MP (संवाद)। मध्य प्रदेश में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है जिसमें आदेश देने वाले एसडीएम के ही गले का फांस बन गया। आदेश में प्रयुक्त शब्दावली और अमर्यादित भाषा शैली से सियासी गलियारे में सवाल खड़े होने लगे। सोशल मीडिया में आदेश संबंधी पत्र वायरल होने के बाद कमिश्नर ने आदेश देने वाले एसडीएम को सस्पेंड कर दिया है।
दरअसल इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौत के मामले में विपक्षी दल कांग्रेस के द्वारा प्रदेश भर में विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया था, इसके चलते देवास जिले के एसडीएम आनंद मालवीय के द्वारा प्रदर्शन के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से तहसीलदार और कार्यपालिक मजिस्ट्रेट सहित री की ड्यूटी तैनात की गई थी।

लेकिन इस संबंध में जो आदेश पत्र जारी किया गया उसमें जो शब्दावली का प्रयोग किया गया वह अमर्यादित भाषा शैली और सत्ता पक्ष के विरोध में प्रतीत हो रही थी। इसके बाद एसडीएम का यह पत्र सोशल मीडिया में वायरल हो गया पत्र को पढ़ने के बाद सियासी गलियारी में भी चर्चा का विषय बना रहा यह पत्र जब जिले के कलेक्टर और उज्जैन संभाग के कमिश्नर के संज्ञान में आया तब उन्होंने पत्र जारी करने वाले एसडीएम आनंद मालवीय को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया।
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इस तरह एसडीएम का खुद का पत्र खुद की गले का पास बन गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए आशीष सिंह, संभाग आयुक्त उज्जैन ने एसडीएम आनंद मालवीय को तत्काल निलंबित कर दिया। इसी के साथ उनके रीडर अमित चौहान को भी निलंबन की कार्रवाई का सामना करना पड़ा। बताया गया कि रीडर के द्वारा लिखे पत्र को एसडीएम बगैर पड़े ही हस्ताक्षर कर दिए जो एक लापरवाही दर्शाता है।
