जनजातीय कार्य मंत्री सुश्री मीना के मुख्य आतिथ्य में ग्राम चौरी में ग्राम सभा संपन्न, ग्रामीणों को पेसा एक्ट की दी गई जानकारी

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उमरिया (संवाद)। प्रदेश की जन जातीय कार्य मंत्री सुश्री मीना सिंह के मुख्य आतिथ्य में ग्राम पंचायत चौरी विकासखण्ड पाली पेसा एक्ट से संबंधित ग्राम सभा संपन्न हुई। इस अवसर पर जन जातीय कार्य मंत्री ने ग्राम सभा का निरीक्षण कर अन्य बिंदुओं पर चर्चा की ।

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उमरिया (संवाद)। प्रदेश की जन जातीय कार्य मंत्री सुश्री मीना सिंह के मुख्य आतिथ्य में ग्राम पंचायत चौरी विकासखण्ड पाली पेसा एक्ट से संबंधित ग्राम सभा संपन्न हुई। इस अवसर पर जन जातीय कार्य मंत्री ने ग्राम सभा का निरीक्षण कर अन्य बिंदुओं पर चर्चा की ।ग्राम सभा के दौरान जन जातीय कार्य मंत्री ने ग्रामीणों को पेसा एक्ट के तहत जानकारी देते हुए बताया कि पेसा एक्ट का पहला अधिकार है जमीन का।  गांव की जमीन के और वन क्षेत्र के नक्शा, खसरा, बी-1 आदि ग्राम सभा को पटवारी और बीट गार्ड हर साल उपलब्ध कराएंगे। यदि राजस्व अभिलेखों में कोई गलती पाई जाती है तो ग्राम सभा को उसमें सुधार के लिए अपनी अनुशंसा भेजने का पूरा अधिकार होगा। अधिसूचित क्षेत्रों में बिना ग्राम सभा की सहमति के किसी भी प्रोजेक्ट के लिए गाँव की जमीन का भू- अर्जन नहीं किया जाएगा। गैर जनजातीय व्यक्ति या कोई भी अन्य व्यक्ति छल-कपट से, बहला-फुसलाकर, विवाह करके जनजातीय भाई-बहनों की जमीन पर गलत तरीके से कब्जा करने या खरीदने की  कोषिष करें तो ग्राम सभा इसमें हस्ताक्षेप करेंगी। अधिसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा की अनुषंसा के बिना पर खनिज के पट्टे, पट्टा, देने या नीलामी की कार्यवाही नही की जा सकेगी।पेसा एक्ट का दूसरा अधिकार है जल का । गांव के तालाबों का प्रबंधन अब ग्राम सभा करेगी। 100 एकड़ तक की सिंचाई क्षमता के तालाब और जलाशय का प्रबंधन संबंधित ग्राम पंचायत द्वारा किया जाएगा। पेसा एक्ट में तीसरा अधिकार है जंगल का। ग्राम सभा अपने क्षेत्र में स्वयं या एक समिति गठित करके गौण वनोपजों जैसे अचार गुठली, करंज बीज, महुआ, लाख, गोंद, हर्रा, बहेरा, आँवला आदि का संग्रहण, विपणन, मूल्य निर्धारण और विक्रय कर सकेंगे। यदि एक से अधिक ग्राम सभा चाहे तो वे ये काम मिलकर भी कर सकती है। वनोपज के दामों को तय करने का अधिकार अब ग्राम सभा के हाथ में चला जाएगा और गरीब आदिवासी भाई-बहनों की वनोपज औने-पौने दामों में नहीं बिकेगी। ग्राम सभा चाहे तो तेंदू पत्ते का संग्रहण और विपणन खुद कर सकेगी। इसके साथ ही पेसा एक्ट के तहत चौथा अधिकार श्रमिको के अधिकारों का संरक्षण होगा।
ग्राम सभा के दौरान जन जातीय कार्य मंत्री ने ग्रामीणों को पेसा एक्ट के तहत जानकारी देते हुए बताया कि पेसा एक्ट का पहला अधिकार है जमीन का।  गांव की जमीन के और वन क्षेत्र के नक्शा, खसरा, बी-1 आदि ग्राम सभा को पटवारी और बीट गार्ड हर साल उपलब्ध कराएंगे। यदि राजस्व अभिलेखों में कोई गलती पाई जाती है तो ग्राम सभा को उसमें सुधार के लिए अपनी अनुशंसा भेजने का पूरा अधिकार होगा। अधिसूचित क्षेत्रों में बिना ग्राम सभा की सहमति के किसी भी प्रोजेक्ट के लिए गाँव की जमीन का भू- अर्जन नहीं किया जाएगा। गैर जनजातीय व्यक्ति या कोई भी अन्य व्यक्ति छल-कपट से, बहला-फुसलाकर, विवाह करके जनजातीय भाई-बहनों की जमीन पर गलत तरीके से कब्जा करने या खरीदने की  कोषिष करें तो ग्राम सभा इसमें हस्ताक्षेप करेंगी। अधिसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा की अनुषंसा के बिना पर खनिज के पट्टे, पट्टा, देने या नीलामी की कार्यवाही नही की जा सकेगी।

पेसा एक्ट का दूसरा अधिकार है जल का । गांव के तालाबों का प्रबंधन अब ग्राम सभा करेगी। 100 एकड़ तक की सिंचाई क्षमता के तालाब और जलाशय का प्रबंधन संबंधित ग्राम पंचायत द्वारा किया जाएगा। पेसा एक्ट में तीसरा अधिकार है जंगल का। ग्राम सभा अपने क्षेत्र में स्वयं या एक समिति गठित करके गौण वनोपजों जैसे अचार गुठली, करंज बीज, महुआ, लाख, गोंद, हर्रा, बहेरा, आँवला आदि का संग्रहण, विपणन, मूल्य निर्धारण और विक्रय कर सकेंगे। यदि एक से अधिक ग्राम सभा चाहे तो वे ये काम मिलकर भी कर सकती है। वनोपज के दामों को तय करने का अधिकार अब ग्राम सभा के हाथ में चला जाएगा और गरीब आदिवासी भाई-बहनों की वनोपज औने-पौने दामों में नहीं बिकेगी। ग्राम सभा चाहे तो तेंदू पत्ते का संग्रहण और विपणन खुद कर सकेगी। इसके साथ ही पेसा एक्ट के तहत चौथा अधिकार श्रमिको के अधिकारों का संरक्षण होगा।
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