उमरिया (संवाद)। उमरिया नगर का रहने वाले एक सेठ के द्वारा शासन को करोड़ों रुपए की चूना लगाने और अपना स्वार्थ सिद्ध करने के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज मौका पंचनामा में कूटरचना कराने का षड्यंत्र किया है। पूरा मामला चपहा कालोनी स्थित विनायक टाउन के बगल में स्थित आराजी खसरा नंबरों का पहले मुआवजा नगर पालिका बताकर लिया गया और अब टाउन इन क़ट्री प्लान के तहत सरकारी टैक्स कम देना पड़े इसलिए उसमें अपने चहेते साहब से सेटिंग करते हुए ग्रामीण लिखा दिया।
इसके लिए राजस्व की एक टीम के द्वारा मौका पंचनामा बनाया गया जिसमें भूमि स्वामी के द्वारा एक अन्य पटवारी विपिन मिश्रा के साथ मिली भगत कर षडयंत्र पूर्वक एरो बनाकर ग्रामीण शब्द जुड़वा दिया गया। जबकि उमरिया खास हलके के पटवारी के द्वारा ग्रामीण शब्द नहीं लिखा गया और ना ही इसके बारे में उन्हें कोई जानकारी है। भूमि स्वामी रोमेश गुप्ता की भूमि चपहा के विनायक टाउन के बगल में स्थित आराजी खसरा नंबर के तमाम नंबरों का रमेश गुप्ता ने 3.75 करोड़ मुआवजा लिया और अब उसी भूमि को ग्रामीण बताया जा रहा है। जिसको लेकर पूरे प्राशासनिक गलियारे में उथल पुथल मची हुई है।
हल्का पटवारी ने किया खुलासा
मामले की जानकारी जब सोसल मीडिया में सामने आई तो जिस पटवारी और आरआई सहित अन्य सरकारी लोगों ने पंचनामा बनाया तो उन्होंने बांधवगढ़ तहसीलदार और बांधवगढ़ एसडीएम को लिखित में अपना अभिमत दिया है कि मेरे द्वारा जो भी पंचनामा बनाया गया है, उसमें मेरे द्वारा कहीं पर भी ग्रामीण शब्द का उपयोग नहीं किया गया, इसके अलावा उन्होंने यह भी बताया कि हम यह बताने के लिए भी अधिकृत नहीं है कि वह भूमि नगर पालिका में है या फिर ग्रामीण में, जबकि उक्त भूमि एक आबादी क्षेत्र से जुड़ी है। टीम के द्वारा इस साफ सुथरे कागजी लिखावट के बाद भी ऐरो लगाकर ग्रामीण लिखा जाना कहीं न कहीं कूटरचना की ओर इशारा कर रहा है।
चपहा कोल माइंस स्थित विनायक टाउन कालोनी के बगल की यह भूमि के मालिक कहे जाने वाले एक बड़े व्यापारी रोमेश गुप्ता ने पहले राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारियों को इसी प्रकार भ्रमित कर और सांठगांठ करके पहले 3.75 करोड़ का मुआवजा लिया बाकी बचा 75 लाख रुपए के मुआवजे के लिए कलेक्टर कोर्ट और अन्य कोर्ट में प्रकरण विचाराधीन है। लेकिन अब उसी भूमि के खसरों को ग्रामीण आबादी के नजदीक बताकर भूमि को ग्रामीण क्षेत्र दर्शाया जा रहा है, जबकि उक्त भूमियों के नजदीक कोई भी ग्रामीण आबादी नहीं है,बल्कि वहां से लगभग 2 किलोमीटर दूर ग्रामीण आबादी बसी हुई है।
पूरे मामले की शिकायत के बाद एसडीएम बांधवगढ़ के द्वारा एक टीम गठित कर मामले की जांच करने के लिए तीन दिन का समय निर्धारित किया है। अब बड़ा सवाल यह है कि हलके के पटवारी के द्वारा लिखित में मौका पंचनामा की असलियत का खुलासा कर दिया है वहीं मौका पंचनामा में किया गया षडयंत्र पूर्वक कूटरचना के दोषियों के खिलाफ एसडीएम क्या कार्यवाही करते हैं.?