहे हैं एवं कुछ दुर्भाग्यपूर्ण मामलों में ग्रामीणों को अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ा है।
ग्रामीणों की माँग पर पार्क प्रबंधन एवं जिला प्रशासन द्वारा त्वरित कार्यवाही करते हुए ग्रामीणों द्वारा स्वैच्छिक विस्थापन हेतु प्रस्तुत 312 आवेदनो पर लगभग एक माह की रिकार्ड अवधि में कार्यवाही पूर्ण की गई। अब ये ग्रामीण विस्थापित होकर भय मुक्त जीवन जी सकेंगें एवं शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकेंगें। उनका यह कदम उनके जीवन में नया प्रकाश लेकर आयेगा। पार्क प्रबंधन एवं प्रशासन द्वारा समस्त एहतिहात बरते जा रहे हैं ताकि विस्थापित हो रहे ग्रामीणों को किसी भी तरह की परेशानियों से दो चार न होना पड़े। पार्क प्रबंधन द्वारा राष्ट्रीय उद्यान के अंदर निवासरत ग्रामीणों से इस योजना का लाभ लेने की अपील की गई है।
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