उमरिया (संवाद)। बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व के एसडीओ और उनकी टीम ने 12 गरीब आदिवासियों को पिहरी बीनने (तोड़ने) के चलते बहुत बड़ी बहादुरी का काम किया है। इस बहादुरी के लिए SDO गायकवाड़ को पुरुस्कृत किया जाना चाहिए।लेकिन बड़ा सवाल यह कि क्या यह गरीब आदिवासी लोग आदतन रहे है या सड़क से गुजरने वाले राहगीर जो सड़क किनारे पड़ी पिहरी को बीन या तोड़ लिए। वहीं विभाग के द्वारा मामले को मीडिया में प्रचारित कराकर अपनी पीठ थपथपाई जा रही है जैसे किसी बड़े शिकारी गिरोह को पकड़ा हो। विभाग की इस कार्यवाही से तमाम प्रकार के सवाल खड़े हो रहे है वहीं सोशल मीडिया में कार्यवाही के खिलाफ जमकर बयानबाजी की जा रही है।
दरअसल पकड़े गए गरीब आदिवासियों में 5 लोग उमरिया शहर के नजदीक बरतराई गांव के निवासी थे,4 लोग पोंडिया गांव,1 पलझा और 2 लोग पड़वार आदिवासी पड़वार गांव के निवासी रहे हैं। यह सभी लोग अलग-अलग थे। स्थानीय लोगों के द्वारा कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में बताया कि सिर्फ चार लोग पिहरी तोड़े रहे थे, बाकी के लोग अपने-अपने काम से सड़क मार्ग से जा रहे राहगीर थे। लेकिन विभाग के द्वारा 4 लोगों की जगह 12 गरीब आदिवासियों को आरोपी बनाया गया है।
जबकि यह वही गरीब आदिवासी लोग हैं जो बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की सीमा में मौजूद गांव के निवासी हैं। जो अक्सर जंगल और वन्य प्राणियों की रक्षा और देखभाल में विभाग का सहयोग भी करते हैं। एक और महत्वपूर्ण बात यह कि जंगलों के किनारे बसे गांव अक्सर अपने निस्तार और आजीविका के संसाधन के तौर पर पिहरी, महुआ आदि बिनते या तोड़ते हैं, शासन ने भी आदिवासियों के आजीविका के रूप में इसे माना है। फिर भी टाइगर रिजर्व होने के कारण यह क्षेत्र प्रतिबंधित है। लेकिन जो असली दोषी हो सिर्फ उन्हीं पर कार्यवाही की जानी चाहिए। ऐसे राह चलते लोगों को पकड़ कर परेशान करना और उनके खिलाफ कार्यवाही करना उचित नहीं माना जा सकता।
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इस कार्यवाही के खिलाफ भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष दिलीप पांडे और स्थानीय भाजपा नेता मौजीलाल चौधरी ने सोशल मीडिया में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह विभाग की तानाशाहीपूर्ण गरीब आदिवासियों के खिलाफ जबरिया करवाई है। उन्होंने बताया कि विभाग के द्वारा यह कार्यवाही द्वेषपूर्ण है जबकि बांधवगढ़ में अन्य कई अपराध भ्रष्टाचार अवैध उत्खनन या वन प्राणियों के शिकार जैसी घटनाएं सामने आती रहती हैं। तब विभाग को ना तो कोई भनक लगती हैं और ना ही वह कोई कार्यवाही की जाती है।
एक और महत्वपूर्ण बात यह कि जंगल में कोई शिकारी या संदिग्ध व्यक्ति किसी उद्देश्य से जाता है तो वह अपने साथ विभिन्न प्रकार के औजार जैसे बंदूक, फंदा या अन्य इससे जुड़े औजार भी साथ रखता है। लेकिन दुर्भाग्य की बात तो यह है कि बाँधवगढ़ की टीम के द्वारा पकड़े गए 12 गरीब आदिवासियों के पास किसी भी प्रकार का कोई औजार होना तो दूर उनके पास से डंडा भी नहीं पाया गया। इससे साफ जाहिर होता है कि यह लोग किसी भी अपराधिक गतिविधियों में नहीं थे।
बांधवगढ़ में आए दिन बाघ सहित अन्य वन्य प्राणियों की कहीं शिकार से तो कहीं असमय मौत हो रही है और जब उसकी लाश सड़ गल जाती है तब विभाग को पता चलता है। इसके बाद कार्यवाही के नाम पर सिर्फ लीपा पोती की जाती है। इसके अलावा भी इस कार्यवाही के खिलाफ कई अन्य लोगों ने सोशल मीडिया पर अपने कमेंट साझा किए हैं लेकिन सभी गरीब आदिवासियों के पर हुई कार्यवाही के खिलाफ मुखर हैं।
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