मध्य प्रदेश में गुरुवार का दिन रिश्वतखोरों का दिन माना जा रहा है। जिसमें एक दो नहीं बल्कि अलग-अलग जिलों में तीन अफ़सर रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार हुई है। मध्य प्रदेश में एक दिन में तीन रिश्वतखोरों को पकड़ने का रिकॉर्ड कायम हो गया है जिसे लोकायुक्त की बड़ी कार्यवाही के रूप में देखा जा रहा है।
पहली कार्यवाही मध्य प्रदेश के रतलाम जिले की सैलाना तहसील के सकरावदा गांव के रहने वाले विजय सिंह राठौर ने 26 अगस्त को उज्जैन लोकायुक्त कार्यालय में कृषि विस्तार अधिकारी मगन लाल मेड़ा के खिलाफ रिश्वत मांगने की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आवेदक विजय सिंह ने बताया कि उसे गांव में कीटनाशक व खाद-बीज की दुकान खोलना है। जिसके लाइसेंस के लिए उसने एप्लाई किया था। लाइसेंस बनने का मैसेज उसे जुलाई महीने में मैसेज पर मिल गया था लेकिन जब वो लाइसेंस की कॉपी लेने के लिए कृषि विस्तार अधिकारी मगन लाल के पास गया तो उन्होंने तीनों लाइसेंस की कॉपी देने के एवज में 30 हजार रूपये रिश्वत की मांग की।
इसके बाद दूसरी कार्यवाही नर्मदापुरम जिले के लोक निर्माण विभाग यानी पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण यंत्री कार्यालय में लोकायुक्त ने रिश्वत लेते हुए बाबू को गिरफ्तार कर लिया है। फरियादी ठेकेदार अवधेश कुमार पटेल ने ठेकेदार से एफडी और जमा राशि 3.46 लाख रुपए रिलीज कराने के एवज में 12 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी। इसकी शिकायत ठेकेदार ने लोकायुक्त से कर दी।
गुरुवार की दोपहर लोकायुक्त की टीम ने पीडब्लयूडी कार्यालय स्थित संभागीय लेखा कक्ष में दबिश दी। जैसे ही क्लर्क ने 7 हजार रुपए रिश्वत ली, लोकायुक्त ने तुरंत ही रंगे हाथों पकड़ लिया। दफ्तर में कई दूसरे दस्तावेजों की जांच भी की जा रही है। क्लर्क के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है।
इसी तरह तीसरा मामला झाबुआ जिले से सामने आया है। यहां पर रोजगार सहायक ने जन्म प्रमाण बनवाने की एवज में रिश्वत ली थी। फरियादी कमल सिंह निंगवाल ने बताया कि वह ग्राम डिग्गी का निवासी है। उसे अपने 7 वर्षीय बेटे पवन सिंह का जन्म प्रमाण पत्र बनवाना था। इसके लिए रोजगार सहायक दिनेश कुमार के पास पहुंचा। जहां पर उसने जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए 1600 सौ रुपए की रिश्वत मांगी। जिसके बाद फरियादी ने लोकायुक्त में शिकायत कर दी। सत्यापन सही पाए ट्रैप की कार्रवाई की गई।
फरियादी कमल सिंह निंगवाल ने बताया कि वह ग्राम डिग्गी का निवासी है। उसे अपने 7 वर्षीय बेटे पवन सिंह का जन्म प्रमाण पत्र बनवाना था। इसके लिए रोजगार सहायक दिनेश कुमार के पास पहुंचा। जहां पर उसने जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए 1600 सौ रुपए की रिश्वत मांगी। जिसके बाद फरियादी ने लोकायुक्त में शिकायत कर दी। सत्यापन सही पाए ट्रैप की कार्रवाई की गई।
रिश्वत मामले में पकड़े गए सभी आरोपियों के खिलाफ लोकायुक्त ने भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 की धारा 7 के अंतर्गत कार्रवाई की गई।