बिलो के भुगतान के लिए आखिर सीईओ जिला पंचायत क्यों बना रहे दबाव.? एडीएम और सीईओ के बीच तनातनी

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उमरिया (संवाद)। जिले में बीते दिनों संपन्न हुई राष्ट्रीय शालेय फुटबॉल प्रतियोगिता के दौरान हुई गड़बड़ी और मनमानी के चलते अब उसके बिलों के भुगतान के लिए जिले के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच तनातनी की चर्चा आम हो रही है। साप्ताहिक समीक्षा बैठक के दौरान सीईओ जिला पंचायत के द्वारा बिलों के भुगतान को लेकर बात उठाई गई और बिल भुगतान करने का दबाव बनाया गया? जिस पर एडीएम के द्वारा आपत्ति दर्ज कराई गई, इस दौरान दोनों अधिकारियों के बीच तनातनी का माहौल निर्मित हो गया?

दरअसल राष्ट्रीय शालेय फुटबॉल प्रतियोगिता के दौरान आयोजक मंडल के द्वारा प्रतियोगिता में भारी गड़बड़ी और मनमानी की गई थी और यह पूरा मामला लगातार मीडिया में सुर्खियों में रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिले के कलेक्टर धरणेन्द्र कुमार जैन के द्वारा इसके लिए या बिलों के भुगतान के लिए एक सत्यापन समिति बनाई गई जिसकी अध्यक्षता जिले के अतिरिक्त कलेक्टर को सौंपी गई। अब प्रतियोगिता को संपन्न हुए महीने भर से ज्यादा का समय हो चुका है जिसके लिए अब बिल सबमिट कर भुगतान के लिए लगाया गया है।

लेकिन फुटबॉल प्रतियोगिता के आयोजक मंडल या इसके जिम्मेदार बिलों के भुगतान के लिए सत्यापन समिति से बगैर सत्यापन कराए ट्रेजरी को भेज दिया गया, इस बीच ट्रेजरी ने बिलों को यह कहकर वापस कर दिया कि सत्यापन समिति की रिपोर्ट इन बिलों में नहीं लगी है। ट्रेजरी के द्वारा बिलों को वापस करना जिला पंचायत के सीईओ अभय सिंह ओहरिया को बेहद नागवार गुजरा, इसके बाद सीईओ ने यह मामला साप्ताहिक समीक्षा बैठक (टीएल) में उठाया और जिला शिक्षा अधिकारी से पूछा कि बिलों का भुगतान क्यों नहीं हुआ, तब शिक्षा अधिकारी ने बताया कि सत्यापन समिति का सत्यापन नहीं होने के चलते ट्रेजरी ने बिलों को वापस कर दिया है।

इसके बाद सीईओ अभय सिंह ने सीधे एडीएम से बातचीत करने लगे और बिलों के भुगतान के लिए दबाव बनाने लगे, इस दौरान एडीएम के द्वारा भी नियमों का हवाला दिया गया। इस दौरान दोनों के बीच गर्मागर्मी और तनातनी साफ तौर पर देखी गई। लेकिन इन सबके बीच बड़ा सवाल यह कि जिले के कलेक्टर के द्वारा जब बिलों के भुगतान के लिए सत्यापन समिति बनाई गई थी तब आयोजक मंडल या जिम्मेदारों के द्वारा बिलों को समिति से सत्यापन क्यों नहीं कराया गया और बिलों को सीधे भुगतान के लिए ट्रेजरी को क्यों भेज दिया गया।

इसके अलावा जिला पंचायत के सीईओ के द्वारा बिलों के भुगतान के लिए दबाव बनाना कहीं ना कहीं फुटबॉल प्रतियोगिता में मिले बजट को मिली भगत करके बंदरबांट करना तो नहीं है.? या फिर प्रतियोगिता के दौरान हुई गड़बड़ियों और मनमानी को छिपाना तो नहीं है.? बहरहाल टीएल बैठक में दोनों बड़े अधिकारियों के बीच हुई गहमागहमी से जहां अन्य अधिकारियों के बीच चर्चा का माहौल है वहीं बिलों के भुगतान के लिए सीईओ की छटपटाहट देख यह बात भी स्पष्ट दिखाई देता है कि राष्ट्रीय फुटबॉल प्रतियोगिता के दौरान भारी गड़बड़ियां कर उसके बजट का बंदरबांट करना उद्देश्य रहा है.?

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