रीवा/सतना (संवाद)। मध्य प्रदेश के रीवा और सतना जिले में नायब तहसीलदार राजस्व निरीक्षक और पटवारी अलग-अलग मामलों में अलग-अलग रिश्वत ली है। तीनों अधिकारियों को लोकायुक्त की टीम ने रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है और तीनों के खिलाफ मध्य प्रदेश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्यवाही की है।
पहला मामला सतना जिले से सामने आया है जहां
गुरुवार को रीवा लोकायुक्त की टीम ने रामपुर बाघेलान तहसील में पदस्थ नायब तहसीलदार वीरेन्द्र सिंह जायसूर को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों पकड़ा है। तहसील कार्यालय में बैठकर नायब तहसीलदार वीरेंद्र सिंह के द्वारा खैरा के रहने वाले आशुतोष सिंह से रिश्वत मांगी जा रही थी। जिसकी शिकायत आशुतोष सिंह ने लोकायुक्त कार्यालय रीवा में दर्ज कराई थी।
फरियादी आशुतोष सिंह ने शिकायत में बताया था कि उसके पिता चंद्रशेखर सिंह के नाम दर्ज पुस्तैनी भूमि के बंटवारे एवं नामांतरण आदेश के एवज में रामपुर बाघेलान जिला सतना में पदस्थ नायब तहसीलदार वीरेंद्र सिंह जायसूर द्वारा 20 हजार रुपए रिश्वत की मांग कर रहे हैं। शिकायत प्राप्त होने पर सत्यापन कराया गया, जिसमें आरोपी द्वारा रिश्वत की मांग किए जाने की पुष्टि हुई तथा सत्यापन के दौरान शिकायतकर्ता से 10 हजार रुपए नायब तहसीलदार ने ले भी लिए। इसके बाद 18 दिसंबर को गठित टीम ने तहसील कार्यालय रामपुर बाघेलान में कार्रवाई करते हुए आरोपी नायब तहसीलदार वीरेंद्र सिंह जायसूर को 10 हजार रुपए रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों ट्रैप कर लिया।
दूसरा मामला रीवा जिले के शाहपुर सर्किल के राजस्व निरीक्षक रामविश्वास कोल को रीवा लोकायुक्त की टीम ने 3 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा है। रिश्वतखोर राजस्व निरीक्षक रामविश्वास कोल के खिलाफ बीड़ा (सेमरिया) गांव के रहने वाले आवेदक आवेदक इन्द्रमणि प्रसाद शुक्ला ने 16 दिसंबर को रीवा लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया था कि उन्होंने अपनी भूमि के सीमांकन के लिए तहसील सेमरिया में आवेदन किया था। इस संबंध में जब वे सर्किल शाहपुर के राजस्व निरीक्षक रामविश्वास कोल से मिले, तो सीमांकन कार्य करने के एवज में उनसे 5 हजार रुपये रिश्वत की मांग की गई।
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आवेदक इंद्रमणि प्रसाद शुक्ला ने बताया कि सीमांकन निरस्त होने के डर से उसने चार दिन पहले 2 हजार रुपए राजस्व निरीक्षक रामविश्वास कोल को दिए थे। इसके बाद 3 हजार और रुपए की मांग की गई। लोकायुक्त टीम ने शिकायत की जांच की और शिकायत सही पाए जाने पर जाल बिछाकर रिश्वत की रकम देकर आवेदक को रिश्वतखोर राजस्व निरीक्षक के पास भेजा। ग्राम बरौं में मोतीलाल साकेत के घर के सामने राजस्व निरीक्षक रामविश्वास कोल ने जैसे ही आवेदक से रिश्वत के रूपये लिए तो लोकायुक्त की टीम ने उसे रंगेहाथों धरदबोचा। आरोपी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन अधिनियम 2018) की धारा 7 के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। ट्रैप कार्रवाई का नेतृत्व निरीक्षक एसराम मरावी ने किया।
तीसरा मामला भी रीवा जिले के रायपुर कर्चुलियान तहसील अंतर्गत मनिकवार में लोकायुक्त पुलिस ने पटवारी अच्छेलाल साकेत को 5 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों ट्रैप किया है। यह रिश्वत मनिकवार निवासी विपिन सोंधिया(29) से भूमि का नामांतरण करने के बदले ली थी। लोकायुक्त पुलिस ने देर रात तक आरोपी को अपने कब्जे में रखा और लंबी पूछताछ की गई। इस मामले की शिकायत 17 दिसंबर को लोकायुक्त कार्यालय रीवा में दर्ज कराई गई थी। जिसमें फरियादी विपिन सोंधिया ने बताया था कि उसकी जमीन के नामांतरण के बदले पटवारी अच्छेलाल साकेत ने उससे 10 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी।
फरियादी विपिन सोंधिया के मुताबिक वो रिश्वत की पहली किस्त के तौर पर 5 हजार रुपये पटवारी अच्छेलाल साकेत को दे चुका है। बाकी 5 हजार रुपये के लिए पटवारी उस पर दबाव बना रहा है और उसका काम रोक रखा है। लोकायुक्त टीम ने शिकायत की जांच की और शिकायत सही पाए जाने पर रिश्वत के पांच हजार रुपये लेकर फरियादी को रिश्वतखोर पटवारी के पास भेजा। पटवारी अच्छेलाल साकेत ने ही रिश्वत की रकम ली तो सादे कपडों में मौजूद लोकायुक्त की टीम ने उसे रंगेहाथों धरदबोचा।