कटनी (संवाद)। जिले में कहने को तो रेत उत्खनन करने का रेत ठेका कंपनी धनलक्ष्मी प्राइवेट लिमिटेड का अनुबंध समाप्त हो गया है लेकिन जिले भर की तमाम नदियों में कंपनी के गुर्गों के द्वारा रेत का अवैध उत्खनन जारी है। यही वजह है कि ठेका कंपनी के द्वारा बगैर अनुबंध किये रेत निकासी कर शासन को करोड़ों रुपए की रॉयल्टी की शपथ लग रहा है।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक रेट ठेका कंपनी धनलक्ष्मी प्राइवेट लिमिटेड के द्वारा मध्य प्रदेश शासन खनिज विभाग को रॉयल्टी के करोड़ों रुपए चूना लगाने की एक साजिश रची है। जिसमें यह कि ठेका कंपनी के द्वारा जिले में रेत उत्खनन के लिए अनुबंध नहीं करने और रेत का उत्खनन अवैध रूप से करने का काम किया जा रहा है, जिससे सीधा और पूरा फायदा ठेका कंपनी को पहुंच रहा है। वहीं रॉयल्टी के माध्यम से शासन को मिलने वाली करोड़ की रॉयल्टी का चूना लगाया जा रहा है।
जिले के बरही,विजयराघवगढ़ और बड़वारा क्षेत्र में रेत खनन को लेकर नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। ठेका समाप्त होने के बावजूद महा नदी से अवैध रूप से रेत का उत्खनन जारी है। ट्रैक्टर-ट्रॉली के माध्यम से बसाड़ी क्षेत्र से लगातार रेत निकाले जाने की जानकारी सामने आ रही है।
सूत्रों के मुताबिक महानदी उमड़ार और पिपही के जाजागढ़ में अवैध रेत खनन पर लगाम नहीं लग पा रही है। यहां से निरंतर अवैध रेत का उत्खनन और निकासी जारी है। सूत्र बताते हैं कि इसमें खनिज विभाग के अमले की भी कहीं ना कहीं मिली भगत दिखाई दे रही है। हैरानी की बात यह है कि जब कटनी जिले में रेत का ठेका पूरी तरह समाप्त हो चुका है और अभी तक नई टेंडर प्रक्रिया भी शुरू नहीं हुई है, तब रेत खनन कैसे और किसके आदेश पर जारी है यह बड़ा सवाल बना हुआ है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अवैध खनन खुलेआम हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे हुए हैं। ऐसे में यह आशंका भी जताई जा रही है कि कहीं इस अवैध खनन में खनिज विभाग की मौन सहमति तो नहीं है। फिलहाल यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो इससे न केवल शासन को करोड़ों रुपए की रॉयल्टी का नुकसान होगा,बल्कि महानदी सहित अन्य नदियों के पर्यावरण पर भी गंभीर असर पड़ेगा।