कौशल विश्वकर्मा,एडिटर इन चीफ 9893833342
बांधवगढ़ (संवाद)। बात 12 साल पुरानी है जब बांधवगढ़ टाईगर रिजर्व के ताला जोन में झुरझुरा वाली मशहूर बाघिन की दहाड़ गूंजती रही है। अपने 3 शावको के साथ वह अक्सर वह पर्यटकों को दिखाई देती रही है। लेकिन 18 मई 2010 की वह काली शाम जब वह अपने शावको के साथ जंगल मे विचरण कर रही थी तभी किसी अज्ञात वाहन ने उसे ठोकर मार दी।हालांकि बाघिन वाहन की ठोकर से मरी नही बल्कि वह घायल हुई थी।उसके बाद न जाने कितनी ठोकर उसे खानी पड़ी जिससे 19 मई को अंततः उसकी मौत हो गई।
मई का महीना था और गर्मी पूरे शबाब में थी जिससे पर्यटन शाम 6 बजे के बाद तक भी जंगल गाड़ियां निकलने का क्रम जारी था।इसके बाद पार्क में पर्यटन बंद हो जाता है।वाहन की ठोकर घायल बाघिन रात भर अपने शावको के साथ दर्द से कराहती तो रही, लेकिन वाहनों की धमाचौकड़ी से वह शांति से विश्राम करती रही।पूरी रात वह वाहन से लगी ठोकर को याद कर वाहनों के प्रति गुस्सा जाहिर करती रही। अगले दिन यानी 19 मई को जैसी ही सुबह हुई वह अपने नन्हे शावको की भोजन के तलाश में निकली ही थी कि सुबह 6 बजे से पुनः वाहन और उसमें बैठे पर्यटकों की धमाचौकड़ी देख घायल शेरनी (बाघिन) को उसको लगी ठोकर याद आ गई और वह गुस्से में वाहनों के ऊपर अटैक करने लगी। इस दौरान वाहन चालकों के द्वारा पर्यटकों की सुरक्षा के लिहाज से आनन फानन में अपने अपने वाहन को वहां से भागना चाहा तो इस दौरान भी वाहन की ठोकर बाघिन को लगी लेकिन वह अटैक करना नही छोड़ी।इसके बाद पर्यटकों के साथ मौजूद वाहन चालकों और गाइडो के द्वारा बांधवगढ़ प्रबंधन को बाघिन के इस रुख की जानकारी दी गई।
जानकारी के बाद बांधवगढ़ प्रबंधन के तात्कालिक एसडीओ डीसी घोरमारे अपने दल के साथ मौका स्थल पर पहुंचे और बाघिन की तलाश करने लगे तभी कुछ ही दूर में घायल बाघिन दिखाई दी।जिसके बाद जैसे ही प्रबंधन बाघिन के पास पहुंचा ही था कि घायल बाघिन दौड़कर उनके वाहन में अटैक कर दी।इसके पहले एसडीओ कुछ समझ पाते वह चालक को गाड़ी बैक कर तुरंत वहां से हटने के कहा,जल्दबाजी में चालक के द्वारा गाड़ी को बैक करने दौरान वहीं पर बने लकड़ी के मचान में जा टकराई जिससे मचान क्षतिग्रस्त होकर घायल बाघिन के ऊपर गिर गया।जिससे उसे और भी चोंटे आई थी।इसके बाद भी बाघिन का हमलावर रुख बरकरार रहा है।वह जब भी किसी वाहन को देखती तो वह घायल अवस्था मे ही दौड़ पड़ती।

कुछ घण्टो के बाद प्रबंधन के द्वारा अपने पालतू हाथियों की मदद से उस जगह पर पहुंचे जहां पर अब घायल बाघिन चुपचाप बैठ चुकी थी काफी देर तक प्रबंधन हाथियों के सहारे दूर से बाघिन पर नजर रखे हुए था।लेकिन जब काफी देर तक उसने कोई हरकत नही की तब उन्हें अहसास हुआ कि बाघिन की मौत हो चुकी है। उसके बाद धीरे पार्क अमला बाघिन के पास पहुंचा तब जानकारी लगी झुरझुरा की मशहूर बाघिन अब इस दुनिया मे नही रही। इस तरीके से बांधवगढ़ की फेमस बाघिन का अपने 3 नन्हे शावको को छोड़कर हमेशा के लिए चली गई। उस समय पार्क के तत्कालीन डायरेक्टर सीके पाटिल बांधवगढ़ में मौजूद नही थे। वह विभागीय कार्य से राजधानी भोपाल गए हुए थे।स्टॉप के द्वारा जब उन्हें जानकारी दी गई तब वह अगले ही दिन सुबह बांधवगढ़ पहुंच गए।
बाघिन की मौत उपरांत डॉक्टरों की टीम के द्वारा उसका पीएम आदि के एनटीसीए की गाइडलाइन के अनुसार उसका अंतिम संस्कार कर दिया। अब प्रबंधन के पास 2 बड़ी चुनौतियां सामने थी। जिसमें पहले यह कि मृत हुई बाघिन के 3 नन्हे शावको को पालने की और दूसरी बाघिन की मौत किन वजहों से हुई या एक्सीडेंट किस वाहन से और किस परिस्थिति में हुआ। बाँधवगढ़ के डायरेक्टर सीके पाटिल पहुंच चुके थे,प्रबंधन के अन्य लोंगो के द्वारा नन्हे शावको को एक बाड़े में रखा गया और उनकी देखभाल की जाने लगी।इधर साहब अन्य स्टॉप के साथ मिलकर 18 मई की शाम और 19 मई की सुबह बाँधवगढ़ के ताला मुख्य गेट से प्रवेश टूरिस्टों उनकी जिप्सियां और विभागीय वाहनों को जांच के दायरे में लिया गया। पूंछतांछ का दौर शुरू हुआ फिर अचानक यह बात भी सामने आई कि 18 मई को शाम जिला पंचायत उमरिया के तत्कालीन सीईओ अक्षय कुमार सिंह,जनपद मानपुर के सीईओ केके पाण्डेय,रेंजर ललित पाण्डेय भी अपने वाहन से पार्क के अंदर प्रवेश किये थे उनसे भी जब पूंछतांछ हुई तब बाद में पता चला था कि पार्क के अंदर मनरेगा के तहत कुछ कार्य चल रहे थे उसका निरीक्षण करने यह लोग गए हुए थे। उनके भी वाहन चालकों से पूंछतांछ की गई इसके पहले उन तमाम टूरिस्टों उनके चालक और गाइडो से जब कुछ पता नही चला तब प्रबंधन की जांच की सुई सीईओ अक्षय कुमार सिंह,केके पाण्डेय के इर्द गिर्द घूमने लगी।
सीईओ अक्षय कुमार सिंह,केके पाण्डेय और रेंजर ललित पाण्डेय के चालक को लिया जांच के दायरे
