जिले की प्रशासनिक व्यवस्था चरमराई, कई महीनों से मुख्यालय में नही एसडीएम,नेताओ को कोस रहे लोग
उमरिया (संवाद)। जिले में बीते कुछ समय से प्रशासनिक व्यवस्था बदहाल है। जिला मुख्यालय की ही बात करे तो यहां पर न तो कोई डिप्टी कलेक्टर है और न ही मुख्यालय का एसडीएम है। जिसके कारण दूरदराज से आने वाले लोग बगैर काम हुए जिले के नेताओं को कोसते वापस लौट जाते है। इतने के बाद भी कलेक्टर के द्वारा कोई व्यवस्था बनाये बगैर हाथ पर हाथ धरे बैठे है।
दरअसल जिला मुख्यालय उमरिया में कई महीनों से बांधवगढ़ तहसील में एसडीएम नही है।इसके अलावा यहां कोई डिप्टी कलेक्टर और अपर कलेक्टर भी नही है।कई महीनों से एसडीएम नही होने से कोर्ट का काम बुरी तरह प्रभावित है वकील पक्षकार अपने तारीख में पहुंचते है लेकिन अधिकारी नही होने लौटकर वापस चले जाते है। इसके अलावा हाल ही में स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों का जाति प्रमाण पत्र भी बनाया जाना है । वह भी अधिकारी के नही होने से नही बन पा रहा है। प्रतिदिन सैकड़ो लोग एसडीएम कार्यालय का चक्कर काटते देखे जाते है। दूरदराज के लोग दिन दिनभर इस आस में बैठे रहते है कि शायद कोई आ जाये। लेकिन कोई नही आता शाम होने के बाद लोग यहां के नेताओ को कोसते वापस अपने घर लौट जाते है। लोंगो का मानना है कि जब जिला मुख्यालय का यह हाल है तो तहसील और उप तहसील स्तर में हाल क्या होगा? इतने के बाद भी कलेक्टर हाथ पर हाथ धरे बैठे है।
बीते कुछ दिन पहले कलेक्टर के द्वारा टेम्प्रेरी व्यवस्था बनाई गई थी जिसमे पाली एसडीएम नेहा सोनी को 2 दिन बांधवगढ़ तहसील कार्यालय अटैच किया गया था। जिससे सभी काम तो नही लेकिन जो भी जरूरी काम हो वह किया जा सके। लेकिन वर्तमान में पाली नगरपालिका के चुनाव चल रहे है और एसडीएम नेहा सोनी को वहां का चुनाव रिटर्निंग ऑफिसर बना दिया गया है।जिस कारण अब वह जिला मुख्यालय नही आ पा रही है। जिससे अब बांधवगढ़ तहसील कार्यालय का काम बिल्कुल ठप्प पड़ा है।
जबकि कलेक्टर को स्थायी समाधान के लिए यहां पर अपर कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर की पोस्टिंग के लिए डिमांड लेटर लिखना चाहिए और तब तक लिखना चाहिए जब तक शासन से पोस्टिंग नही हो जाती।लेकिन यहां जिले की समस्याओं से किसे क्या लेना देना। यहां तो सभी का अपनी डफली अपना राग है।
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