उमरिया। जिले में बीते महीने शासन की गाइडलाइन के विरुद्ध पूरे मनमानी तरीके से संपन्न कराई गई राष्ट्रीय शालेय फुटबॉल प्रतियोगिता के अनाप-शनाप बिलो के भुगतान को लेकर प्रशासनिक महकमें खींचतान मची हुई है। सूत्र बताते है कि बिलों के भुगतान को लेकर जहां जिला पंचायत के सीईओ और प्रतियोगिता के नोडल अधिकारी अभय सिंह ओहरिया छटपटा रहे हैं.? वहीं भुगतान के लिए कलेक्टर के द्वारा बनाई गई सत्यापन समिति के मुखिया अपर कलेक्टर के द्वारा प्रतियोगिता में उपयोग हुई तमाम प्रकार की सामग्री और अन्य प्रकार के भुगतान के लिए शासन के नियमों और भंडार क्रय का पालन नहीं करने के कारण बिलो का भुगतान नहीं करने का हवाला दे रहे हैं। जबकि पूर्व में इसी बिल को पास करने के लिए साप्ताहिक समीक्षा बैठक में सीईओ और अपर कलेक्टर के बीच काफी तनातनी और गर्मागर्मी की चर्चा सरेआम हो गई। इसके अलावा सूत्र यह भी बताते हैं कि अपर कलेक्टर के ऊपर बिलों का भुगतान करने के लिए तमाम प्रकार के दबाव बनाया जा रहा हैं.? लेकिन जब सीईओ अपने मंसूबे और हथकंडे पर सफल नहीं हो पाए तब उनके द्वारा अब एक नई साजिश की रचना की जा रही है.?
अपर कलेक्टर को समिति से बायकॉट करने की साजिश?
राष्ट्रीय फुटबॉल प्रतियोगिता के प्रारंभ से ही प्रतियोगिता में मनमानी नियम विरुद्ध और कमीशन खोरी की खबरें मीडिया में आने के बाद जिले के कलेक्टर धरणेन्द्र कुमार जैन प्रतियोगिता में उपयोग होने वाली सामग्री सहित अन्य तमाम प्रकार की सामानों के सत्यापन के लिए एक सत्यापन समिति का गठन किया था जिसके मुखिया अपर कलेक्टर प्रमोद कुमार सेन गुप्ता को बनाया गया। समिति गठन के बाद अपर कलेक्टर के द्वारा आयोजन कर्ताओ से शासन की नियमावली सहित सामग्री खरीदी या अन्य खर्चो की जानकारी मांगी जा रही थी लेकिन आयोजनकर्ताओं ने उपलब्ध नहीं कराया और ना ही सामग्री का सत्यापन कराया। इस कारण से जब बिलों के भुगतान के लिए फाइलें ट्रेजरी भेजी गई तब वहां से सत्यापन समिति की रिपोर्ट नही होने के कारण वापस कर दिया गया। लेकिन बिलों के भुगतान के लिए सीईओ जिला पंचायत छटपटा रहे हैं फिर चाहे वह नियम विरुद्ध हो या भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया हो.? सूत्र बताते हैं कि अब चुपचाप तरीके से सत्यापन समिति से अपर कलेक्टर को हटाकर बिलों के भुगतान करने की साजिश रची जा रही है.? हालांकि अपर कलेक्टर को समिति से हटाना या समिति को भंग करना इतना आसान नहीं है लेकिन इस बात की चर्चा दबी जुबान चल रही है।
एडीएम और सीईओ में हुई थी गर्मागर्मी
ट्रेजरी के द्वारा बिल वापस किए जाने का कारण पूछा गया तब यह बात सामने आई की कलेक्टर के द्वारा गठित सत्यापन समिति की रिपोर्ट सम्मिलित नहीं होने के कारण बिलों को वापस किया गया है। तब सीईओ जिला पंचायत ने कलेक्टर की भरी टीएल बैठक में अपर कलेक्टर के साथ तनातनी और गर्मागर्मी से बहस हो गई, इस बात की चर्चा बैठक के बाद पूरे सरकारी महकमें में आम हो गई.? इतने बड़े IAS अधिकारी और जिला पंचायत के सीईओ इस प्रतियोगिता के नोडल अधिकारी रहे हैं, बावजूद इसके पूरी प्रतियोगिता के दौरान मनमानी और शासन के नियमों की धज्जियां उड़ाई गई.?
भाजपा नेताओं ने लगाया प्रतियोगिता में मनमानी और भ्रस्टाचार का आरोप
राष्ट्रीय फुटबॉल प्रतियोगिता के दौरान शासन के नियमों को ताक में रखकर भारी मनमानी की गई यह बात किसी से छुपी नहीं है लगातार मीडिया के माध्यम से उजागर होता रहा है। अब इस मामले में सत्ताधारी दल भाजपा के वरिष्ठ नेता मिथिलेश पयासी और जिला उपाध्यक्ष राजेंद्र तिवारी ने सवाल खड़े किए हैं। उनका मानना है कि यह प्रतियोगिता अधिक से अधिक 10 लाख रुपए में संपन्न कराई जा सकती थी, लेकिन आयोजन कर्ताओं ने प्रतियोगिता में एक तो शासन और भंडार क्रय नियमों का पालन नही किया गया, वहीं शासन की राशि का बंदर बाँट करने के लिए अनाप-शनाप बिल प्रस्तुत किए गए हैं। भाजपा नेता ने कलेक्टर से लेकर मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय तक पत्र लिखकर प्रतियोगिता में मनमानी,शासन की राशि का दुरुपयोग और भ्रष्टाचार किए जाने का आरोप लगाया है। उन्होंने मांग की है कि पहले पूरे मामले की जांच हो, इसके बाद ही बिलों के भुगतान पर कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।
