राष्ट्रीय शालेय फुटबॉल प्रतियोगिता पर लगातार उठ रहे सवाल,आयोजक विभाग संदेह के घेरे में

Editor in cheif
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उमरिया (संवाद)। 1 दिसंबर से आयोजित होने वाली राष्ट्रीय शालेय फुटबॉल चयन प्रतियोगिता (अंडर 14) के आयोजन में आयोजनकर्ता शिक्षा विभाग के ऊपर लगातार सवाल उठ रहे हैं और वह अब सवालों के घेरे में दिखाई दे रहा है। क्योंकि उनके पास आयोजन को लेकर इतनी अच्छी और पुख्ता व्यवस्था उपलब्ध नहीं होने के बावजूद राष्ट्रीय स्तर के आयोजन को लेकर वह किसी तरह निपटाने की सोची समझी रणनीति में जुटे हुए हैं।

दरअसल राष्ट्रीय स्तर के आयोजनों को लेकर आयोजनकर्ता विभाग को पहले तैयारी और खेल मैदान की उपलब्धता को लेकर संबंधित वरिष्ठ कार्यालय को अवगत कराया जाता है इसके अलावा अन्य तमाम व्यवस्थाओं के संबंध में भी जानकारी दी जाती है, तब जाकर संबंधित वरिष्ठ कार्यालय आयोजन की अनुमति देता है। लेकिन आयोजनकर्ता शिक्षा विभाग प्रदेश स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों को गलत और आधी अधूरी जानकारी देकर इस आयोजन को करने अनुमति प्राप्त कर लिए।

जिले में स्थित खेल मैदाने की बात करें तो आयोजन करता विभाग ने कृष्ण ताल खेल मैदान को भी आयोजन के लिए चिन्हित किया है जबकि कृष्ण ताल मैदान की वास्तविक स्थिति किसी से छिपी नहीं है। मैदान के आसपास के क्षेत्र में आए दिन गड्ढे या गोफ़ जैसी स्थिति निर्मित होते रहती है। ऐसे में इतने बड़े आयोजन के लिए यह मैदान कितना उचित होगा.? इसके अलावा एक दो खेल मैदान को छोड़ दे तो बाकी की स्थिति बेहतर नहीं कही जा सकती?

वहीं हाल ही में संपन्न हुई राज्य स्तरीय फुटबॉल प्रतियोगिता में आयोजनकर्ता शिक्षा विभाग के ऊपर गंभीर आरोप लगा चुके हैं। बाहर के जिलों से खेलने आई टीमों के खिलाड़ियों को ना तो बेहतर व्यवस्था दी जा सकी और ना ही बेहतर भोजन उपलब्ध कराया जा सका। इस दौरान विभाग की कारगुजारियां और खामियों की जानकारी जिले के वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर जिले वासियों तक को हुई थी। इस दौरान शिक्षा विभाग के द्वारा कांग्रेस पार्टी के जिला अध्यक्ष को मुख्य अतिथि बनाया गया जबकि आयोजन के फाइनल यानी समापन के दिन सत्ताधारी दल के किसी पदाधिकारी को अतिथि नहीं बनाया गया। यह सवाल भी सभी के लिए सोचनीय है।

बहरहाल अब होने जा रहे राष्ट्रीय फुटबॉल चयन प्रतियोगिता में आयोजनकर्ता शिक्षा विभाग क्या-क्या गुल खिलाएगा यह आने वाले समय में दिखाई देगा। लेकिन इस आयोजन के पीछे की मंशा जो जिले भर में चर्चा का विषय बनी हुई है वह यह कि इस आयोजन के नाम से मिलने वाले लाखों के बजट को वारा न्यारा करने की एक रणनीति मानी जा रही है?

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