चुनावी प्रक्रिया को सम्पन्न कराने में फेल साबित हो रहे कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी?
उमरिया (संवाद)। नगरीय निकाय चुनाव के मद्देनजर जहां नाम निर्देशन पत्र और चुनाव चिन्ह आवंटन का समय 22 जून को निर्धारित किया गया था। लेकिन रात 12 बजे तक उम्मीदवारों को चुनाव चिन्ह का आवंटन नही किया जा सका है। वहीं राज्य निर्वाचन आयोग के द्वारा निर्धारित समय की 3 बजे के बाद चुनाव चिन्ह का आवंटन किया जाना था। लेकिन उमरिया के जिला मुख्यालय स्थित नगर पालिका में हो रहे चुनाव में कोई भी निर्वाचन का कार्य समय पर नही हो पा रहा है।
जानकारी के मुताबिक जिले में कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव की कार्यप्रणाली किसी से छिपी नही है उनके द्वारा अक्सर कोई भी काम समय पर नही हो पाता है।इसका एक प्रमुख कारण यह भी की वे किसी अपने मातहत अधिकारी कर्मचारी पर इन्हें भरोसा नही है।यह पूरा काम स्वयं ही करना चाहते है इसलिए इनसे कोई भी कार्य समय पर नही हो पाता है। वर्तमान में पंचायतो के साथ साथ नगरीय निकाय के भी चुनाव हो रहे है ऐसे में हर प्रत्यासी चाहता है कि निर्वाचन का काम समय पर हो ।आज ही कि बात करे तो दोपहर 3 बजे तक नाम निर्देशन पत्र और B फार्म जमा करने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई थी, लेकिन जिला निर्वाचन के द्वारा रात 12 बजे तक किसी भी प्रत्यासी को चुनाव चिन्ह आवंटित नही हो सके है। कई राजनीतिक दलों और निर्दलीय प्रत्यासी रात 10:30बजे तक कलेक्ट्रेट कार्यालय में बैठे रहे,चक्कर लगाते रहे, लेकिन तब तक उन्हें उनका चुनाव चिन्ह आवंटित नही हो सका और वे सभी थक हारकर वापस अपने घर की ओर रवाना हो गए।
सभी जानते है कि चुनाव में एक एक घंटे कितने महत्त्वपूर्ण होते है लेकिन यहां पर बैठे जिला निर्वाचन अधिकारी को इससे कोई लेना देना नही है वो तो अपने हिसाब से ही काम करेंगे। कलेक्ट्रेट में मौजूद कुछ निर्वाचन कर्मचारियों के द्वारा वहां पर रात 10 बजे मौजूद प्रत्यासियो से कहा गया कि वह कल यानी 23 जून को दिन 11 बजे के बाद आकर पता कर लेंगे की किसे कौन सा चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया है। इसके बाद उन सभी उम्मीदवारों ने पत्रकारों से रात 12 बजे तक संपर्क किया कि शायद यह जानकारी उन तक पहुंची हो लेकिन पत्रकारों के पास भी यह जानकारी नही थी।
जाहिर सी बात है कि जब निर्वाचन आयोग द्वारा हर कार्य के लिए एक समय निर्धारित है ऐसे में कोई भी कार्य समय पर नही किया जाता है तो सीधी सी बात है की यहां का कलेक्टर और जिला निर्वाचन अधिकारी इस पूरी प्रक्रिया में फेल साबित हो रहा है।
इसके अलावा अगर उमरिया के पड़ोसी जिले की बात करे तो कटनी नगर निगम में 45 वार्ड है जहां पर 186 उम्मीदवार चुनाव मैदान में है वही 12 कैंडिडेट महापौर का चुनाव लड़ रहे है ऐसे में कटनी जिले की जानकारी समय पर कैसे आ गई जबकि वहां पर पूरी प्रक्रिया अपर कलेक्टर सम्पन्न करा रहे है। इसी के साथ शहडोल जिले की धनपुरी नगरपालिका की बात करे तो वहां पर 28 वार्ड है वहां पर चुनाव चिन्ह सहित तमाम जानकारी प्रत्यासियो को समय पर कैसे मिल पा रही है, यह अपने आप मे सोचने और समझने का विषय है। इसके अलावा उमरिया जिले की अन्य नगर परिषदों की बात करे तो जिसमे चंदिया, नौरोजाबाद और मानपुर में वहां मौजूद निर्वाचन अधिकारी के द्वारा समय पर और बेहतर तरीके निर्वाचन के कराए जा रहे है।
निश्चित रूप से यह देखकर यह सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि उमरिया जिले में निर्वाचन जैसे महत्वपूर्ण कार्य मे भी लेट लतीफी का आलम है और जिले के कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी इस पूरी प्रक्रिया में फेल साबित होते दिखाई दे रहे है।
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