उमरिया (संवाद)। जिले में आयोजित राष्ट्रीय शालेय फुटबॉल प्रतियोगिता के शुभारंभ होने से पहले से ही आयोजक मंडल सवालों के घेरे में रहा है। दरअसल प्रतियोगिता के नोडल अधिकारी से लेकर संबंधित शिक्षा विभाग के अधिकारी- कर्मचारी की कार्यशैली के चलते यह स्थिति निर्मित हुई है।चूंकि इनके पास आयोजन को लेकर ना तो कोई अच्छी रूपरेखा रही है और ना ही बेहतर मैनेजमेंट दिखाई दे रहा है।
राष्ट्रीय फुटबॉल प्रतियोगिता में हिस्सा लेने देशभर के अलग-अलग राज्यों की टीम यहां पर पहुंची हुई है। जिनकी लोढ़ा स्थित क्रीड़ा परिसर में ठहरने की व्यवस्था कराई गई है। खिलाड़ियों को यहां पर सुबह का नाश्ता, दोपहर का खाना और रात का खाना भी मेस के माध्यम से आयोजन समिति उपलब्ध करा रही है। लेकिन मेस के द्वारा जो खाद्य सामग्री का उपयोग किया जा रहा है वह घटिया क्वालिटी यानी निम्न स्तर का बताया गया है। सोमवार को स्वास्थ्य विभाग में पदस्थ फ़ूड अधिकारी के द्वारा निरीक्षण के दौरान यह बात सामने आई है। फ़ूड अधिकारी ने मेस संचालक को उपलब्ध खाद्य सामग्री के रूप में नमक, तेल, सूजी, मूंगफली सहित अन्य सामग्री को वहां से तत्काल हटाने और अच्छी क्वालिटी की सामग्री उपयोग करने के निर्देश दिए है।
राष्ट्रीय फुटबॉल प्रतियोगिता में देशभर के अलग-अलग प्रदेशों से आई टीमों के खिलाड़ियों को 1 दिसंबर से 6 दिसंबर यानी 6 दिन तक लगभग 700 खिलाड़ियों को भोजन सहित तमाम व्यवस्थाएं उपलब्ध कराना है। देखा जाए तो सिर्फ भोजन व्यवस्था भर में करीब 15 लाख रुपए से ज्यादा का व्यय होना है। ऐसे में आयोजक मंडल के द्वारा भोजन व्यवस्था के लिए बगैर टेंडर जबलपुर से मेस को बुलाया है। जबकि शासन के नियमानुसार एक लाख से ज्यादा के कार्यो में बगैर टेंडर के कार्य नहीं कराये जा सकते। लेकिन इनके द्वारा ना तो टेंडर के लिए समाचार पत्रों में कोई निविदा निकाली गई और ना ही इनके द्वारा इसे लेकर कोई उचित प्रक्रिया अपनाई गई। जबकि समाचार पत्रों में भोजन व्यवस्था के लिए निविदा निकाली जाती तो, स्थानीय स्तर पर भी लोग इस कार्य के लिए आगे आते। जिससे स्थानीय लोगों को भी रोजगार उपलब्ध हो सकता था। इसके अलावा टेंडर में उपयोग की जाने वाली सामग्री और ब्रांड का भी जिक्र होता जिससे किसी तरीके की घटिया सामग्री का उपयोग नहीं हो पाता।
मिली जानकारी के मुताबिक आयोजक मंडल ने जिस मेस को जबलपुर से बुलाया है वह इसके पहले भी खेलों के आयोजन में भोजन व्यवस्था के लिए यहां पर आता रहा है। मतलब साफ है कि हर बार एक ही व्यक्ति (मेस) को काम देना कहीं ना कहीं आयोजक मंडल और इसके जिम्मेदारों पर निष्पक्षता पर बड़े सवाल खड़ा करता है। हालांकि खेल प्रतियोगिताओं में खाने की व्यवस्था यानी मेस की उपलब्धता के लिए शिक्षा विभाग टेंडर निकालता है या नहीं.? लेकिन इतना जरूर सर्व विदित है कि शासन के नियम यही रहे हैं कि एक लाख से ज्यादा के किसी भी तरह के कार्य को बिना टेंडर के नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी आरएस मरावी से बात की गई तो उन्होंने इस संबंध में बगैर कोई जानकारी दिए कहा कि मुझे कुछ नहीं मालुम आप सलीम से बात कर लो।
अब बड़ा सवाल यह उठता है कि राष्ट्रीय शालेय फुटबॉल प्रतियोगिता के नोडल अधिकारी अभय जिला पंचायत के सीईओ अभय सिंह ओहरिया बनाए गए हैं। बावजूद इसके पूरे आयोजन में जिस तरीके की अव्यवस्था, भोजन व्यवस्था में गड़बड़ियां और नियम विरुद्ध तरीके की गतिविधियां होना कहीं ना कहीं इनकी भी कार्य प्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान है। बहरहाल एक छोटे से जिले उमरिया में इतने बड़े आयोजन पर जहां गर्व हो रहा है, वहीं यह भी डर सता रहा है कि आयोजक मंडल के निजी स्वार्थ के चलते आयोजन में हो रही गड़बड़ियों से देशभर से आए खिलाड़ी कहीं यहां की अव्यवस्था देखकर उमरिया की बदनामी करके ना चले जाएं। इसके पहले भी राज्य स्तरीय फुटबॉल प्रतियोगिता के दौरान बाहर से आए खिलाड़ियों ने चीख चीख कर यह आरोप लगाया था कि समय पर भोजन नहीं मिलने से उन्हें भूखा रहना पड़ा।