मध्यप्रदेश में गुरुवार को अलग-अलग जिलों में तीन अधिकारियों को रिश्वतखोरी के मामले में रिश्वत लेते रंगे हाथ लोकायुक्त की टीम ने पकड़ा था। उन सभी के खिलाफ लोकायुक्त ने मध्य प्रदेश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्यवाही की है। लेकिन उसके दूसरे ही दिन यानी शुक्रवार को दो और सरकारी कर्मचारी को लोकायुक्त ने रिश्वत मामले में गिरफ्तार किया।
पहला मामला सिवनी जिले से सामने आया है जहां लोकराट की टीम ने बड़ी कार्यवाही को अंजाम दिया है जिसमें लोकायुक्त ने वेयरहाउस के शाखा प्रबंधक को 15000 की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा है। शाखा प्रबंधक ने मुकेश परमार ने आवेदक से धान खरीदी केंद्र बनाने की बदले में ₹25000 की रिश्वत मांगी थी। जिसकी शिकायत आवेदक मुकेश जैन लोकायुक्त से कर दी। मामले में लोकायुक्त की टीम ने वेयरहाउस शाखा प्रबंधक मुकेश परमार को 15000 की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
दूसरा मामला अलीराजपुर जिले से सामने आया है जहां उमराली चौकी में पदस्थ प्रधान आरक्षक मनोहर जाटव के द्वारा FIR बंद करने के बदले फरियादी से 5000 की रिश्वत ली है। पैसे की लेनदेन का एक वीडियो भी सोशल मीडिया में वायरल हुआ जिसके आधार पर जिले के पुलिस अधीक्षक ने प्रधान आरक्षक मनोहर जाटव को सस्पेंड कर दिया है।
दरअसल फरियादी ने एक युवक की गुमशुदगी की रिपोर्ट पुलिस चौकी में दर्ज कराई थी, इसके दो से तीन दिन के भीतर ही युवक अपने घर वापस लौट आया, जिसकी जानकारी पुलिस को दी गई थी। लेकिन गुमशुदगी की एफआईआर बंद करने के बदले प्रधान आरक्षक ने फरियादी से रिश्वत की मांग की। फरियादी ने प्रधान आरक्षक को 5000 की रिश्वत दी तभी किसी ने इस लेनदेन का वीडियो अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया जिसे सोशल मीडिया में वायरल किया गया है वीडियो का संज्ञान जिले के पुलिस अधीक्षक के द्वारा लेते हुए प्रधान आरक्षक मनोहर जाटव को सस्पेंड कर दिया है।