गलत रणनीति से भाजपा की हुई दुर्गति ? भला हो आदिवासी,दलित वार्डो का जिन्होंने पार्टी की बचाई लाज

Editor in cheif
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उमरिया (संवाद)। नगरपालिका उमरिया के चुनाव में देश और प्रदेश की सत्तासीन भाजपा पार्टी की दुर्गति देखने को मिली है। चुनाव के प्रारंभ से ही पार्षदो की टिकिट वितरण से लेकर पूरे चुनाव के दौरान न तो कोई सिस्टम देखने को मिला और न सामंजस्य। यहां तक कि उमरिया नगर के जो भी पुराने और प्रमुख लोग थे वे भी कहीं दिखाई नही दिए। कई वार्डो में भाजपा के लोग निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ रहे थे उनसे भी सामंजस्य नही बनाया गया और इसी नाराजगी और आंतरिक कलह के कारण देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी जो केंद्र और प्रदेश में सत्तासीन है उसके अनुकूल माहौल रहने के बाद  भी अपनी गलत रणनीति और अहंकार के चलते पूरी पार्टी को झोंक दिया गया। वो तो भला हो नगरपालिका के आदिवासी और दलित वार्डों का जिन्होंने पार्टी की लाज बचा ली नही तो मुह दिखाने के लायक नही बचते?

गलत रणनीति और सामंजस्य की रही कमी

चुनावी रणनीति बनाने और मैनेजमेंट के मामले में भाजपा का कोई तोड़ नही है। लेकिन उमरिया के नगरपालिका चुनाव में न तो रणनीति दिखाई दी और न ही अच्छा मैनेजमेंट। एक तो भाजपा ने टिकिट वितरण में भारी गड़बड़ी की जबकि रायशुमारी में जो नाम फाइनल हुए थे उन्हें टिकिट नही दी गई।इसके बाद नाराज या बागियों से भी सामंजस्य नहीं बनाया गया वहीं जो यहां के प्रमुख वरिष्ठ भाजपा नेता रहे उन्हें भी नही पूंछा गया। इस चुनाव में 5 वार्डों में भाजपा के बागियों ने पार्टी को जमकर नुकसान पहुंचाया है। वार्ड नंबर 6,11,15,16 और 22 में बागियों ने भाजपा को हराने का काम किया है। जबकि साफतौर पर देखा जा सकता है कि उमरिया की जनता भाजपा के साथ थी, लेकिन टिकिट वितरण में हुई चूक से जनता ने भाजपा के उम्मीदवार को वोट न देकर भाजपा के बागियों को वोट दिया है। वार्ड नंबर 3 में बागी धर्मेंद्र प्रजापति और  वार्ड 17 में बागी साक्षी यादव के कारण भाजपा चुनाव हारते-हारते बची है । हालांकि वार्ड नंबर 11 में भाजपा के बागी सुजीत सिंह भदौरिया की पत्नी श्रीमती पूर्णिमा सिंह ने बड़ी जीत हासिल की है।

आदिवासी वार्डों ने बचाई भाजपा की लाज

पूरे नगरपालिका चुनाव में भाजपा पार्टी की एक नौसिखिए जैसी हालात हुई है। दो लोंगो की आपसी खींचतान में पूरी पार्टी तहस-नहस हो गई। वो तो भला हो आदिवासी,दलित वार्डो का जिन्होंने पार्टी की लाज बचाये रखी है नही तो परिणाम और भी बद्तर होते। वार्ड नंबर 1,2,3,4,13, आदिवासी,हरिजन वार्ड कहलाते है। यहां से भाजपा के उम्मीवारों में क्रमशः श्रीमती रुक्मणी सिंह गोंड़, राजू कोल,शुशीलचंद्र रैदास,राजेन्द्र कोल व श्रीमती सीमा रैदास ने शानदार जीत हासिल की है।इसके अलावा वार्ड 18 में भी आदिवासी,दलित की संख्या अधिक है यहां से भाजपा कैंडिडेट पत्रकार संजय तिवारी की पत्नी श्रीमती विनीता तिवारी ने 224 वोटों से शानदार जीत हासिल की है।इस वार्ड से भी भाजपा के धुरंधर और वरिष्ठ नेता दिनेश त्रिपाठी ने अपनी बहू श्रीमती रेशमा त्रिपाठी को निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ाया था।
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