MP (संवाद)। नगरीय निकाय में होने वाले अध्यक्ष का चुनाव अब सीधे प्रत्यक्ष रूप से जनता के द्वारा किया जाएगा। यह फैसला मध्य प्रदेश सरकार के मुखिया डॉक्टर मोहन यादव के द्वारा अध्यादेश के माध्यम से तैयारी की जा रही है। इसके पहले कमलनाथ की सरकार ने नगर पालिका और नगर परिषदों में इसे अप्रत्यक्ष रूप यानी पार्षदों के द्वारा चुने जाने के फैसले को पलट दिया है।
साल 2018 में मौजूदा कमलनाथ की सरकार ने नगर पालिका और नगर परिषदों में अध्यक्ष का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से यानी पार्षदों के द्वारा चुने जाने का फैसला किया था। लेकिन अब मौजूद डॉक्टर मोहन यादव की सरकार ने इस फैसले को पलटने का फैसला लिया है। सरकार अध्यादेश लाकर इस फैसले को पलट कर आने वाले समय में नगरीय निकाय के अध्यक्षों का चुनाव प्रत्यक्ष रूप यानी सीधे जनता के द्वारा चुने जाने का निर्णय लिया है।
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बताया गया कि अप्रत्यक्ष रूप से यानी पार्षदों के द्वारा अध्यक्ष का चुनाव कराने से पार्षदों की खरीद फरोख्त और इसमें धनबल का उपयोग जमकर होता रहा है। इसे रोकने के लिए ही डॉक्टर मोहन यादव की सरकार ने अब अध्यक्षों का चुनाव प्रत्यक्ष रूप यानी सीधे जनता के द्वारा चुनाव किए जाने का फैसला ली है। हालांकि इसके पहले भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में भी प्रत्यक्ष रूप से चुनाव होते रहे हैं। लेकिन 2018 में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने नगरीय निकाय के अध्यक्षों का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से करने का फैसला कर दिया। जिसे डॉक्टर मोहन यादव की सरकार ने पलट दिया है।
वहीं नगर पालिका नगर परिषदों के अध्यक्षों के अविश्वास प्रस्ताव की अवधि भी बढ़ने का निर्णय लिया है। इसकी न्यूनतम अवधि 3 साल से बढ़कर 4 साल कर दी गई है। इसका सीधा मतलब यह की अब अध्यक्ष के खिलाफ 4 साल से पहले अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकेगा।
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