नगर के एक सेठ ने मौका पंचनामा में कर दिया खेला.? शहरी क्षेत्र की भूमि को कराया ग्रामीण,शासन को करोड़ों का चूना लगाने रचा गया षड्यंत्र

Editor in cheif
4 Min Read

उमरिया (संवाद)। जिले में शासन को करोड़ों रुपए का चूना लगाने के लिए एक उमरिया नगर के एक सेठ के द्वारा इस बार एक अलग तरीके का षड्यंत्र रचा जा रहा है,जिसमें शहरी क्षेत्र की भूमि को ग्रामीण भूमि दर्शाकर नगर तथा ग्राम निवेश विभाग में लैंडयूज परिवर्तन में करोड़ों रुपए का स्टांप शुल्क बचाना है। जबकि यह भूमि शहरी क्षेत्र से लगी है और उमरिया नगर पालिका क्षेत्र में आती है। इस मामले में कलेक्टर के समक्ष एक शिकायती पत्र भी दिया गया है जिसमें बिंदुवार आपत्तियां दर्ज कर जांच की मांग की गई है।

मिली जानकारी के मुताबिक पटवारी हल्का उमरिया खास, खसरा क्रमांक 726, 722 और 723 नंबर की भूमि को आधार बनाकर पटवारी हल्का उमरिया खास में स्थित खसरा नंबर 727/2/2,728/2/1,728/3/1,728//2/1,728/4,729/1,729/2/1,729/2/2/1,733,735,737,738.738,740 और 724 के रकवे को तहसीलदार बांधवगढ़ के द्वारा ग्रामीण आबादी की पुष्टि की गई है,जबकि यहां पर कोई ग्रामीण आबादी नहीं है। सिर्फ दो से तीन मकान बने हैं जो नगर पालिका क्षेत्र यानी शहरी क्षेत्र में आते हैं। वहीं जो मौका पंचनामा तहसीलदार के समक्ष पेश किया गया है उसमें भी षड्यंत्र साफ तौर पर दिखाई देता है। वह यह कि पंचनामा में अलग से ओवरराइटिंग कर ग्रामीण शब्द लिखा गया है जो पूरी तरीके से त्रुटिपूर्ण दिखाई देता है। इसके अलावा पंचनामा में हस्ताक्षर करने वाले लोग भी संदेह के घेरे में है क्योंकि वे लोग वहां आसपास के ना तो निवासी है और ना ही उन्हें इस संबंध में कोई विशेष जानकारी है।

वहीं यह भी सर्वविदित है कि पूर्व के समय में राष्ट्रीय राजमार्ग 43 निर्माण के लिए इन्हीं सेठ के स्वामित्व की भूमि पटवारी हल्का उमरिया खास खसरा क्रमांक 727/2/2 अधिग्रहित की गई थी तब इस भूमि को खलेसर में दर्शाया गया था जो नगर पालिका के शहरी क्षेत्र में आता है। वहीं जिस नंबर की जमीन को ग्रामीण क्षेत्र में कराने में जुटे हैं वह जमीन इसी खसरे से सटी हुई है। इतना ही नहीं सेठ और उनके परिवार के लोग राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिग्रहण में जिन खसरा नंबर की भूमि को नगर पालिका क्षेत्र में दर्शाकर करोड़ों का मुआवजा प्राप्त किया था,उन खसरा नंबरों को भी अब वह ग्रामीण क्षेत्र में कराने में जुटे हैं। इस तरीके से सेठ के द्वारा उक्त भूमियो का नगर और ग्राम निवेश में लैंडयूज परिवर्तन में लगने वाले करोड़ों का स्टाम्प शुल्क बचाया जाने का षड्यंत्र है। इतना ही नहीं सेठ के द्वारा दस्तावेजों में कूटरचित रचनाकार शासन को करोड़ों रुपए की चपत लगाने की फिराक में है।

बहरहाल इस पूरे मामले की शिकायत जिले के कलेक्टर से की गई है कलेक्टर के द्वारा जांच कराने के दौरान दस्तावेजों में किए गए कूटरचित रचना और गड़बड़ियां सामने आ सकती है। इस संबंध में जब हल्का के पटवारी से जानकारी चाही गई और मौका पंचनामा में ओवरराइटिंग या गड़बड़ी करते हुए ग्रामीण शब्द अलग से जोड़ा गया है तब पटवारी के द्वारा कहा गया कि उसे इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है और उसने ऐसा कुछ भी नहीं किया है। हालांकि पटवारी के द्वारा यह भी कहा गया कि वह जो भी जानकारी है वह मोबाइल फोन पर नहीं दे सकता, इस संबंध में जो भी त्रुटि हुई है वह वरिष्ठ अधिकारियों को ज्ञात है।

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *