आदिवासी उत्पीड़न के खिलाफ न्याय रैली 11 सितंबर को,रैली में बताई जाएगी कलेक्टर की औकात

Editor in cheif
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उमरिया (संवाद)। जिले में आदिवासी उत्पीड़न के खिलाफ आदिवासी न्याय रैली का आयोजन 11 सितंबर को जिला मुख्यालय के बस स्टैंड प्रांगण में किया गया है।जिसमें पहले बस स्टैंड में आदिवासियों का एकत्रीकरण और उसके बाद वहां से शहर के मुख्य मार्ग होकर गांधी चौक और फिर स्टेशन रोड से होते हुए रानी दुर्गावती चौक पहुंचेंगे और पूजा अर्चना कर वापस बस स्टैंड जाएंगे जहां आदिवासी उत्पीड़न के खिलाफ विशाल जनसभा का आयोजन किया गया है। जहां आदिवासी नेताओ के द्वारा शासन और प्रशासन के खिलाफ हल्ला बोलेंगे।
दरअसल आदिवासियों का मानना है कि बीते समय से पूरे मध्यप्रदेश सहित आदिवासी बाहुल्य जिलों में आदिवासियों का उत्पीड़न हो रहा हैं। उनका मानना है कि उमरिया जिले में सम्पन्न हुए जिला पंचायत के चुनाव में प्रशासन सत्ता के लोंगो के इशारे पर विपक्षी पार्टी के आदिवासी उम्मीदवार को जानबूझकर सबके सामने टॉस के दौरान उसकी पर्ची बदल दी गई।जबकि वह टॉस में जीत चुकी थी लेकिन कलेक्टर ने उसकी पर्ची बदलकर सत्ता पक्ष के उम्मीदवार को जिता दिया। इतना ही नही इसके बाद कलेक्टर ने आदिवासी उम्मीदवार सावित्री सिंह का हाथ पकड़कर खींचा और अपमान जनक बातें कही है। जिसके बाद कलेक्टर के द्वारा की गई इस हरकत से पूरा आदिवासी समाज गुस्से में है। जबकि इसके लिए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई थी पुलिस के द्वारा कोई कार्यवाही नही की गई।
हालांकि इस मामले में कलेक्टर का अपना तर्क है। इस संबंध में उन्होंने भी पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई है। जिसमे विभिन्न धाराओं सहित मुकदमा भी कायम किया गया है। कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव के अनुसार उनके द्वारा जिला पंचायत के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की निर्वाचन प्रक्रिया में पूरी निष्पक्षता बरती गई है। अध्यक्ष पद की उम्मीदवार सावित्री सिंह के द्वारा पात्र से पर्ची निकालते ही उन पर हमला किया है और पर्ची छुड़ाने और प्रक्रिया को बाधित किया है जिससे उनके हाथ मे भी चोट पहुंची है।
इसके अलावा आदिवासियों के उत्पीड़न से जुड़े और भी मामले है जिसको लेकर आदिवासी समाज 11 सितंबर रविवार को न्याय रैली का आयोजन किया है। इस आदिवासी समाज की न्याय रैली में उमरिया जिले के आदिवासियों सहित अन्य जिले के भी आदिवासी सम्मिलित होंगे। उम्मीद जताई जा रही है कि हजारों की संख्या में लोग आदिवासी उत्पीड़न के खिलाफ न्याय रैली सम्मिलित होंगे।
इस बीच सोशल मीडिया और फेसबुक में कई प्रकार के स्लोगन भी वायरल और शेयर किए जा रहे है। जिनमें कुछ इस प्रकार के स्लोगन भी है कि कलेक्टर लोक सेवक है बादशाह नही इसकी औकात 11 सितंबर को बताया जाएगा।
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