देखिये नपा CMO ज्योति सिंह के पति की दबंगई,भ्रस्टाचार की जांच करने गई टीम को सीएमओ पति ने विवाद कर धमकाया,VIDEO वायरल

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उमरिया (संवाद)। जिला मुख्यालय की महत्वपूर्ण नगर पालिका उमरिया की  सीएमओ ज्योति सिंह के द्वारा किए गए भ्रष्टाचार और नियम विरुद्ध गतिविधियां किसी से छिपी नहीं है। नगरपालिका के पार्षदों विज्ञापन के बाद कलेक्टर के द्वारा मामले की जांच कराने निर्देश दिए गए थे। वहीं परिषद ने भी इसे अपने स्तर पर इंजीनियर और पार्षदों की एक टीम बनाकर जांच कराने का निर्णय लिया था। पार्षदों की शिकायत के आधार पर तमाम बिंदुओं की जांच करने जब जांच टीम मौके पर पहुंची, तब वहां सीएमओ पति के द्वारा ढाल की तरह जांच टीम के सामने आ धमके। इतना ही नहीं वह जांच टीम से विवाद करके धमकाने का भी प्रयास किया है। वायरल वीडियो में आप देख सकते हैं की किस कदर सीएमओ ज्योति सिंह के पति जांच टीम में शामिल आदिवासी वर्ग के पार्षदों से विवाद कर रहे हैं।

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उमरिया (संवाद)। जिला मुख्यालय की महत्वपूर्ण नगर पालिका उमरिया की  सीएमओ ज्योति सिंह के द्वारा किए गए भ्रष्टाचार और नियम विरुद्ध गतिविधियां किसी से छिपी नहीं है। नगरपालिका के पार्षदों विज्ञापन के बाद कलेक्टर के द्वारा मामले की जांच कराने निर्देश दिए गए थे। वहीं परिषद ने भी इसे अपने स्तर पर इंजीनियर और पार्षदों की एक टीम बनाकर जांच कराने का निर्णय लिया था। पार्षदों की शिकायत के आधार पर तमाम बिंदुओं की जांच करने जब जांच टीम मौके पर पहुंची, तब वहां सीएमओ पति के द्वारा ढाल की तरह जांच टीम के सामने आ धमके। इतना ही नहीं वह जांच टीम से विवाद करके धमकाने का भी प्रयास किया है। वायरल वीडियो में आप देख सकते हैं की किस कदर सीएमओ ज्योति सिंह के पति जांच टीम में शामिल आदिवासी वर्ग के पार्षदों से विवाद कर रहे हैं।दरअसल नगर पालिका उमरिया में पदस्थ सीएमओ ज्योति सिंह के द्वारा लगातार किए जा रहे भ्रष्टाचार और नियम विरुद्ध तरीके से समानों की खरीद-फरोख्त की जा रही थी जिससे परेशान होकर पार्षदों के द्वारा कलेक्टर उमरिया को ज्ञापन सौंपकर सीएमओ के खिलाफ जांच कर कार्यवाही करने की मांग की गई थी। पार्षदों ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी इस संबंध में एक शिकायती पत्र दिया था। कलेक्टर उमरिया डॉ केडी त्रिपाठी के द्वारा पार्षदों की शिकायत पर जांच कराने के निर्देश दिए गए थे इसके लिए उन्होंने एडीएम केसी बोपचे को जांच करने निर्देशित किया था।इधर नगर पालिका  परिषद के द्वारा पी आई सी ने निर्णय लिया कि वह भी एक टीम का गठन करके इस पूरे मामले की जांच करेगी, जिसके लिए पीआईसी ने नगरपालिका के सब इंजीनियर मानसी गुप्ता के नेतृत्व में एक कर्मचारी और 4 पार्षदों सहित एक टीम बनाई। पार्षदों की शिकायत के आधार पर जांच टीम ने बिंदुवार जांच करने भंडार कक्ष पहुंची, तब वहां मौजूद सीएमओ ज्योति सिंह के पति ने जांच टीम के सामने जमकर दबंगई दिखाई है। जांच टीम में शामिल आदिवासी पार्षदों के साथ सीएमओ पति ने ना सिर्फ उन्हें जांच करने से रोका बल्कि उन्हें धमकाया भी है। वायरल वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि किस कदर सीएमओ के पति के द्वारा जांच टीम विवाद करते हुए धमकाया जा रहा है।बता दे कि नगरपालिका उमरिया के सीएमओ द्वारा नियमविरुद्ध तरीके से तकरीबन 50 लाख रुपये की खरीदी की शिकायत के मामले में जांच करने गई आदिवासी पार्षदों की टीम को सीएमओ ज्योति सिंह के पति के द्वारा अपमानित कर जांच प्रभावित करने का मामला सामने आया है घटना के दौरान सीएमओ पति के बर्ताव का बाकायदा वीडियो भी बनाया गया है,पार्षदों के मुताबिक  तकरीबन पचास लाख रुपये की राशि की सामग्री सीएमओ ज्योति सिंह के द्वारा नियमो को ताक पर रखकर चहेते ठेकेदारों को काम देकर किया गया।इस खरीदी में शासन के द्वारा तय नियमो का भी जमकर उल्लंघन किया गया।इस घोटाले की जांच करने के लिए परिषद के सभी 24 पार्षदों ने चार पार्षदों और नगर पालिका के अधिकारियों की संयुक्त टीम के द्वारा कराने के निर्देश दिए।खास बात यह कि सीएमओ के द्वारा किये गए घोटाले की जांच के मामले में प्रमुख विपक्षी दल भाजपा और कांग्रेस भी एकमत हो गए,जांच टीम में दो आदिवासी पार्षदों के अलावा दलित और अल्पसंख्यक समुदाय से भी एक-एक पार्षदों को शामिल किया गया था लेकिन खरीदी गई सामग्री का सत्यापन करने जब पार्षद भंडार गृह पंहुचे तो सीएमओ के पति ने उन्हें रोक लिया और उनका अपमान कर उन्हें जांच से रोका अभद्र व्यवहार किया,आहत पार्षद बिना जांच किये बैरंग वापस लौट आये और अपने साथ हुए बरताव की शिकायत पंचनामा के माध्यम से उच्च अधिकारियों से करते हुए कार्यवाही की मांग की है।

दरअसल नगर पालिका उमरिया में पदस्थ सीएमओ ज्योति सिंह के द्वारा लगातार किए जा रहे भ्रष्टाचार और नियम विरुद्ध तरीके से समानों की खरीद-फरोख्त की जा रही थी जिससे परेशान होकर पार्षदों के द्वारा कलेक्टर उमरिया को ज्ञापन सौंपकर सीएमओ के खिलाफ जांच कर कार्यवाही करने की मांग की गई थी। पार्षदों ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी इस संबंध में एक शिकायती पत्र दिया था। कलेक्टर उमरिया डॉ केडी त्रिपाठी के द्वारा पार्षदों की शिकायत पर जांच कराने के निर्देश दिए गए थे इसके लिए उन्होंने एडीएम केसी बोपचे को जांच करने निर्देशित किया था।

इधर नगर पालिका  परिषद के द्वारा पी आई सी ने निर्णय लिया कि वह भी एक टीम का गठन करके इस पूरे मामले की जांच करेगी, जिसके लिए पीआईसी ने नगरपालिका के सब इंजीनियर मानसी गुप्ता के नेतृत्व में एक कर्मचारी और 4 पार्षदों सहित एक टीम बनाई। पार्षदों की शिकायत के आधार पर जांच टीम ने बिंदुवार जांच करने भंडार कक्ष पहुंची, तब वहां मौजूद सीएमओ ज्योति सिंह के पति ने जांच टीम के सामने जमकर दबंगई दिखाई है। जांच टीम में शामिल आदिवासी पार्षदों के साथ सीएमओ पति ने ना सिर्फ उन्हें जांच करने से रोका बल्कि उन्हें धमकाया भी है। वायरल वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि किस कदर सीएमओ के पति के द्वारा जांच टीम विवाद करते हुए धमकाया जा रहा है।

बता दे कि नगरपालिका उमरिया के सीएमओ द्वारा नियमविरुद्ध तरीके से तकरीबन 50 लाख रुपये की खरीदी की शिकायत के मामले में जांच करने गई आदिवासी पार्षदों की टीम को सीएमओ ज्योति सिंह के पति के द्वारा अपमानित कर जांच प्रभावित करने का मामला सामने आया है घटना के दौरान सीएमओ पति के बर्ताव का बाकायदा वीडियो भी बनाया गया है,पार्षदों के मुताबिक  तकरीबन पचास लाख रुपये की राशि की सामग्री सीएमओ ज्योति सिंह के द्वारा नियमो को ताक पर रखकर चहेते ठेकेदारों को काम देकर किया गया।इस खरीदी में शासन के द्वारा तय नियमो का भी जमकर उल्लंघन किया गया।

इस घोटाले की जांच करने के लिए परिषद के सभी 24 पार्षदों ने चार पार्षदों और नगर पालिका के अधिकारियों की संयुक्त टीम के द्वारा कराने के निर्देश दिए।खास बात यह कि सीएमओ के द्वारा किये गए घोटाले की जांच के मामले में प्रमुख विपक्षी दल भाजपा और कांग्रेस भी एकमत हो गए,जांच टीम में दो आदिवासी पार्षदों के अलावा दलित और अल्पसंख्यक समुदाय से भी एक-एक पार्षदों को शामिल किया गया था लेकिन खरीदी गई सामग्री का सत्यापन करने जब पार्षद भंडार गृह पंहुचे तो सीएमओ के पति ने उन्हें रोक लिया और उनका अपमान कर उन्हें जांच से रोका अभद्र व्यवहार किया,आहत पार्षद बिना जांच किये बैरंग वापस लौट आये और अपने साथ हुए बरताव की शिकायत पंचनामा के माध्यम से उच्च अधिकारियों से करते हुए कार्यवाही की मांग की है।

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