उमरिया। जिले में खनिज विभाग सोया हुआ है रेत ठेका कंपनी महाकाल मिनरल के गुंडे और जिम्मेदार अफसरों की मिलीभगत से हर नदी नालों में रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन जारी है बता दें बीते जून माह से पर्यावरणीय नियमों के मुताबिक निर्धारित रेत खदान से अक्टूबर माह तक के रेत उत्खनन कार्य बंद कर दिया गया है लेकिन कंपनी के गुर्गे और खनिज विभाग पुलिस की मदद से नदी नालों से अवैध रूप से रेत का उत्खनन जारी है।
सघन वनों और हरियाली से परिपूर्ण उमरिया जिले की जैव विविधता को नष्ट और भ्रष्ट करने में पूरा तंत्र काम कर रहा है,जिला मुख्यालय से लेकर मानपुर चंदिया नौरोजाबाद और पाली में पुलिस और खनिज विभाग की शह पर रेत का अवैध उत्खनन किया जा रहा है।
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जिम्मेदार खनिज विभाग माफियाओं के इशारे पर कठपुतली की तरह नाच रहा है,जिले में कार्यरत रेत ठेका कंपनी महाकाल मिनरल ने रेत आपूर्ति के एकाधिकार हासिल कर ऐसी बिसात बिछाई है जिससे जिले का नागरिक अब कटनी और शहडोल से महंगे और ऊंचे दामों में रेत खरीदने को मजबूर हो रहा है,जून माह के पूर्व किए गए रेत के अवैध स्टॉक को महाकाल मिनरल के द्वारा जानबूझकर रेत की कालाबाजारी और नागरिकों को परेशान करने की नीयत से स्टॉक की रेत नहीं बेची जा रही है अब खबर है कि जिले के चंदिया थाना क्षेत्र अंतर्गत रेत के अवैध भंडारण बांका से पहले रेत की बिक्री का प्लान बनाया जा रहा है।
उमरिया जिले में महाकाल मिनरल के द्वारा पांच स्थानों पर लाखों क्यूबिक मीटर रेत का अवैध स्टॉक किया गया है जिले में बांका,धनवाही, गोवर्दे,बाल्हौंड और बढ़छड़ में भंडारित रेत में सीधे तौर पर नियमों की अनदेखी की गई है।
भंडारित रेत अवैध बताई जा रही है सूत्रों की माने तो यहां रेत भंडारण के लिए आवश्यक मापदंडों को कंपनी के द्वारा पूरा नहीं किया गया है साथ ही क्षमता से कई गुना ज्यादा रेत का भंडारण किया गया है इसके अलावा स्थल चयन में भी खनिज विभाग के मिलीभगत कर नियमों को अनदेखा किया गया है,इसके अलावा रेत स्टॉक के चारों ओर पर्यावरणीय नियमों के मुताबिक आवश्यक बाउंड्री और हरे पर्दे भी नहीं लगाए गए हैं
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बांका स्थित रेत स्टॉक में नियमों की अनदेखी तो की ही गई है इसके अलावा शासन की करोड़ो रुपए की रॉयल्टी का भी गबन किया गया है अब या तो खनिज विभाग इसमें शामिल है या उसको कोई खबर नहीं है।