बारहसिंघा मौत मामले में संदेह बरकरार,अपनी बयानबाजी से कटघरे में प्रबंधन,इधर करोड़ो के बजट को निपटाने में जुटा प्रबंधन

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उमरिया/मंडला (संवाद)। कान्हा नेशनल पार्क से 8 नग बारहसिंघा पुनर्स्थापन के तहत बांधवगढ़ टाईगर रिजर्व में लाये जा रहे थे।जिसके लिए बांधवगढ़ में तैयारियां पूर्ण कर ली गई थी। प्रबंधन के द्वारा कल शुक्रवार को 8 नग बारहसिंघा को लेने बांधवगढ़ के अधिकारी और कर्मचारी कान्हा नेशनल पार्क पहुंचे हुए जहां से उन्होंने वन्यप्राणियों को लाने वाले विशेष से 8 नग बारहसिंघा को लेकर दोपहर करीब 12 बजे रवाना हुए थे। जिससे यह उम्मीद जताई जा रही थी कि शाम 5 बजे तक बारहसिंघा बांधवगढ़ पहुंच जाएंगे।

70 किमी का सफर तय करने के बाद भी नही पहुंचे बारहसिंघा

जानकारी के मुताबिक शुक्रवार को कान्हा नेशनल पार्क से दोपहर 12 बजे बांधवगढ़ की टीम 8 नग बारहसिंघा रवाना हो गए थे।जिसकी जानकारी भी लगातार दी जा रही थी।जिसके बाद लगभग 3:30 बजे बारहसिंघा करीब 60 से 70 किमी तक का सफर तय कर निवास के पास पहुंच चुके थे। इसके बाद अचानक बारहसिंघा कहाँ लापता हो गए किसी को पता नही। जब शाम 5 बजे तक बारहसिंघा बांधवगढ़ नही पहुंचे तब मीडिया में हलचल मची और सभी लोंगो ने अपने अपने माध्यम से जिम्मेदारों से संपर्क साधना शुरू कर दिया।लोंगो को संदेह हुआ तब एक जानकारी सामने आई कि सभी बारहसिंघा की मौत हो चुकी हैं।इतना सब कुछ होने के बाद प्रबंधन पूरे मामले दबा देना चाहता है।

अलग अलग बयानबाजी से प्रबंधन के झूठ का पर्दाफाश

इस पूरे मामले में जिस तरह प्रबंधन की अलग अलग।बयानबाजी से जहां उनके झूट का पर्दाफाश हुआ है वहीं बारहसिंघा की मौत का मामला बांधवगढ़ प्रबंधन और कान्हा नेशनल पार्क से मिली जानकारी अलग अलग है।कुल मिलाकर दोनो का प्रयास है कि बारहसिंघा की मौतों को ऐसे ही उलझा दिया जाय जिससे असली वजह सामने ही ना आने पाये। कुछ मीडिया साथियो ने इस मामले की जानकारी कान्हा प्रबंधन लेनी चाही तो पहले उन्होंने यह कह दिया कि बांधवगढ़ से कोई टीम बारहसिंघा ले जाने हमारे यहां आई ही नही है।बाद में उन्हें फोटो दिखाए जाने पर वह अपने बयान से पलट गए।

एसडीओ सुधीर मिश्रा ने पार की झूठ की हद 

जानकारी के मुताबिक इनकी बयानबाजी की हद तो तब हो गई जब बांधवगढ़ के एसडीओ सुधीर मिश्रा का सफेद झूठ सामने आया। उन्होंने मीडिया के वाट्सअप ग्रुप लिखा कि वह और बांधवगढ़ की टीम बारहसिंघा कैप्चर,ट्रांसपोटेशन और ट्रायल रन का अभ्यास करने कान्हा पहुंचे हुए थे। जबकि इन्ही के द्वारा 8 नग बारहसिंघा बांधवगढ़ लाने एवं कान्हा से रवाना होने और शाम 5 बजे तक पहुंचने का दर्जनों मीडिया के लोंगो से ढिंढोरा पीटा गया था और बकायदे फोटो भी उपलब्ध कराई गई थी। बाद में इन्होंने वाट्सअप में अपनी ही बात से मुकर गए। ट्रायल रन वाली इनकी बात मान भी ली जाए तो फिर ट्रायल या अन्य गतिविधियां तो कान्हा में की जानी थी फिर यह 8 नग बारहसिंघा को लेकर 70 किलोमीटर दूर निवास की तरफ क्यो भाग रहे थे।

करोड़ो के बजट के चलते छिपाई गई बारहसिंघा की मौत

बांधवगढ़ में बारहसिंघा प्रोजेक्ट के जरिये इसमें खर्च होने वाले करोड़ो का बजट की लालच में प्रबंधन इनकी मौत को छिपा रहा है।बताया गया बारहसिंघा प्रोजेक्ट के तहत बारहसिंघा को पुनर्स्थापन करना है और यह प्रक्रिया लगभग 10 सालो तक जारी रहेगी।इसमें बारहसिंघा के रख रखाव खान पान सहित वह तमाम व्यस्थाओं के लिए कई करोड़ो का वारा न्यारा किया जाना है।वहीं बड़ा सवाल यह कि अगर प्रबंधन के द्वारा बारहसिंघो की हुई  मौत को सबके सामने ला देता तो यह प्रोजेक्ट यही रुक जाता और एनटीसीए बारहसिंघा पुनर्स्थापन योजना को हमेशा के लिए रोक लगा देता। यही एक प्रमुख कारण है कि इसी करोड़ो के बजट को वारा न्यारा करने बांधवगढ़ से लेकर कान्हा और राजधानी भोपाल तक के अधिकारियों के द्वारा बारहसिंघा की मौत को दबा दिया गया।

कमाई का जरिया बना बारहसिंघा प्रोजेक्ट

सूत्रों के मुताबिक बारहसिंघा प्रोजेक्ट बांधवगढ़ के अधिकारियों के लिये कमाई का जरिया बन गया है। लोगों का तो यहां तक कहना है कि इसमे करोड़ों रूपये का वारा-न्यारा हुआ है। बारहसिंघों को रखने के लिए मगधी के बहेरहा मे पचास हेक्टेयर जमीन पर बाड़ा तैयार किया गया है। इस निर्माण को लेकर वन विभाग के बड़े अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगे थे। सांथ ही इसकी गुणवत्ता और पूर्णता सवालों के घेरे मे है। कहा जाता है कि पनपथा बफर में नाइट सफारी प्रोजेक्ट को लेकर किये गए कार्य और बाद में एनटीसीए के रोक लगाने के बाद यहां का पुराना मटेरियल बारहसिंघा प्रोजेक्ट में लगाकर और  पूर्व मे बने बाड़े के एक हिस्से को नया बता कर लाखों रूपये की बंदरबांट की गई है।

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